सुप्रीम कोर्ट ने बिहार एसआईआर से जुड़े मामले में मतदाता पंजीकरण के लिए दावे और आपत्तियां दाखिल करने के लिए एक सितंबर को खत्म हो रहे समय-सीमा को बढ़ाने से इनकार कर दिया है.
इसको लेकर आरजेडी सहित अन्य की ओर से दायर की गई थी. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ 8 सितंबर को अगली सुनवाई करेगी. मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि दायर याचिका का विरोध करते हुए कहा कि अगर आपत्तियां और दावे दाखिल करने की आज की अंतिम तारीख को बढ़ा दिया गया तो पूरा शिड्यूल बिगड़ जाएगा, जो आयोग के नियमों के अनुसार तय किया गया है.
इसपर जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि वे किस आधार पर मतदाताओं के नाम हटाने की मांग कर रहा है? आयोग के वकील ने कोर्ट को बताया कि जो मर चुके है. उन्होंने यह भी कहा कि कई मामलों में मतदाता स्वयं आगे आकर कह रहे हैं कि उनका नाम कहीं और शामिल है और उसे हटाने का अनुरोध कर रहे हैं. जबकि याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि वह नियमों के मुताबिक पारदर्शिता का पालन नही कर रहें हैं.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हमने पिछले आदेश में राजनीतिक दलों को सहयोग करने के लिए कहा था. लेकिन उनके दावे भी 100 फीसदी है. चुनाव आयोग के वकील ने कहा कि लोगों को परेशानी नहीं है, लेकिन एडीआर को है, जिसका बिहार से कोई लेना देना नही है. आयोग के वकील ने कहा कि 30 सितंबर के बाद भी आवेदन कर सकते है. उन सभी पर विचार किया जाएगा. लेकिन अगर तारीख को टाला जाता है कि सभी तारीख टालना पड़ेगा.
भूषण ने कहा कि वे कह रहे हैं कि जो लोग 1 सितंबर के बाद आवेदन करेंगे, उनके नाम 30 सितंबर को बनी सूची में नहीं दिखाई देंगे, लेकिन इसे ठीक किया जा सकता है. भूषण ने आगे कहा कि बिहार में बाढ़ आ गई है. वे पारदर्शिता के अपने ही बनाए गए नियमों का पालन नहीं कर रहें है. मुझे नही पता कि मेरे फॉर्म में क्या है? उन्होंने यह भी कहा कि वे उन सभी लोगों से, जिनका नाम मतदाता सूची में नहीं है. फॉर्म 6 भरने को कह रहे है. जिसमें यह घोषणा भी शामिल है कि उनका नाम पिछली किसी भी मतदाता सूची में नही था. दरअसल आरजेडी और एआईएमआईएम पार्टी एक सितंबर को खत्म हो रही समय सीमा में एक सप्ताह का विस्तार चाह रही थी, क्योंकि 22 अगस्त के अदालती आदेश से पहले और बाद में 175000 से ज्यादा दावे किए गए थे.
याचिककर्ताओ का कहना था कि चुनाव आयोग से यह मांग उन्होंने की थी, लेकिन आयोग ने समय सीमा को बढ़ाने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. दायर याचिका में कहा गया है कि दावों और आपत्तियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, इसलिए समय बढ़ाने की जरूरत है.
एआईएमआईएम के वकील निजाम पाशा ने पिछली सुनवाई के दौरान कहा था कि कोर्ट के गत 2 अगस्त के आदेश के पहले 84000 दावे दाखिल हुए थे, जबकि आदेश के बाद करीब 95000 दावे दाखिल हुए हैं, जिसे देखते हुए समय बढ़ाने की आवश्यकता है.
कोर्ट ने सवाल किया था कि क्या वाकई उन्होंने इस संबंध में चुनाव आयोग से संपर्क किया था. जबकि आरजेडी की ओर से पेश वकील ने अपनी याचिका में कहा है कि एसआईआर में मतदान केंद्रों की संख्या बढ़कर 90,712 हो गई है और पार्टी ने 47506 मतदान केंद्रों पर बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए) नियुक्त किए है, जो कुल मतदान केंद्रों का लगभग 52 फीसदी है.
बता दें कि बिहार में अबतक 2 लाख 7 हजार 565 मतदाताओं ने नाम प्रारूप सूची से हटाने का आवेदन दिया है. इसके लिए फार्म 7 भरकर जमा कराया है. 31 अगस्त को आयोग ने इसकी जानकारी दी है. आयोग के मुताबिक व्यक्तिगत रूप से आवेदकों ने 22, 326 नाम शामिल करने को लेकर आवेदन दिया है. जबकि राजनीतिक दलों के बीएलए के माध्यम से 103 नाम हटाने के आवेदन दिए गए हैं.
आयोग के मुताबिक अबतक 15 लाख 32 हजार 438 मतदाताओं ने नए मतदाता के रूप में अपना नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने के लिए फॉर्म 6 के जरिए आवेदन किया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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