उत्तर प्रदेश का बजट 8 लाख करोड़ से अधिक होगा. प्रति व्यक्ति आय को बढ़ाने के साथ ही प्रदेश को अग्रणी बनाने के लिए बजट पेश किया गया है. बजट को पेश करने से पहले सुरेश खन्ना ने योगी की तारीफ करते हुए कहा कि प्रदेश के लोगों का कल्याण ही उनकी प्राथमिकता है. बजट से पहले कैबिनेट की बैठक में उसको हरी झंडी भी दिखाई गई.
● नीति आयोग, भारत सरकार द्वारा वित्तीय वर्ष 2014-2015 से 2022-2023 तक की अवधि के लिये राज्यों की राजकोषीय स्थिति के संबंध में रिपोर्ट प्रकाशित की गयी है, जिसमें उत्तर प्रदेश को अग्रणी (फंट रनर) राज्य की श्रेणी में रखा गया है.
● समेकित “फिस्कल हेल्थ इन्डेक्स” जो वर्ष 2014 से 2019 की अवधि में 37.0 था, 2022-2023 में बढ़कर 45.9 हो गया है.
● रिपोर्ट के अनुसार व्यय की गुणवत्ता में व्यापक सुधार हुआ है. वर्ष 2018 से 2023 की अवधि में पूँजीगत व्यय, कुल व्यय के 14.8 प्रतिशत से 19.3 प्रतिशत के मध्य रहा.
● इस अवधि में यह अनुपात देश के प्रमुख राज्यों के औसत अनुपात से अधिक रहा.
● सामाजिक क्षेत्र में पूँजीगत व्यय में 27 प्रतिशत तथा राजस्व व्यय में 9 प्रतिशत वार्षिक दर से वृद्धि हुई. इसी प्रकार, आर्थिक सेवाओं के अन्तर्गत भी पूँजीगत व्यय में पर्याप्त वृद्धि परिलक्षित हुई.
● वित्तीय वर्ष 2018-2019 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण पर व्यथ कुल व्यय का 4.9 प्रतिशत था जो वर्ष 2022-2023 में बढ़कर 6.5 प्रतिशत हो गया, जो देश के प्रमुख राज्यों में सर्वाधिक था.
● प्रदेश का राजकोषीय घाटा निर्धारित सीमा के अधीन रहा है.
● राजस्व बचत तथा प्राथमिक बचत के कारण सकल राज्य घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में ऋणग्रस्तता में कमी दर्ज की गयी.
● भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा राज्यों के बजट के संबंध में वित्तीय वर्ष 2024-2025 में प्रकाशित अध्ययन रिपोर्ट के कुछ मुख्य बिन्दु में इस सम्मानित सदन के समक्ष प्रस्तुत करना चाहूँगा.
● देश के सभी राज्यों की स्वयं के कर की प्राप्तियों में उत्तर प्रदेश का अंश वर्ष 2022-2023, 2023-2024 एवं 2024-2025 में क्रमशः 9.9 प्रतिशत, 10.5 प्रतिशत एवं 11.6 प्रतिशत रहा जो महाराष्ट्र के उपरान्त देश में सर्वाधिक है.
● उक्त वर्षों में सभी राज्यों में राजस्व प्राप्तियों के सापेक्ष ब्याज पर व्यय क्रमशः 12.6, 12.3 एवं 12.1 प्रतिशत रहा जबकि उत्तर प्रदेश में यह प्रतिशत 10.3, 9.4 एवं 8.9 रहा.
● सकल राज्य घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में सभी राज्यों की स्वयं के कर से प्राप्ति का औसत उक्त वर्षों में क्रमशः 6.5, 7.0 तथा 7.2 प्रतिशत रहा, जब कि उत्तर प्रदेश में यह अनुपात क्रमशः 7.6, 9.8 तथा 10 प्रतिशत रहा.
● इस अवधि में सकल राज्य घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में सभी राज्यों का व्यय क्रमशः 10.9, 11.9 एवं 12 प्रतिशत रहा, जबकि उत्तर प्रदेश में यह औसत क्रमशः 13.8, 16 एवं 16.7 प्रतिशत रहा.
● समस्त राज्यों द्वारा कुल व्यय के प्रतिशत के रूप में चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण पर किये गये व्यय के औसत की तुलना में, वित्तीय वर्ष 2018-2019 तथा 2021-2022 के अलावा वर्ष 2017-2018 से 2024-2025 तक उत्तर प्रदेश द्वारा किया गया व्यय लगातार अधिक रहा.
● वर्ष 2017-2018 में सभी राज्यों के औसत अनुपात 5.0 प्रतिशत के सापेक्ष उत्तर प्रदेश का अनुपात 5.3 तथा 2024-2025 में 5.6 प्रतिशत के सापेक्ष 5.9 प्रतिशत रहा है.
● प्रदेश की ऋणग्रस्तता जो वर्ष 2016-2017 की समाप्ति पर जी.एस.डी. पी. का 36.7 प्रतिशत थी घट कर वर्ष 2022-2023 के वास्तविक आँकड़ों में 30.4 प्रतिशत हो गयी है.
● उपरोक्त सभी आंकड़े जो भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा देश के सभी राज्यों के बजट का अध्ययन कर प्रकाशित किये गये हैं, से स्पष्ट है कि….
● उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा न केवल अपने आंतरिक संसाधनों की अभिवृद्धि पर जोर दिया गया है, अपितु विकास व्यय एवं स्वास्थ्य सेवाओं पर व्यय बढ़ाया गया है और ऋणग्रस्तता में कमी लायी गई है.
● यह हमारी सरकार के कुशल वित्तीय प्रबन्धन का परिचायक है.
लखनऊ. वित्त मंत्री ने कहा कि जब वर्ष 2017 में हमने कार्यभार सम्भाला था उस समय प्रदेश में औद्योगिक विकास पूरी तरह से रूका पड़ा था. उद्योग प्रदेश से विस्थापित हो रहे थे. उस समय कोई यह कल्पना भी नहीं कर सकता था कि प्रदेश में उद्योग-धन्धे आयेंगे भी, परन्तु दृढ़ संकल्प, आत्मविश्वास और लक्ष्य प्राप्ति के अथक प्रयासों से कुछ भी सम्भव है. शायराना अंदाज में उन्होंने बोला कि लोग कहते हैं बदलता है जमाना अक्सर खास वो हैं जो जमाने को बदल देते हैं.
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का सफलतम आयोजन किया गया जिसमें लगभग 36 लाख करोड़ के निवेश के एम.ओ.यू, पर हस्ताक्षर किया गया. उक्त समिट के एक वर्ष के अन्दर ही 6.50 लाख करोड़ से अधिक निवेश से या तो वाणिज्यिक उत्पादन प्रारम्भ हो गया है अथवा सम्बन्धित परियोजनायें निर्माणाधीन हैं. जो अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है. राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में चार नये एक्सप्रेस-वेज के निर्माण का निर्णय लिया गया है.
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे से गंगा एक्सप्रेस-वे कौसिया, जनपद हरदोई वाया फर्रुखाबाद तक प्रवेश नियंत्रित ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस-वे का निर्माण कराया जायेगा, जिसके लिये 900 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है. गंगा एक्सप्रेस-वे को प्रयागराज, मिर्जापुर, वाराणसी, चन्दौली होते हुये सोनभद्र से जोड़ने के लिये विन्ध्य एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिये 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है. मेरठ को हरिद्वार से जोड़ने हेतु गंगा एक्सप्रेस-वे विस्तारीकरण एक्सप्रेस-वे का निर्माण प्रस्तावित है जिसके लिये 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था कराई जा रही है.
बुन्देलखण्ड रीवा एक्सप्रेस-वे का निर्माण निर्माण प्रस्तावित है जिसके लिये 50 करोड़ रुपये की व्यवस्था कराई जा रही है. बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे के साथ डिफेंस इण्डस्ट्रियल कॉरीडोर परियोजना हेतु लगभग 461 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है. इसके अन्तर्गत लगभग साढ़े नौ हजार करोड़ रुपये का निवेश अनुमानित है. लखनऊ में आर्टिफिशियल इन्टेलीजेन्स सिटी के विकास हेतु 5 करोड़ रूपये की व्यवस्था प्रस्तावित है यही नहीं साईबर सुरक्षा में टेक्नोलॉजी ट्रान्सलेशन रिसर्च पार्क की स्थापना हेतु 3 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है.
वित्तमंत्री सुरेश खन्ना ने कहा कि सात-आठ साल पहले प्रदेश में चिकित्सा सुविधायें अत्यन्त जर्जर अवस्था में थीं. प्रत्येक वर्ष प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में संक्रमक रोगों से बड़े पैमाने पर मौतें हुआ करती थीं. प्रदेश में रोगों की पहचान, रोकथाम और इलाज की व्यवस्थायें जनमामान्य को उप्लब्ध नहीं थीं.
वित्त मंत्री ने कहा कि रात कितनी ही भले हो स्याह आखिर में उसे, मात खानी ही पड़ेगी रोशनी के हाथ से.
उन्होंनेकहाकि वर्तमान में प्रदेश में 80 मेडिकल कालेज है जिनमें 44 राज्य सरकार द्वारा संचालित हैं एवं 36 निजी क्षेत्र में है. प्रदेश में 02 एम्स एवं आई०एम०एस०, बी०एच०यू०, वाराणसी तथा जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज, अलीगढ़ संचालित हैं.
वित्त मंत्री ने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वन ट्रिलियन डॉलर तक का प्रदेश सरकार के लक्ष्य है. प्रदेश में नॉर्थ साउथ कॉरिडोर के विकास किया जा रहा . इसके लिये 200 करोड़ रुपये की बजट व्यवस्था प्रस्तावित है.
ऐसे होगी बेहतर Connectivity:
●प्रदेश में सेतुओं एवं रेल उपरिगामी/अधोगामी सेतुओं के निर्माण हेतु कुल 1450 करोड़ रूपये की बजट व्यवस्था प्रस्तावित है.
● राज्य राजमार्गों के चौड़ीकरण/सुदृढीकरण कार्यों हेतु 2900 करोड रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है.
● राज्य सड़क निधि से सड़कों के अनुरक्षण हेतु 3000 करोड़ रुपये तथा निर्माण हेतु 2800 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है.
● प्रदेश के ग्रामीण मार्गों एवं पुलियों के अनुरक्षण हेतु 2700 करोड़ रुपये की व्यवस्था का प्रस्ताव किया गया है.
● कृषि विपणन सुविधाओं हेतु ग्रामीण सेतुओं के निर्माण के लिये 1600 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है.
● शहर वासियों के आवागमन को सुगम बनाने के दृष्टिगत शहरों के बाईपास एवं रिंगरोड तथा चौराहों पर फ्लाईओवर आदि के निर्माण हेतु 1200 करोड़ रुपये की बजट व्यवस्था प्रस्तावित है.
● औद्योगिक / लॉजिस्टिक पार्क हेतु मार्गों के चौड़ीकरण/सुदृढीकरण/निर्माण कार्य हेतु 800 करोड़ रुपये की बजट व्यवस्था प्रस्तावित है.
● मुख्यमंत्री ग्राम योजनान्तर्गत ग्रामीण मार्गों के नवनिर्माण पुनर्निर्माण / मिसिंग लिंक के निर्माण हेतु नई योजना प्रारम्भ की जा रही है. इस योजना हेतु 200 करोड़ रुपये की बजट व्यवस्था प्रस्तावित है.
● सड़क सुरक्षा के दृष्टिगत दुर्घटना बाहुल्य क्षेत्रों के सुधार, रोड सेफ्टी कार्यों एवं सौन्दयीकरण हेतु 250 करोड़ रुपये की बजट व्यवस्था प्रस्तावित है.
वित्त मंत्री ने कहा कि प्रदेश में एयर सुविधा में जबरदस्त वृद्धि की जाएगी. उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 के पूर्व प्रदेश में केवल 4 एयरपोर्ट क्रियाशील थे जबकि वर्तमान में प्रदेश में 16 एयरपोर्ट क्रियाशील हैं. प्रदेश में 4 अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट क्रियाशील हैं. जेवर एयरपोर्ट के शीघ्र ही संचालित होने के साथ प्रदेश में 5 अन्तर्राष्ट्रीय एयरपोर्ट हो जायेंगे. वाराणसी, अलीगढ़ तथा श्रावस्ती एयरपोर्ट का विस्तार, गोरखपुर एयरपोर्ट पर नये टर्मिनल भवन का विकास, आगरा एयरपोर्ट पर नये सिविल एवं तत्संबंधी सुविधाओं का विकास तथा ललितपुर स्थित हवाई पट्टी को एयरपोर्ट के रूप में विकसित किये जाने का निर्णय लिया गया है. घरेलू उड़ानों के अतिरिक्त उत्तर प्रदेश सरकार अब अन्तर्राष्ट्रीय गंतव्यों तक उड़ाने संचालित करने की दिशा में कार्य कर रही है. उन्होंने कहा कि लोग यहाँ ख्वाब दिखाते हैं अक्सर हर एक ख्वाब को सच कर दिया है योगी ने.
अजमते जिन्दगी की कसम है हमें, जरें-जरें में महफिल सजा देंगे हम, तेरे दीवारो-दर जगमगा देंगे हम.
उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री ने कविता के माध्यम से ऊर्जा क्षेत्र में आए बदलाव को विधान सभा में रखा. उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 के पहले प्रदेश में बिजली आपूर्ति की व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई थी. न छात्रों को पढ़ाई के लिये बिजली मिलती थी, न ही किसानों को सिंचाई के लिये. अस्पतालों और औद्योगिक इकाईयों को बिजली नहीं मिलती थी.
आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है. वर्ष 2024-2025 में माह दिसम्बर तक औसत आपूर्ति ग्रामीण क्षेत्र में 20 घण्टे 35 मिनट, तहसील मुख्यालय में 22 घण्टे 36 मिनट तथा जनपद मुख्यालय में 24 घण्टे रही.
किसानों के लिए कृषि फीडरों के पृथक्कीकरण की योजना में 3,817 कृषि फीडर्स का निर्माण कराया जा चुका है. उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम द्वारा वर्ष 2024-2025 में दिसम्बर माह तक 7140 मेगावॉट ताप विद्युत उत्पादन क्षमता व संयुक्त उपक्रम में चलित 1980 मेगावॉट ताप विद्युत उत्पादन क्षमता एवं 37,056 मिलियन यूनिट ताप विद्युत उत्पादन प्राप्त किया गया.
उन्होंने कहा कि गैर पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देने हेत पम्प स्टोरेज जल विद्युत परियोजना की स्थापना 3953 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित है. यह परियोजना चार वर्षों में पूर्ण होगी. परियोजना हेतु 50 करोड़ रुपये खर्च किया जाएगा. यहीं नहीं कोल इण्डिया लिमिटेड के साथ उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड द्वारा संयुक्त उपक्रम के रूप में जनपद जालौन में 500 मेगावॉट की सौर ऊर्जा परियोजना बनेगी. तहसील गरौठा जनपद झाँसी में 200 मेगावॉट सौर ऊर्जा संयंत्र की स्थापना होगी.
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने धार्मिक स्थलों के विकास के लिए योजना ka ऐलान किया तो जमकर जय श्री राम के नारे लगे. उन्होंने कहा कि श्री बांके बिहारी जी महाराज मन्दिर मथुरा-वृन्दावन कारीडोर के निर्माण हेतु भूमि क्रय के लिये 100 करोड़ रुपये तथा निर्माण हेतु 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे. जनपद मिर्जापुर के त्रिकोणीय क्षेत्र में माँ विन्ध्यवासिनी मन्दिर, माँ अष्टभुजा मन्दिर, माँ काली खोह मन्दिर के परिक्रमा पथ एवं जन सुविधा स्थलों को विकसित किये जाने हेतु भूमि क्रय हेतु 100 करोड़ रुपये तथा वृहद निर्माण हेतु 100 करोड़ रुपये खर्च होगा. मन्दिरों के जीर्णोद्वार/पुनर्निर्माण हेतु 30 करोड़ का बजट प्रावधान प्रस्तावित है. जनपद सीतापुर के नैमिषारण्य में वेद विज्ञान केन्द्र की स्थापना हेतु 100 करोड़ रुपये की धनराशि प्रस्तावित है.
वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने अपने बजट संबोधन में प्रदेश की कानून व्यवस्था को सुधार को पहली प्राथमिकता बताया. उन्होंने कहा कि जब हमारी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में कार्यभार सम्भाला था उस समय प्रदेश किस प्रकार की विषम कानून व्यवस्था और गुण्डाराज की गिरफ्त में था यह सभी को मालूम है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व एवं मार्ग निर्देशन में हमारी सरकार द्वारा प्रदेश में अपराध के प्रति जीरो टॉलरेन्स की नीति अपनाते हुये गुण्डों, माफियाओं और हर अपराध पेशा लोगों के विरूद्ध अभियान चला कर कार्यवाही की गयी.
उन्होंने कहा कि “कश्ती चलाने वालों ने जब हार के दी पतवार हमें. लहर-लहर तूफान मिले और संग-संग मझधार हमें. फिर भी दिखलाया है हमने और आगे दिखा भी देंगे. इन हालातों में आता है दरिया करना पार हमें…”
उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से दिसम्बर 2024 तक प्रदेश के चिन्हित 68 माफिया अपराधियों के विचाराधीन अभियोगों में प्रभावी पैरवी कर 73 अभियोगों में 31 माफिया अपराधियों को आजीवन कारावास/कारावास व अर्थदण्ड की सजा से दण्डित कराया गया है, जिसमें 02 को फांसी की सजा हुई. मार्च, 2017 से 23 जनवरी, 2025 तक प्रदेश के विभिन्न जनपदों के दुर्दान्त अपराधियों के विरूद्ध कार्यवाही के दौरान कुल 221 अपराधी मुठभेड़ में मारे गये एवं 8022 घायल हुए.
-भारत एक्सप्रेस
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