उत्तर प्रदेश

‘वहां किसी अधिकारी की जरूरत नहीं…’ राम मंदिर के नए विवाद पर संतों ने खोला मोर्चा, जानिए क्या है पूरा मामला?

CEO Recruitment Controversy: अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति का विज्ञापन जारी होने के बाद संत समाज में भारी आक्रोश है. लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में जुटे प्रमुख साधु-संतों ने मंदिर में किसी अधिकारी की जगह ‘प्रधान राम सेवक’ रखने की पुरजोर वकालत की है.

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी और उसके बाद CEO की नियुक्ति के विज्ञापन को लेकर संत समाज बेहद नाराज है. कार्यक्रम के मंच पर जुटे प्रमुख संतों (महंत धर्मदास, राजू दास, करपात्री जी महाराज आदि) ने वर्तमान ट्रस्ट को भंग करने की मांग की है. संतों का कहना है कि मंदिर को किसी अधिकारी की नहीं बल्कि ‘प्रधान राम सेवक’ की जरूरत है और यह व्यवस्था अखाड़ों को सौंप देनी चाहिए ताकि मंदिर व्यापार का केंद्र न बने.

CEO पद की नियुक्ति का पुरजोर विरोध

राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी की घटना के बाद प्रशासन द्वारा जारी किए गए CEO भर्ती के विज्ञापन का साधु-संतों ने कड़ा विरोध किया है. संतों का स्पष्ट कहना है कि रामलला के दरबार को किसी सरकारी या कॉर्पोरेट अधिकारी की नहीं, बल्कि सेवा भाव से भरे ‘दास’ की जरूरत है. जगतगुरु सतीशाचार्य महाराज ने कहा कि हमारा जीवन और परंपरा दासत्व से चलती है, इसलिए रामानंदी संप्रदाय का कोई शिक्षित और विद्वान संत ही यहां की व्यवस्था संभाले. वहीं, महंत धर्मदास ने कहा कि जहां स्वयं भगवान राम विराजमान हों, वहां किसी मुख्य प्रशासनिक अधिकारी की कोई आवश्यकता नहीं है.

ट्रस्ट पर साधा निशाना और मुख्यमंत्री योगी पर भरोसा (theft of temple offerings)

चर्चा के दौरान महंत धर्मदास ने राम जन्मभूमि ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि विवादित जमीनें खरीदकर मंदिर परिसर को एक ‘बिजनेस पॉइंट’ में बदल दिया गया है. उन्होंने इसके लिए चंपत राय को जिम्मेदार ठहराया. हालांकि, संतों ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए कहा कि उनके रहते कोई अन्याय नहीं होगा और उन्हीं की सख्ती के कारण चोर पकड़े जा रहे हैं. स्वामी करपात्री जी महाराज ने तो वर्तमान ट्रस्ट को तुरंत भंग करने की मांग कर दी और कहा कि चंदा चोरों के खिलाफ उनका संघर्ष मरते दम तक जारी रहेगा.

अखाड़ों को व्यवस्था सौंपने की मांग (Ram Janmabhoomi Trust)

हनुमानगढ़ी के महंत राजू दास ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि भगवान राम पर किसी दल या संगठन का कॉपीराइट नहीं है. उन्होंने कहा कि मंदिर में ‘कालनेमी’ रूप धरकर महापाप (चोरी) करने वालों को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए. राजू दास के अनुसार, अगर मंदिर की व्यवस्था अखाड़ों के हाथ में होती, तो ऐसी वित्तीय गड़बड़ियां कभी नहीं होतीं, क्योंकि संतों के लिए ठाकुर जी की सेवा कोई व्यवसाय नहीं है. इसके साथ ही उन्होंने नृपेंद्र मिश्रा के इस्तीफे की भी मांग की.

ट्रस्ट में संतों की सीमित भूमिका (Ayodhya Ram Mandir)

श्रीराम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य और निर्वाणी अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास जी महाराज ने ट्रस्ट में संतों की स्थिति को स्पष्ट किया. उन्होंने कहा कि कोर्ट के आदेश पर उन्हें केवल एक सदस्य बनाया गया है, कोई अहम पद नहीं दिया गया है. वे केवल तीन महीने में होने वाली बैठकों में हाजिरी लगाने जाते हैं. उन्होंने दृढ़ता से कहा कि रामलला के दरबार में चोरी करने वालों को भगवान खुद सजा देंगे.

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-बारत एक्सप्रेस 

Shubhra Rai

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