दुनिया

AI की एक गलती और छिड़ जाता तीसरा विश्वयुद्ध, आमने-सामने आ गए थे चीन और अमेरिका, कैसे बची दुनिया?

आजकल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI ने इंसान के हर काम को बेहद आसान बना दिया है. मोबाइल खोलिए, वॉयस कमांड दीजिए या प्रॉम्प्ट टाइप कीजिए, जो काम घंटों में होता था, वो सेकंडों में हो जाता है. लेकिन क्या आप सोच सकते हैं कि यही AI पूरी दुनिया को विनाश की कगार पर धकेल सकता था? हाल ही में आई एक रिपोर्ट ने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों और सरकारों के होश उड़ा दिए हैं.

एक AI चैटबॉट की सिर्फ एक गलत जानकारी की वजह से दुनिया की दो सबसे बड़ी न्यूक्लियर महाशक्तियां यानी अमेरिका और चीन लगभग सीधे युद्ध के मुहाने पर आकर खड़े हो गए है. अगर आखिरी वक्त पर गलती न पकड़ी जाती, तो शायद तीसरा विश्व युद्ध शुरू हो चुका होता.

क्या है पूरा मामला?

अमेरिका और ईरान के बीच पहले से ही तनाव और सैन्य संघर्ष की स्थिति बनी हुई है. ऐसे माहौल में इंटेलिजेंस रिपोर्ट किसी भी देश के लिए सबसे अहम होती है, जो यह तय करती है कि दुश्मन देशों की गतिविधियों पर कैसे नजर रखी जाए. इसी दौरान अमेरिकी खुफिया एजेंसी के एक AI चैटबॉट ने इनपुट दिया कि ईरान की तरफ बढ़ रहे एक चीनी जहाज में परमाणु कार्यक्रम से जुड़े बेहद संवेदनशील पार्ट्स ले जाए जा रहे हैं.

खबर सामने आते ही अमेरिकी प्रशासन और पेंटागन में हड़कंप मच गया. अमेरिकी अधिकारियों को लगा कि अगर ये परमाणु उपकरण ईरान तक पहुंच गए, तो मध्य पूर्व में बहुत बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए यूएस सेंट्रल कमांड और अमेरिकी सेना को तुरंत एक्शन मोड में लाया गया.

आसमान में मंडराने लगे फाइटर जेट्स

CNN की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी नौसेना और वायुसेना ने उस चीनी जहाज को बीच समुद्र में घेरने और उस पर मिलिट्री ऑपरेशन लॉन्च करने का पूरा प्लान तैयार कर लिया था. स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी थी कि अमेरिकी फाइटर जेट्स आसमान में उड़ान भरने लगे थे और स्पेशल कमांडोज उस जहाज पर धावा बोलने के लिए तैयार बैठे थे.

बता दें, अगर उस वक्त अमेरिकी सेना उस चीनी जहाज पर हमला कर देती, तो चीनी नागरिक मारे जाते या घायल होते. चीन इसे अपनी संप्रभुता पर सीधा हमला मानता और तुरंत करारा सैन्य पलटवार करता, जो तीसरा विश्व युद्ध भी बन सकता था.

कैसे चला विनाश?

जब अमेरिकी सेना हमले के एकदम करीब पहुंच चुकी थी, तभी खुफिया विभाग के एक वरिष्ठ विश्लेषक ने दिए गए डेटा को एक बार फिर री-चेक करने का फैसला किया.

आंकड़ों और इनपुट्स का दोबारा गहराई से विश्लेषण करने पर पता चला कि उस चीनी जहाज में कोई न्यूक्लियर कंपोनेंट था ही नहीं! असल में AI चैटबॉट ने गलत प्रॉम्ट्स और डेटा का गलत विश्लेषण करके एक सामान्य कमर्शियल मालवाहक सामान को न्यूक्लियर पार्ट्स बता दिया था.

AI चैटबॉट पर उठे गंभीर सवाल

इस सनसनीखेज खुलासे के बाद अब अमेरिकी सेना और रक्षा मंत्रालय में खलबली मची हुई है. सवाल उठ रहे हैं कि खुफिया विभाग में इस्तेमाल हो रहा यह AI चैटबॉट आखिर आया कहां से और इसकी सटीकता की क्या गारंटी थी? हाल ही में अमेरिकी रक्षा अधिकारियों ने कहा था कि सेना और खुफिया तंत्र में AI के इस्तेमाल को तेजी से बढ़ाया जा रहा है, लेकिन इस घटना ने उस पूरी रणनीति पर सवालिया निशान लगा दिया है.

एंथ्रोपिक की रिपोर्ट के अनुसार, यमन के हूती विद्रोही भी सटीक हमले करने के लिए AI क्लाउड का इस्तेमाल कर रहे हैं. सैन्य मामलों के जानकारों का स्पष्ट कहना है कि युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मामलों में इंसानी समझ को दरकिनार कर AI पर आंख मूंदकर भरोसा करना बेहद खतरनाक हो सकता है. फिलहाल अमेरिकी एजेंसियां इस बात की जांच में जुटी हैं कि AI से इतनी बड़ी चूक कैसे हुई.

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-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

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