उत्तर प्रदेश

आरक्षण पर फिर छिड़ी बहस: भागवत के बयान पर मायावती का पलटवार, क्रीमी लेयर को लेकर कहीं बड़ी बात

Mayawati news: उत्तर प्रदेश में 2027 (up election 2027) के विधानसभा चुनाव से पहले आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है. बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती (Mayawati) ने आरक्षण को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत (Mohan Bhagwat) के हालिया बयान पर कड़ी आपत्ति जताई है. मायावती ने साफ कहा कि SC, ST और OBC के आरक्षण में ‘क्रीमी लेयर’ की बात करना सामाजिक न्याय और बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के उद्देश्यों के खिलाफ है.

मायावती ने रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट के जरिए अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों ने लंबे समय तक जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता का सामना किया है. उनके मुताबिक, देश में हालात बदले जरूर हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर जातिवाद और भेदभाव अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.

भागवत के बयान पर मायावती का निशाना

दरअसल, मोहन भागवत ने हाल ही में आरक्षण को लेकर कहा था कि इस मुद्दे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा था कि आरक्षण सामाजिक कारणों से दिया गया है और जब तक समाज में भेदभाव मौजूद रहेगा, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए. भागवत ने यह भी कहा था कि आरक्षण का लाभ पा चुके लोगों को आगे आकर अपनी इच्छा से इसका लाभ छोड़ने पर विचार करना चाहिए.

इसी बयान पर मायावती ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि इस तरह की सोच सामाजिक वास्तविकता को नजरअंदाज करती है और संविधान की भावना के अनुरूप नहीं है. मायावती का कहना है कि आरक्षण में बदलाव या ‘क्रीमी लेयर’ जैसी व्यवस्था की चर्चा करने के बजाय समाज में बराबरी स्थापित करने पर ध्यान दिया जाना चाहिए.

सरकार से भी की अपील

मायावती ने केंद्र सरकार से कहा कि अगर SC और ST वर्ग को क्रीमी लेयर के दायरे से बाहर रखने का मुद्दा अदालत में आता है, तो सरकार को मजबूती से अपना पक्ष रखना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि कई बार सरकारों की कमजोर कानूनी पैरवी के कारण सामाजिक बदलाव से जुड़े मामलों में अपेक्षित नतीजे नहीं मिल पाते.


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बसपा प्रमुख ने RSS से भी आरक्षण के मुद्दे पर राजनीति से दूर रहने की अपील की. उनका कहना है कि सामाजिक बराबरी हासिल होने तक आरक्षण की जरूरत बनी रहेगी और इसमें किसी भी तरह के बदलाव की वकालत करने से पहले जमीनी हकीकत को समझना जरूरी है.

-भारत एक्सप्रेस

Sahil Singh

पढ़ने-लिखने से शुरू हुआ सफर खबरों तक ले गया. पत्रकारिता को करियर बनाने का एक मात्र उद्देश्य—पढ़ना, साथ ही नई-नई चीज़ों को जानने की जिज्ञासा रखना था. आज से पहले ‘आज तक’ चैनल, उसके बाद दायित्व वेबसाइट, और अब भारत एक्सप्रेस में बतौर सब-एडिटर की भूमिका निभा रहा हूं.

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