हम अक्सर बचपन से ही सुनते आए हैं कि हिन्दू धर्म में 33 करोड़ देवी-देवता हैं. स्कूल की किताबों से लेकर घर की बातचीत तक यह बात आम है. लेकिन क्या सच में शास्त्रों में ऐसा लिखा है? उज्जैन के प्रसिद्ध भागवत कथाकार और ज्योतिषाचार्य पं. मनीष शर्मा के अनुसार, यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है. उनका कहना है कि शास्त्रों में 33 करोड़ नहीं, बल्कि 33 कोटि देवताओं का उल्लेख मिलता है.
हिंदी और संस्कृत भाषा में कोटि शब्द के दो मतलब होते हैं. पहला मतलब होता है करोड़ (संख्या) और दूसरा मतलब होता है प्रकार (Category). धर्मशास्त्रों के जानकारों की मानें तो यहां ‘कोटि’ का अर्थ ‘प्रकार’ से है. यानी हिंदू धर्म में कुल 33 प्रकार के प्रमुख देवता बताए गए हैं, न कि 33 करोड़. वक्त के साथ बोलचाल की भाषा में लोगों ने कोटि को करोड़ समझ लिया और यही बात घर-घर में प्रचलित हो गई.
शास्त्रों के अनुसार, इन 33 कोटि देवताओं को अलग-अलग समूहों में बांटा गया है. इसमें वसु, रुद्र, आदित्य और अन्य शक्तियां शामिल हैं. चलिए समझते हैं इनका पूरा गणित.
हिंदू परंपरा में किसी भी शुभ काम की शुरुआत में इन 33 कोटि देवताओं का आह्वान किया जाता है. माना जाता है कि ये सभी देवता मिलकर सृष्टि का संचालन करते हैं.
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