AI IMAGE
‘विश्व कप हमारा नहीं हो सकता, लेकिन फॉकलैंड द्वीपसमूह तो हमारे हैं,’ अर्जेंटीना की फुटबॉल टीम के इंग्लैंड को हराकर क्वार्टरफाइनल में पहुंचने के बाद Las Malvinas son Argentinas (फॉकलैंड द्वीप अर्जेंटीना के हैं) वाला बैनर फहराने पर डाउनिंग स्ट्रीट का यही जवाब था.
इसके बाद केयर स्टार्मर की सरकार को ब्रिटिश संप्रभुता की पुनः पुष्टि करनी पड़ी. प्रधानमंत्री ने खुद FIFA से उन खिलाड़ियों की जांच कराने की अपील की, जिन्होंने बैनर दिखाया था. यह घटना स्पष्ट करती है कि इंग्लैंड बनाम अर्जेंटीना का मुकाबला लंबे समय से क्षेत्रीय विवाद, राष्ट्रवाद और ऐतिहासिक स्मृति का प्रतीक बन चुका है.
19वीं सदी में ब्रिटिश आप्रवासियों के साथ फुटबॉल अर्जेंटीना पहुंचा था. स्कॉटिश स्कूल मास्टर अलेक्जेंडर वॉटसन हटन को ‘अर्जेंटाइनी फुटबॉल का पिता’ माना जाता है.
1966 विश्व कप क्वार्टरफाइनल में भी, जब अर्जेंटीना के कप्तान एंटोनियो रैटिन को छह मिनट तक मैदान से बाहर न जाने पर रेड कार्पेट पर बैठकर विरोध जताया और क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय के लिए प्रतीक्षा की, तथा इंग्लैंड के मैनेजर अल्फ रैम्जी ने अर्जेंटाइनी खिलाड़ियों को ‘जानवर’ कहा, तब भी यह सिर्फ फुटबॉल की प्रतिद्वंद्विता थी. लेकिन 16 साल बाद सब बदल गया.
फॉकलैंड द्वीपसमूह 1833 से लगातार ब्रिटिश प्रशासन के अधीन हैं, हालांकि शत्रुता की जड़ें 19वीं सदी की शुरुआत में ब्रिटिश आक्रमणों तक जाती हैं. अर्जेंटीना लंबे समय से दावा करता रहा है कि स्वतंत्रता के बाद उसे स्पेन से इन द्वीपों की संप्रभुता विरासत में मिली थी.
1982 में सैन्य तानाशाह लियोपोल्डो गाल्टिएरी ने आर्थिक संकट के बीच घरेलू समर्थन जुटाने के लिए द्वीपों पर कब्जा कर लिया. मार्गरेट थैचर के नेतृत्व में ब्रिटेन की जीत हुई, जिसने तानाशाह का पतन तेज कर दिया और अर्जेंटीना को लोकतंत्र वापस दिलाया. लेकिन ‘माल्विनास’ अर्जेंटीना की राष्ट्रीय चेतना में गहराई से समाए रहे. उसके बाद इंग्लैंड के खिलाफ हर फुटबॉल मैच युद्ध की छाया में खेला गया.
अगर फॉकलैंड युद्ध ने इस प्रतिद्वंद्विता को राजनीतिक रंग दिया, तो 1986 विश्व कप क्वार्टरफाइनल ने इसे किंवदंती बना दिया. डिएगो मराडोना ने मात्र चार मिनट के अंतराल में फुटबॉल इतिहास के दो सबसे प्रसिद्ध गोल किए. पहला ‘हैंड ऑफ गॉड’ और दूसरा इंग्लैंड की टीम को चीरता हुआ सोलो रन. अर्जेंटीना 2-1 से जीता और विश्व कप जीत लिया. मराडोना ने अपनी आत्मकथा में इसे 1982 का ‘प्रतीकात्मक बदला’ बताया.
1998 विश्व कप में डेविड बेकहम को डिएगो सिमियोने द्वारा उकसाए जाने के बाद लात मारने पर लाल कार्ड मिला और वे इंग्लैंड के पेनल्टी शूटआउट हारने के लिए scapegoat बन गए. लेकिन 2002 विश्व कप में बेकहम ने पेनल्टी पर गोल कर बदला ले लिया.
लंदन में नाइजेल फाराज ने रॉयल नेवी को तैयार रहने को कहा. ब्यूनस आयर्स में उपराष्ट्रपति विक्टोरिया विलारुएल ने इंग्लिशों को ‘अवैध कब्जाकार समुद्री डाकू’ कहा और ‘माल्विनास’ को मराडोना-Messi से जोड़ने वाला वायरल गान गूंज उठा. इससे पहले अर्जेंटीना ने ब्रिटिश युद्धपोत HMS Medway की गतिविधियों पर औपचारिक विरोध दर्ज किया था.
नाटक प्रीमियर लीग तक पहुंच गया है. कई अर्जेंटाइनी खिलाड़ी, जिन्होंने बैनर दिखाया, इंग्लिश साथियों के साथ ड्रेसिंग रूम शेयर करते हैं. लेकिन चेल्सी में एंजो फर्नांडीज के 85वें मिनट के बराबरी गोल पर क्लब द्वारा पोस्ट किए गए मैसेज पर भारी विरोध हुआ, जिसके बाद पोस्ट डिलीट कर दिया गया.
थैचर के पूर्व विदेश नीति सलाहकार ने उन सभी अर्जेंटाइनी प्रीमियर लीग खिलाड़ियों की ब्रिटेन वर्क वीजा रद्द करने की मांग की है, जो बैनर में शामिल थे.
फुटबॉल इतिहासकार जोनाथन विल्सन ने इसे ‘विचित्र, लगभग ओडिपल संबंध’ बताया है. कुछ लोग इसे शांत करने की कोशिश करते रहे हैं. मैच खत्म होते ही अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई ने कहा, ‘ये सिर्फ फुटबॉल मैच था.’ इससे पहले कोच लियोनेल स्कालोनी भी कह चुके थे कि ‘ये सिर्फ फुटबॉल का खेल है.’
ठीक 40 साल पहले मराडोना ने भी रिपोर्टरों से कहा था, ‘नहीं, नहीं, नहीं. ये सिर्फ फुटबॉल है.’ लेकिन इतिहास कुछ और ही कहता है.
ये भी पढ़ें: FIFA World Cup Final: फुटबॉल के इतिहास का सबसे बड़ा दिन आज, खिताब के लिए इस टीम से भिड़ेगी मेसी की अर्जेंटीना
-भारत एक्सप्रेस
MP SUGAM PARIVAHAN SEVA LAUNCH: मध्य प्रदेश में सरकारी निगरानी वाली सुलभ और सुरक्षित यात्री…
ग्रेटर नोएडा के यमुना एक्सप्रेस-वे पर दिल्ली से महोबा जा रही स्लीपर बस में आग…
एडीआर ने नेशनल इलेक्शन वॉच के साथ लोकसभा, राज्यसभा और राज्य विधानसभाओं के लिए निर्वाचित…
बिहार के लखीसराय में 60 साल के पिंकू सिंह ने 23 साल की वर्षा रानी…
सुप्रीम कोर्ट ने रिटायर्ड हाई कोर्ट जजों को मिलने वाली सुविधाओं में राज्यों के बीच…
बनारस को मोक्ष की नगरी कहा जाता है, लेकिन इसी शहर की चिताओं के बीच…