उत्तर प्रदेश

अपने बयानों में गोलमोल घूम रहे हैं शंकराचार्य, राम मंदिर विवाद में चंपत राय पर पलट गया नैरेटिव

उत्तर प्रदेश की सियासी जमीन पर इन दिनों धर्म, राजनीति और आरोपों का एक ऐसा घालमेल देखने को मिल रहा है. अयोध्या राम मंदिर में सामने आए कथित चंदा और चढ़ावा चोरी के हाई-प्रोफाइल मामले पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती लगातार फ्रंटफुट पर आकर बैटिंग कर रहे हैं. वे एक के बाद एक जनसभाओं और दौरों में ट्रस्ट से लेकर देश की शीर्ष हुकूमत पर तीखे बाण चला रहे हैं. लेकिन, राजनीति के चश्मे से देखने वाले विश्लेषकों ने अब एक बेहद दिलचस्प पहलू ढूंढ निकाला है. क्योंकि, सीतापुर और गोंडा में दिए उनके दो बयान एकदम अलग और गोलमोल हैं?

शंकराचार्य के हालिया दौरों पहले सीतापुर और फिर गोंडा में चंपत राय पर दिए बयानों की कड़ियों को जोड़कर देखा जाए तो विरोधाभास सामने आता है. एक ही हफ्ते के भीतर दिए गए दो अलग-अलग बयानों में नैरेटिव पूरी तरह बदल गया है. इसी को लेकर अब गलियारों में चर्चा तेज हो गई है कि अपने ही बयानों में शंकराचार्य गोलमोल घूम रहे हैं.

सीतापुर में चंपत राय पर दी पहले थ्योरी

कुछ ही दिन पहले शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सीतापुर में समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक अनूप गुप्ता के आवास पर पहुंचे थे. यहां उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय पर वित्तीय अनियमितताओं के साथ-साथ एक गहरी राजनीतिक साजिश का आरोप लगाया था. यहां शंकराचार्य ने चंपत राय को विलेन और पीएम मोदी को पीड़ित बताया था. जिसमें चंपत राय विपक्ष के साथ मिलकर पीएम को फंसा रहे थे. उन्होने कहा था कि-

‘चंपत राय खुद चोरी करके देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फंसाना चाह रहे हैं, यह बात अब पूरी तरह से जगजाहिर हो चुकी है. सोशल मीडिया और सियासी गलियारों में सपा नेता टीनू यादव और अखिलेश यादव के बीच जो व्हाट्सएप चैट वायरल हो रही है, वह इशारा करती है कि टीनू यादव असल में चंपत राय का ही मुख्य आदमी है. ऐसे में यह सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न है कि चंपत राय वास्तव में प्रधानमंत्री के आदमी हैं या फिर गुपचुप तरीके से अखिलेश यादव के एजेंडे पर काम कर रहे हैं?’

गोंडा पहुंचते ही हो गया यू-टर्न

जैसे ही शंकराचार्य अपनी गौ-रक्षा यात्रा के अगले पड़ाव यानी गोंडा पहुंचे, वहां उनका राजनीतिक कनेक्शन और बयान एकदम विपरीत दिशा में घूम गया. जो चंपत राय सीतापुर में ‘पीएम को फंसाने की साजिश’ रच रहे थे, गोंडा में वह अचानक ‘पीएम के सबसे खास और उपयोगी आदमी’ बन गए. गोंडा में शंकराचार्य ने सीधा रुख बदलते हुए कहा-

‘राम मंदिर चोरी मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद चंपत राय को बचा रहे हैं. जनता में यह झूठ फैलाया गया है कि चंपत राय ने इस्तीफा दे दिया है और वह स्वीकार हो गया है. सच यह है कि चंपत राय ने कोई इस्तीफा नहीं दिया है, यह केवल एक माहौल बनाया जा रहा है. वह आज भी वहां बैठा हुआ है और काम कर रहा है. अगर इस्तीफा हुआ तो उसे सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? चंपत राय को बचाया इसलिए जा रहा है क्योंकि वह उनका खास आदमी है. जिन्होंने उनको वहां बैठाया था, उनके लिए चंपत राय बहुत उपयोगी हैं ताकि वह उनका लाभ लेते रहें.’

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धार्मिक मंच से 2027 की राजनीतिक बिसात?

राम मंदिर का यह चंदा चोरी मामला अब केवल किसी वित्तीय हेराफेरी की आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरी तरह से एक भयंकर धार्मिक-राजनीतिक युद्ध में तब्दील हो चुका है. एक तरफ जहां शंकराचार्य ट्रस्ट को भंग करने की मांग पर अड़े हैं, वहीं उनके बयानों में आ रहा यह ‘यू-टर्न’ और विरोधाभास कि चंपत राय पीएम को फंसा रहे हैं या पीएम चंपत राय को बचा रहे हैं. यह दर्शाता है कि परदे के पीछे की राजनीतिक पटकथा बहुत जटिल है. अब देखना होगा कि जांच एजेंसियों की फाइनल रिपोर्ट के बाद सरकार और ट्रस्ट इस बयानों के भंवरजाल का क्या आधिकारिक जवाब देते हैं.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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