AI Use In Iran US Conflict: इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमले में ईरान में तबाही मची हुई है. कुछ दिनों पहले इजरायल की कुछ मिसाइलें लड़कियों के एक स्कूल पर गिर गईं, जिसमें सैकड़ों लड़कियां मारी गईं. यह स्कूल दक्षिणी ईरान के मीनाब शहर में मौजूद था.
शरजेह तय्येबह बालिका प्राथमिक विद्यालय पर मिसाइल गिरने से 165 स्कूली छात्राएं, जिनकी उम्र 7 से 12 साल के बीच थी मारी गईं. यह घटना ईरान-इजरायल संघर्ष के सबसे घातक घटनाओं में से एक है. जिसकी दुनिया भर में निंदा की गई. ईरान ने इन हमलों के लिए अमेरिका को जम्मेदार ठहराया है.
हालांकि अमेरिका ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है. उसने इसे ईरान पर थोप दिया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा कि इन 165 छात्राओं की मौत के पीछे ईरान जिम्मेदार है. यह ईरान का ही काम है, क्योंकि उनके गोला-बारूद में बहुत गलतिया हैं. उन्होंने कहा कि, अमेरिका का कभी भी ईरान के नागरिकों को निशाना बनाने का इरादा नहीं था.
इसी बीच ईरान के शरजेह तय्येबह बालिका प्राथमिक विद्यालय पर हुए हमले में एआई की गलतियों को जिम्मेदार ठहराने पर चर्चा हो रही है. विश्लेषकों का मानना है कि इस स्कूल पर हुए हमले के पीछे अमेरिका ही था. वो अपने सैन्य अभियानों में एंथ्रोपिक के जेनरेटिव AI को सैन्य अभियानों में इस्तेमाल कर रहा है. हालांकि इस निष्कर्ष पर पहुंचना अभी मुश्किल है.
अमेरिका ने AI के इस्तेमाल से सिर्फ 12 घंटों के अंदर ईरान पर 900 से ज्यादा हमले कि. जिसमें स्कूल पर हुआ हमला भी शामिल था. दरअसल ईरान के शीर्ष नेतृत्व को खत्म करने के लिए अमेरिका ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी लॉन्च किया था. इसी दौरान ये घटना घटी.
इस घटना की पुष्टि CNN ने भी की है. इस अमेरिकी न्यज चैनल ने सैटेलाइट इमेज और जियोलोकेटेड वीडियो की जांच कर बताया कि मिनाब में मौजूद लड़कियों के स्कूल के पास इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स का नौसैनिक अड्डा था. अमेरिका उसे ही निशाना बनाना चाहता था.
वहीं जेम्स मार्टिन सेंटर ऑपर नॉनप्रोलिफरेशन स्टडीज के रिसर्चर्स ने स्कूल पर हुए हमले के गोला-बारूद को एनलाइज कर बताया कि, यह हमला अमेरिका के टॉमहॉक लैंड अटैक मिसाइल से मेल खाता है. जिसे अमेरिकी सेना इस्तेमाल करती है.
CNN ने बताया कि ईरान में मौजूद लड़कियों के इस स्कूल पर हमले के लिए अमेरिका जिम्मेदार है. इस जगह पर अमेरिका ने दो बार हमले किये. पहले और दूसरे हमले के बीच का अंतर 40 मिनट था.
ईरान के खिलाफ अमेरिकी हमले में AI के इस्तेमाल पर सवाल खड़े हो गए हैं. द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार एंथ्रोपिक का क्लाउड AI का शुरू से ही ईरान पर हमले में इस्तेमाल किया जा रहा था. इसकी मदद से अमेरिकी सेना इंटेलिजेंस का आकलन, टारगेट की पहचान और युद्ध के सिमुलेशन जैसे काम कर रही है.
इससे पहले इजरायल ने भी गाजा के खिलाफ संघर्ष में AI का इस्तेमाल किया था. जिसपर ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने ‘मशीन ने यह काम बिना किसी इंसानी भावना के साथ किया’ शीर्षक से एक लेख लिखा. जिसमें इंसानों के खिलाफ AI के इस्तेमाल की निंदा की गई थी.
-भारत एक्सप्रेस
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