उत्तर प्रदेश

Agra petha उद्योग पर खतरा मंडराया, पेठा कारोबारियों के सामने आया बड़ा संकट

Agra petha : आगरा का पेठा देश विदेश में काफी प्रसिद्ध है. आगरा घूमने आने वाले पर्यटक कई वैरायटी के पैठे खरीदकर अपने साथ जरूर ले जाते हैं. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब यह उद्योग खतरे में है. आगरा का ताजमहल बढ़ते पर्यावरण प्रदूषण के कारण पीला और खराब होता जा रहा था जिसके कारण आगरा शहर को ताज ट्रिपेजियम जोन बनाया गया था. इस जोन के बनने के बाद कई उद्योग धंधे बंद किए गए और अब पेठा उद्योग पर भी खतरा मंडरा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश किया है कि आगरा के स्मारकों की सुरक्षा के लिए आगरा पेठा उद्योग को TTZ क्षेत्र से बाहर किया जाए.

Agra petha उद्योग कारोबारियों के लिए पुनर्वास योजना बनाई जाए

TTZ क्षेत्र में ताजमहल, आगरा किला, फतेहपुर सीकरी जैसे स्मारक शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट ने तीन महीने में पेठा उद्योग से जुड़े कारोबारियों के लिए यूपी सरकार से पुनर्वास योजना बनाने को कहा है. सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 23 सितंबर 2025 को है.

Agra petha कारोबारियों के सामने है बड़ा संकट

आगरा में लगभग 25 वैरायटी के एक हजार किलो पेठा का उत्पादन प्रतिदिन होता है. पेठा कारोबार से जुड़े कारोबारी हरीश के मुताबिक उनको आगरा शहर से बाहर अपना उद्योग ले जाने में बहुत दिक्कतें हैं. उनको उद्योग के लिए जमीन खरीदने, नई फैक्ट्री बनाने और फिर से सब कुछ शुरू करने के लिए पैसा और साधन चाहिए जो नामुमकिन है ऐसे में उनके सामने बेरोजगारी की समस्या मंडरा रही है.

ताजमहल निर्माण में कार्यरत मजदूरों को मिलता था पेठा

Agra petha कारोबार से 5000 लोग जुड़े हुए हैं और इस आदेश के बाद इनके सामने भी एक बड़ी समस्या खड़ी हो गई है. आगरा के पैठे का कारोबार 500 करोड़ रुपए का है और कहा जाता है कि मुगलों की रसोई से पेठा बना है. मुगल शासक शाहजहां ताजमहल निर्माण में कार्यरत मजदूरों को प्रतिदिन पेठा दिया करता था.

वर्ष 1996 में आगरा शहर बना था ताज ट्रिपेजियम जोन

सुप्रीम कोर्ट ने 1996 में आगरा स्मारकों के मद्देनजर पर्यावरण नियमों का हवाला देते हुए TTZ बनाया था और उस समय आगरा में चल रहे उद्योगों में कोयले के इस्तेमाल को प्रतिबंधित कर दिया था. सन 2013 में आगरा में कोयला ले जाने वाले ट्रकों पर भी रोक लगा दी गई थी. सन 2022 में जिला प्रशासन ने कोयले का उपयोग करने वाली 11 पेठा इकाइयों को सील कर दिया था. अब पेठा इकाइयां Gail gas और LPG गैस जैसे ईंधन का उपयोग करते हैं.

आगरा विकास प्राधिकरण शहर से बाहर पेठा नगरी बनाने का कर चुका है प्रयास

आगरा विकास प्राधिकरण ने वर्ष 1998 में आगरा शहर से बाहर Agra petha नगरी कालिंदी विहार बनाए जाने का प्रयास किया था लेकिन वह सफल नहीं हो पाया. इन इकाइयों को अब TTZ क्षेत्र से बाहर जाना पड़ेगा. पेठे की कुछ इकाइयां मथुरा के कोसी और अलीगढ़ के सासनी चली भी गई हैं.
आगरा की पहचान बन चुके पेठा उद्योग को लेकर कारोबारियों में काफी नाराजगी है और वह सरकार से मांग कर रहे है कि उनके उद्योग को बचाने के लिए सब्सिडी और रियायती दरों पर जमीन उपलब्ध कराई जाए जिससे वह अपने इस कारोबार से जुड़े रहें वरना इस उद्योग को काफी नुकसान होगा और इससे जुड़े 5000 कर्मी भी बेरोजगार हो जाएंगे.

भारत एक्सप्रेस

सुशील कुमार तिवारी

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