यूटिलिटी

Telegram पर बेची जा रही हैं भारतीय नागरिकों की पैन-आधार और पासपोर्ट डिटेल्स, चैनल की प्रोफाइल फोटो में है पाकिस्तानी झंडा

डाटा लीक को लेकर एक बार फिर बड़ी खबर आई है. लगभग 5000 भारतीय नागरिकों का आधार, ड्राइविंग लाइसेंस, पासपोर्ट और पैन विवरण उपलब्ध कराया गया है. माना जा रहा है कि यह काम पाकिस्तानी हैकरों ने किया है.

इस बारे में और रिसर्च करने पर पता चला कि ये डेटा पब्लिक फोरम पर भी उपलब्ध कराया गया है. इसके साथ, लीक हुए डेटा को केवल एक साधारण Google खोज से एक्सेस किया जा सकता है. हैकर्स ज्यादातर डेटा को डार्क वेब पर उपलब्ध कराकर बेच देते हैं. लेकिन, ये सौदे निजी चैनलों के जरिए पूरे किए गए हैं.

हैकर्स ने न केवल टेलीग्राम चैनलों के माध्यम से पहचान डेटा बेचा बल्कि इन डेटा को सार्वजनिक रूप से सुलभ मंचों पर भी उपलब्ध कराया. अब अन्य हैकर समूह भी केवल Google खोज के माध्यम से इन डेटा तक पहुँच प्राप्त कर सकते हैं.

ये भी पढ़ें- Flipkart Big Saving Days: 16 दिसंबर से फ्लिपकार्ट पर सेल, टीवी, स्मार्टफोन और लैपटॉप पर पाएं 80% तक की छूट

थ्रेट इंटेलिजेंस रिसर्चर सौम्या श्रीवास्तव ने डार्क वेब पर इन समूहों के बारे में पता लगाया. जहां वह बातचीत के लिए टेलीग्राम पर एक निजी चैनल का इस्तेमाल कर रहा था. इस ग्रुप में ज्यादातर चर्चा उर्दू में हो रही थी. चैनल की प्रोफाइल फोटो पर पाकिस्तानी झंडा लगा हुआ था.

कई दिनों की बातचीत के दौरान हैकर्स ने दावा किया कि उनके पास भारतीय रेलवे, एनटीआरओ और अन्य कॉर्पोरेट निकायों जैसी भारत सरकार की एजेंसियों का भी डेटा है. इसके बाद हैकर्स ने 5.5GB डंप लिंक आधार और पैन कार्ड शेयर किया. इसमें स्कैन कॉपी के साथ 1059 आधार और पैन कार्ड की डिटेल थी.

इंडिया टुडे ने इस खबर की दूसरे तरीके से भी पड़ताल की रिसर्च में पाया गया कि ये हैकर्स पब्लिक में भी डेटा लीक कर रहे थे. लगभग 4000 और आधार पैन कार्ड, पासपोर्ट और ड्राइविंग लाइसेंस एक वेबसाइट पर खुलेआम लीक हो गए. इसके अलावा नेटफ्लिक्स अकाउंट डिटेल्स और पासवर्ड भी वेबसाइट पर डाला गया.

हम जिस वेबसाइट का उपयोग करते हैं वह वर्ल्ड वाइड वेब का एक छोटा सा हिस्सा है. इसके अलावा इंटरनेट पर डीप वेब और डार्क वेब भी मौजूद है. इसे एक्सेस करने के लिए विशिष्ट सॉफ़्टवेयर, कॉन्फ़िगरेशन और प्राधिकरण की आवश्यकता होती है. इसे एक्सेस करने के लिए कभी-कभी अद्वितीय अनुकूलित संचार प्रोटोकॉल की भी आवश्यकता होती है.

इस पर सामग्री छिपी हुई है और खोज इंजन पर अनुक्रमित नहीं है. इसे केवल एक विशेष ब्राउज़र के माध्यम से ही एक्सेस किया जा सकता है. यहां यूजर्स अपनी पहचान भी छिपाकर रखते हैं, ज्यादातर हैकर्स यहीं से डाटा का लेन-देन करते हैं.

Dimple Yadav

Recent Posts

दिल्ली का ‘मिनी बंगाल’ हुआ मां दुर्गा की भक्ति में लीन, देखें 50वें वर्ष के भव्य दूर्गा पूजा के आयोजन की खूबसूरत तस्वीरें

दिल्ली के 'मिनी बंगाल' चितरंजन पार्क में दुर्गा पूजा का 50वां वर्ष धूमधाम से मनाया…

17 minutes ago

PK की एंट्री और अनंत सिंह की बगावत… बिहार विधान परिषद की 8 सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले तेज हुई हलचल

बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव से पहले सियासी सरगर्मी…

32 minutes ago

Cupid के टर्नअराउंड से PC Jeweller तक: आदित्य कुमार के ₹73 करोड़ के इन्वेस्टमेंट से ज्वैलरों की बदलेगी किस्मत?

ADITYA HALWASIYA INVESTS IN PC JEWELLER: हेल्थकेयर और एफएमसीजी क्षेत्र की कंपनी क्यूपिड लिमिटेड (Cupid…

37 minutes ago

PFI प्रमुख अबुबकर को मैक्स अस्पताल में इलाज की अनुमति, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने PFI प्रमुख अबुबकर को मैक्स अस्पताल में इलाज कराने की अनुमति दे…

37 minutes ago

‘कुर्सी हथियाने की हो रही है नापाक साजिश’, सीएम योगी ने खोली दी पोल; बोले- नहीं मिलेगी सफलता

CM Yogi Statement On Bangladesh Model: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष और…

49 minutes ago