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समय पर सैलरी नहीं देती कंपनी? लेबर लॉ के इन कड़े नियमों से मालिकों पर कसेगा शिकंजा, हो सकती है जेल

Salary Delay Labor Law: नौकरीपेशा लोगों के लिए महीने की आखिरी तारीख के बाद सबसे ज्यादा इंतजार सैलरी आने का होता है. बैंक खाते में महीने की शुरुआत में पैसे आ जाएं तो घर का बजट और महीने भर के खर्चे आसानी से संभल जाते हैं. लेकिन कई बार प्राइवेट कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों को समय पर सैलरी न मिलने की इस बड़ी समस्या से दो-चार होना पड़ता है. कई दफ्तरों में तो महीनों तक तारीख पर तारीख मिलती रहती है. अगर आपकी कंपनी भी बार-बार ऐसा करती है और समय पर वेतन नहीं देती है तो आपको घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है क्योंकि लेबर लॉ में इसके खिलाफ कड़े नियम बनाए गए हैं.

क्या कहता है नया लेबर कोड?

नियमों के मुताबिक जिन कर्मचारियों को हर महीने सैलरी मिलती है, उन्हें अगले महीने की 7 तारीख बीतने से पहले भुगतान मिल जाना चाहिए. उदाहरण के लिए अगर आपने जुलाई महीने में अपनी मेहनत से काम किया है तो आपको जुलाई की सैलरी हर हाल में 7 अगस्त तक मिल ही जानी चाहिए. ‘कोड ऑन वेज, 2019’ की धारा 17 में इस बात का साफ जिक्र किया गया है. अगर कोई कंपनी इस नियम का पालन नहीं करती है तो वह कानूनन गलत कर रही है.

पहली बार गलती पर लगता है जुर्माना

अगर कोई कंपनी तय समयसीमा यानी 7 तारीख तक कर्मचारियों के खाते में पैसे नहीं भेजती है या फिर तय सैलरी से कम भुगतान करती है, तो उस पर कानूनी शिकंजा कसा जा सकता है. ऐसे मामलों में पहली बार नियम तोड़ने पर 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है. यानी शुरुआती उल्लंघन पर सीधे जेल भेजने की बजाय आर्थिक दंड दिया जाता है ताकि कंपनी अपनी व्यवस्था सुधार ले.

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दोबारा गलती पर होगी जेल

लेकिन अगर कोई नियोक्ता या कंपनी इस जुर्माने से भी नहीं सुधरती है और अगले पांच सालों के भीतर फिर से वही गलती दोहराती है तो मामला गंभीर हो जाता है. ऐसी स्थिति में सजा का प्रावधान काफी कड़ा है. दोबारा नियम तोड़ने पर तीन महीने तक की जेल एक लाख रुपये तक का भारी जुर्माना या फिर ये दोनों सजाएं एक साथ भी भुगतनी पड़ सकती हैं.

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि 8 तारीख आते ही मालिक को सीधे हथकड़ी लग जाएगी. किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई से पहले पूरी जांच होती है और कानून की तय प्रक्रिया का पालन किया जाता है.

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-भारत एक्सप्रेस

Radha Priya

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