Uttar Pradesh BJP Caste Politics: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भाजपा के ब्राह्मण विधायकों का ‘सहभोज’ (डिनर डिप्लोमेसी) पार्टी संगठन को रास नहीं आया है. विधायक पंचानंद पाठक के घर हुई इस बैठक को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने सख्त रुख अपनाया है. उन्होंने विधायकों की क्लास लगाते हुए चेतावनी दी है कि पार्टी के अंदर किसी भी तरह की ‘वर्ग विशेष’ की राजनीति बर्दाश्त नहीं की जाएगी. हालांकि, सवाल यह उठाता है कि जब प्रदेश में अन्य समाज की बैठकों का होना आम है तो सियासी दल इस बैठक पर क्यों इतना एक्टिव हो गए हैं.
कुशीनगर से विधायक पंचानंद पाठक के लखनऊ स्थित आवास पर ‘सहभोज’ के नाम पर यह बैठक बुलाई गई थी. सूत्रों के मुताबिक, इसमें पूर्वांचल और बुंदेलखंड के करीब 45 से 50 ब्राह्मण विधायक और एमएलसी शामिल हुए. हैरानी की बात यह रही कि इस भोज में भाजपा के अलावा दूसरे दलों के ब्राह्मण विधायक भी पहुंचे थे.
अंदरखाने खबर है कि इस बैठक में ब्राह्मण समाज की अनदेखी का मुद्दा छाया रहा. विधायकों ने निम्नलिखित बिंदुओं पर मंथन किया. इसमें बात हुई कि ब्राह्मणों की मौत या मुसीबत पर मदद के लिए एक फंड बनाया जाएगा. संख्या के आधार पर राजनीतिक हिस्सेदारी की मांग बुलंद करना. ब्राह्मण समाज का एक बड़ा और सर्वमान्य चेहरा बनाने पर विचार. समाज के प्रभावशाली लोगों (जज, डॉक्टर, नौकरशाह) को इस मुहिम से जोड़ना.
ये भी पढ़ें: मैनपुरी की मैना: ट्रक पर गया पति..’फोनो लवर’ के साथ भागी संगीता, 10 साल पहले की ‘लव मैरिज’ से हैं 5 बच्चे
इस बैठक को उत्तर प्रदेश में एक तरह का शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है. इससे पहले 11 अगस्त को राजपूत विधायकों ने ‘कुटुंब सम्मेलन’ किया था, जिसमें 40 विधायक जुटे थे. अब ब्राह्मण विधायकों की लामबंदी ने पार्टी की चिंता बढ़ा दी है. क्योंकि-
आंकड़े बताते हैं कि ब्राह्मण भाजपा का कोर वोटर रहा है (2019 में 84%, 2022 में 89% और 2024 में 79% वोट भाजपा को मिले). मौजूदा समय में यूपी विधानसभा में कुल 52 ब्राह्मण विधायक हैं, जिनमें से 46 भाजपा के हैं. ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में विधायकों का अलग गुट बनाना पार्टी के लिए खतरे की घंटी है.
ये भी पढ़ें: तोपों के सामने चाय की केतली! पाकिस्तान कांपा पर श्रवण नहीं; पढ़ें ऑपरेशन सिंदूर के ‘नन्हे सरदार’ की कहानी
खैर, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष पंकज चौधरी ने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर दोबारा इस तरह की जातिगत बैठक या गोलबंदी हुई, तो इसे अनुशासनहीनता माना जाएगा और सख्त कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने साफ कहा कि ऐसे आयोजन पार्टी के संविधान और आदर्शों के अनुकूल नहीं हैं. भाजपा सर्वसमाज की पार्टी है, हम किसी वर्ग विशेष की राजनीति में भरोसा नहीं करते. जनप्रतिनिधियों को नेगेटिव नैरेटिव का शिकार होने से बचना चाहिए.
Annual Toll Pass: केंद्र सरकार ने नेशनल हाईवे टोल प्लाजा के 20 किलोमीटर के दायरे…
'जाणता राजा' महानाटक के छठे दिन अनुराग ठाकुर, मनोज तिवारी और सुरेश राणा पहुंचे. अनुराग…
1 नवंबर की महारैली टालो वरना होगा आंदोलन. CTI और भारतीय उद्योग व्यापार मंडल की…
दिल्ली पुलिस के ऑपरेशन चक्र-2 में बड़ी सफलता मिली है. 72 घंटे के भीतर 185…
गुजरात के नमक के मैदानों में 'सोलर महिलाएं' डीजल पंपों का विकल्प बनकर उभर रही…
15 घंटे का AI लर्निंग मॉड्यूल सरकारी स्कूल के छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग…