GeetaVardhan App: बेंगलुरु के एक होमस्कूल बच्चे ने वह कर दिखाया है, जिसे सुनकर बड़े-बड़े विद्वान और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ भी दांतों तले उंगली दबा लें.महज 9 वर्षीय वृषवर्धन शर्मा ने न सिर्फ पूरी भगवद्गीता और पाणिनि की अष्टाध्यायी कंठस्थ की है, बल्कि बिना इंटरनेट के चलने वाला ‘गीतावर्धन’ ऐप और वॉयस-एक्टिवेटेड ऑफलाइन गीता रीडर डिवाइस भी तैयार कर डाला है.
वृषवर्धन की मां का परिवार पटना और पिता का परिवार जयपुर से जुड़ा है.वे बेंगलुरु में रहते हैं और होमस्कूलिंग के जरिए पढ़ाई करते हैं.पांच साल की उम्र में उन्होंने स्व-अध्ययन से भगवद्गीता के सभी 700 श्लोक याद कर लिए थे.आठ साल की उम्र तक महर्षि पाणिनि की लगभग 4,000 सूत्रों वाली अष्टाध्यायी और अमरकोश भी जुबानी याद हो गए.उन्होंने 11 भारतीय लिपियों में हाथ से पूरी गीता भी लिखी है.13 भारतीय भाषाओं के जानकार इस बाल प्रतिभा ने पायथन जैसी प्रोग्रामिंग भाषाएं खुद सीखीं.
वृषवर्धन का सबसे उल्लेखनीय योगदान ‘गीतावर्धन’ ऐप है.यह मुफ्त ऐप पूरी भगवद्गीता को 13 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराता है.हर श्लोक का ऑडियो पाठ उनकी अपनी आवाज में है.ऐप में आदि शंकराचार्य और रामानुजाचार्य की टीकाएं भी शामिल हैं.सबसे खास बात यह है कि इंस्टॉल करने के बाद यह पूरी तरह ऑफलाइन काम करता है.कोई विज्ञापन नहीं, कोई सब्सक्रिप्शन नहीं और कोई पर्सनल डेटा ट्रैकिंग नहीं.ऐप आईओएस और एंड्रॉइड दोनों पर उपलब्ध है.
इतना ही नहीं, उन्होंने पॉकेट साइज के वॉयस-एक्टिवेटेड ऑफलाइन गीता रीडर डिवाइस भी बनाए हैं.इनमें ई-इंक स्क्रीन और टचस्क्रीन वाले वर्जन शामिल हैं, जो बिना किसी नेटवर्क के काम करते हैं.
बेंगलुरु आने वाले नए लोगों के लिए उन्होंने ‘कन्नड़ वर्धन’ टूल भी विकसित किया है, जो बोलचाल की कन्नड़ सिखाता है.इसमें शब्दावली कार्ड और रोल-प्ले सीनैरियो शामिल हैं.
मार्च 2026 में कांचीपुरम में आयोजित 63वें अखिल भारतीय शास्त्रोत्सव में उन्होंने अष्टाध्यायी कंठपाठ श्रेणी में पहला स्थान हासिल किया.इस प्रतियोगिता में उनके सामने 18 से 25 वर्ष के विश्वविद्यालय स्तर के प्रतिभागी थे.यह लगातार तीसरा साल था जब उन्होंने राष्ट्रीय मंच पर पदक जीता.इससे पहले अयोध्या और हरिद्वार में रजत पदक मिल चुके थे.
हाल ही में आर्ट ऑफ लिविंग, बेंगलुरु में आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर के साथ उनके प्रदर्शन का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ.गुरुदेव ने उन्हें ‘भारत की शा’ कहा. वृषवर्धन शर्मा प्राचीन संस्कृत शास्त्रों और आधुनिक तकनीक के बीच पुल बनाने वाले अनोखे उदाहरण हैं.उनकी उपलब्धि न सिर्फ बच्चों बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है कि ज्ञान और नवाचार की कोई उम्र नहीं होती.
-भारत एक्सप्रेस
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