Osman Hadi Death: बांग्लादेश इस वक्त इतिहास के सबसे अशांत दौर से गुजर रहा है. ढाका से लेकर सिंगापुर तक हलचल तेज है. कट्टरपंथी छात्र संगठन ‘इंकलाब मंच’ के नेता शरीफ उस्मान हादी की इलाज के दौरान मौत हो गई है. लेकिन इस मौत ने पूरे बांग्लादेश में एक ऐसी चिंगारी सुलगा दी है जो अब भारत की सीमाओं तक पहुंच रही है. उस्मान हादी, जिसने मरने से पहले भारत के टुकड़े करने वाला ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ का विवादित नक्शा दुनिया को दिखाया था उसकी मौत के बाद अब भारत विरोधी एजेंडा और तेज हो गया है. आखिर क्या है इस नक्शे का सच?
बांग्लादेश में साल 2024 के छात्र आंदोलन के प्रमुख नेता शरीफ उस्मान बिन हादी का 18 दिसंबर 2025 को सिंगापुर में इलाज के दौरान निधन हो गया. 32 वर्षीय हादी पर 12 दिसंबर को ढाका में उस समय जानलेवा हमला हुआ था, जब एक बाइक सवार ने उनके सिर में गोली मार दी थी. ढाका में प्राथमिक उपचार के बाद, उसे गंभीर स्थिति में 15 दिसंबर को सिंगापुर जनरल हॉस्पिटल ले जाया गया, लेकिन ‘ब्रेन स्टेम’ में गहरी चोट होने के कारण डॉक्टर उसे नहीं बचा सके.
हालांकि उसकी मौत इलाज के दौरान हुई, लेकिन उनके समर्थकों का मानना है कि यह एक गहरी साजिश थी. इस मौत की खबर जैसे ही बांग्लादेश पहुंची, सड़कों पर कोहराम मच गया. ‘प्रथम आलो’ जैसे मीडिया घरानों पर हमले हुए और भारतीय मिशन ठिकानों को निशाना बनाया जाने लगा.
उस्मान हादी की पहचान सिर्फ एक छात्र नेता की नहीं थी. वह उस विचारधारा का चेहरा था जो भारत की अखंडता को चुनौती देती है. उस्मान हादी ने एक ऐसा नक्शा पेश किया था जिसे वह ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ कहता था. इस नक्शे में भारत के पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, त्रिपुरा और मिजोरम जैसे राज्यों को बांग्लादेश का हिस्सा दिखाया गया था. उसका दावा था कि ये इलाके सांस्कृतिक और ऐतिहासिक रूप से बांग्लादेश के हैं. यह महज एक नक्शा नहीं, बल्कि भारत के ‘चिकन नेक’ कॉरिडोर को घेरने की एक खतरनाक सोच है.
उस्मान हादी की नफरत सिर्फ ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ तक ही सीमित नहीं थी. उसने जो विवादित नक्शा दुनिया के सामने रखा, उसमें भारत की संप्रभुता पर सीधा हमला किया गया था. इस नक्शे में उसने POK को पाकिस्तान का हिस्सा और सियाचिन व अक्साई चिन जैसे सामरिक क्षेत्रों को चीन के कब्जे में दिखाया था.
यानी उस्मान हादी का एजेंडा साफ था- भारत को चारों तरफ से कमजोर करना और दुश्मन देशों के दावों का समर्थन करना. यह नक्शा इस बात का सबूत है कि वह केवल बांग्लादेशी छात्र नेता नहीं था, बल्कि भारत के खिलाफ चल रहे एक बड़े इंटरनेशनल प्रोपेगेंडा का मोहरा बन चुका था.”
उस्मान हादी की मौत के बाद अब उसके समर्थक इस ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ के एजेंडे को उसकी ‘अंतिम इच्छा’ की तरह प्रचारित कर रहे हैं. भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में घुसपैठ और जनसांख्यिकीय बदलाव (Demographic change) की कोशिशें पहले भी चिंता का विषय रही हैं. लेकिन अब, कट्टरपंथियों का खुला समर्थन और सड़कों पर उतरना भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती है. चटगांव में भारतीय उप-उच्चायोग पर हुआ पथराव इसी बढ़ती नफरत का नतीजा है.
शरीफ उस्मान हादी अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन जो भारत-विरोधी भावनाएं उसने जगाई हैं, वो बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के लिए भी सिरदर्द बन चुकी हैं. क्या ‘ग्रेटर बांग्लादेश’ का यह विवादित नक्शा सिर्फ एक प्रोपेगेंडा है या इसके पीछे कोई बहुत बड़ी विदेशी साजिश? भारत अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए पूरी तरह मुस्तैद है, लेकिन पड़ोस में सुलगती यह आग शांत होने का नाम नहीं ले रही.
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-भारत एक्सप्रेस
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