उत्तर प्रदेश

‘कुछ लोग हमें आपस में लड़ाना चाहते हैं…संतों को विवाद नहीं, भजन-पूजा करनी चाहिए’, शंकराचार्य विवाद पर बोले महंत रविंद्र पुरी

Prayagraj Magh Mela Controversy: प्रयागराज में माघ मेले के दौरान शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के गंगा स्‍नान से जुड़ा विवाद थम नहीं रहा. स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद भी तीखी टिप्‍पणियां करते नजर आ रहे हैं. कई साधु-संतों ने उनका नाम लेकर कहा कि वे सनातनियों में एकता बनी रहने दें. कुछ अराजक तत्‍व सनातनियों को आपस में लड़ाना चाहते हैं.

अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी ने सनातनियों में एकता की अपील की है. उन्होंने कहा कि कुछ अराजक तत्‍वों का मकसद सिर्फ अपना फायदा उठाना है. रविंद्र पुरी ने कहा कि पूरे देश में सनातन की जय हो रही है. काशी और उज्जैन में भी इसका सकारात्‍मक असर दिख रहा है. लेकिन कुछ विधर्मी परेशान हैं और वे संतों को आपस में लड़ाने पर आमादा हैं.

माघ मेला में पालकी विवाद का जिक्र

बीते दिनों मौनी अमावस्या पर करोड़ों श्रद्धालुओं के बीच पालकी को लेकर विवाद हुआ था. इस पर महंत रविंद्र पुरी ने कहा कि वाहन और पालकी में क्या फर्क है. दोनों को ही लोगों द्वारा ढोया जाता है. लेकिन इतनी भीड़ में पालकी को संगम तक ले जाना मुश्किल है. उन्होंने याद दिलाया कि 2025 के शाही स्नान में अखाड़ों की पालकियां 200 मीटर दूर रोकी गई थीं. सिर्फ 13 मुख्य अखाड़े कुंभ स्नान करते हैं. अगर शंकराचार्य जी सिर्फ 50 मीटर और चलते तो शायद विवाद नहीं होता.

पुरी की स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद से अपील

महंत रविंद्र पुरी ने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से सीधे अपील की. उन्होंने कहा कि उपवास खत्म करें. कोई शर्त न रखें. संतों को भजन और पूजा करनी चाहिए. विरोध या हड़ताल नहीं. उन्होंने एक कहानी सुनाई कि एक संत कुत्ते को भी घी लगी रोटी देने दौड़ते हैं. संत निस्वार्थ होते हैं. रविंद्र पुरी ने कहा कि वे शंकराचार्य से मिलना चाहते थे, लेकिन ऐसा मीडिया व्यस्तता के कारण नहीं हो सका.

प्यार से मिलो तो सब मिल जाता है: रविंद्र पुरी

महंत रविंद्र पुरी ने कहा कि प्रयागराज तप और यज्ञ का स्थान है. यहां विरोध या राजनीति नहीं होनी चाहिए. सब शांति से रहें. शंकराचार्य पद को लेकर कोर्ट में मामला चल रहा है. फैसला आने के बाद ही पता चलेगा कि असली शंकराचार्य कौन है. रविंद्र पुरी ने कहा कि प्यार से मिलो तो सब मिल जाता है. घमंड से कुछ नहीं मिलता. उन्होंने पूछा कि क्या शंकराचार्य कल स्नान करेंगे. अगर बुलाएंगे तो वे खुद कंधे पर बिठाकर ले जाएंगे.

यह भी पढ़िए: संगम स्नान विवाद में कूदे साधु-संत… शंकराचार्य की जंग में देवकीनंदन-अनिरुद्धाचार्य-रामदेव के बयान आए सामने

Bharat Express Desk

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