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मैराथन में भारतीय सेना का कमाल! 48 साल बाद टूटा रिकॉर्ड, हवलदार सावन बरवाल ने लिखा नया इतिहास

Sawan Barwal marathon story: नीदरलैंड के रॉटरडैम में आयोजित एनएन मैराथन में भारतीय सेना के धावक हवलदार सावन बरवाल (Sawan Barwal) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया. उन्होंने इस रेस को 2 घंटे 11 मिनट 58 सेकंड में पूरा किया और एलीट कैटेगरी में 20वां स्थान हासिल किया. इस रेस में दुनिया के कई शीर्ष धावक शामिल थे.

इस प्रतियोगिता में इथियोपिया के गुए इदेमो अदोला ने 2 घंटे 3 मिनट 54 सेकंड के समय के साथ पहला स्थान प्राप्त किया. वहीं भारत के एक अन्य धावक टी. गोपी ने 2 घंटे 13 मिनट 16 सेकंड का समय निकालकर 23वां स्थान हासिल किया.

48 साल पुराना रिकॉर्ड टूटा

सावन बरवाल ने भारतीय एथलेटिक्स का एक ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ दिया. इससे पहले यह रिकॉर्ड शिवनाथ सिंह के नाम था, जिन्होंने 1978 में 2 घंटे 12 मिनट का समय बनाया था. यानी यह रिकॉर्ड लगभग 48 साल तक कायम रहा.

सावन भारतीय सेना में हवलदार के पद पर कार्यरत हैं और उन्होंने पहली बार इस स्तर की अंतरराष्ट्रीय मैराथन में हिस्सा लिया. अपने प्रदर्शन को लेकर उन्होंने कहा कि यह उनका डेब्यू था और उन्हें इस अनुभव से बहुत कुछ सीखने को मिला.

एशियन गेम्स पर रहेगा अगला फोकस

सावन बरवाल का अगला बड़ा लक्ष्य एशियन गेम्स है. उन्होंने कहा कि अब उनका पूरा ध्यान वहीं प्रदर्शन सुधारने पर है. इस उपलब्धि के साथ उन्होंने एशियन गेम्स के लिए क्वालिफिकेशन भी हासिल कर लिया है. उन्होंने बताया कि आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट से उन्हें बेहतर ट्रेनिंग और सुविधाएं मिली हैं. पहले उनके पास सही संसाधन और जानकारी नहीं थी, लेकिन यहां आने के बाद उन्हें प्रोफेशनल स्तर की ट्रेनिंग समझ में आई.


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स्पोर्ट्स साइंस और फिटनेस का महत्व

सावन के अनुसार आधुनिक खेलों में स्पोर्ट्स साइंस का बड़ा रोल है, जो लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक प्रदर्शन को प्रभावित करता है. उन्होंने न्यूट्रिशन, ट्रेनिंग तकनीक और इंजरी से बचाव के बारे में भी नई जानकारी हासिल की है. उन्होंने कहा कि किसी भी खिलाड़ी के लिए चोट से बचना बेहद जरूरी है, क्योंकि एक छोटी चोट भी लंबे समय तक तैयारी को प्रभावित कर सकती है.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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