सियासी उथल-पुथल के बीच एक्शन में अमेरिका
Donald Trump Action in Nepal: नेपाल Gen-Z आंदोलन के बाद इन दिनों बड़े सियासी और सुरक्षा संकट का सामना कर रहे हैं. पद से इस्तीफा देने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली गायब है. देश में सेना ने कर्फ्यू की अवधि बढ़ा दी है. हिंसक आंदोलन में कई लोगों की मौत हो गई. भीड़ ने मंत्रियों और पूर्व प्रधानमंत्रियों को भी निशाना बनाने से पीछे नहीं हटे. हिंसा कम हो गई है लेकिन तनाव बना हुआ है. Gen-Z अपना नेता नहीं चुन पा रहे हैं. इस बीच नेपाल के पड़ोसी और उससे संबंध रखने वाले कई देश अलर्ट पर हैं. इन्हें में अमेरिका भी शामिल है जो अब नेपाल के भीतर कदम उठाना शुरू कर दिया है.
आइये जानें आखिर अमेरिका नेपाल के भीतर क्या कर रहे हैं? काठमांडू से वायरल हो रहे यूएसए दूतावास के वायरल वीडियो पर चर्चा क्यों हो रही है? आखिर डोनाल्ड ट्रंप ऐसा किन-किन कारणों से कर रहे हैं?
नेपाल में आंदोलन और हिंसा के बीच काठमांडू से यूएसए दूतावास का एक वीडियो वायरल हो रहा है. इसमें दिखाई पड़ रहे हैं कि दूतावास की छत पर स्नाइपर यानी बंदूक धारी जवान तैनात किए गए हैं. यह लगातार बाहर के हालातों पर पैनी नजर बना कर रख रहे हैं. हालांकि, वीडियो में यह साफ नजर नहीं आ रहा है कि जवान आर्मी के हैं या किसी और सैन्य संस्था के हैं. दावा किया जा रहा है कि देश के हालात को देखते हुए दूतावास ने सुरक्षा बढ़ाई है. हालांकि, इस वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
नेपाल में हिंसा को बढ़ते देख कई देशों ने अपने-अपने दूतावास में सुरक्षा बढ़ा दी है. क्योंकि, भीड़ का चेहरा नहीं होता है. कोई भी उपद्रवी बढ़कर हमला कर सकता है. जिस तरह से वहां के नेताओं के घर फूंके गए हैं. अभी नेपाल में कोई सरकार भी नहीं है. इस कारण किसी घटना की नैतिक जिम्मेदारी लेने वाला भी कोई नहीं है. कर्फ्यू के कारण सेना पर भी सुरक्षा को लेकर अधिक दबाव है.
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नेपाल में हुए कांड को लेकर कई कई लोग वहां के स्थानीय मुद्दों, सरकार और युवाओं के आक्रोश के अलावा डीप स्टेट की साजिश मान रहे हैं. कई मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि चीन, भारत, रूस से बढ़ते तनाव के कारण अमेरिका ने नेपाल को अस्थिर करने का काम किया है. इस कारण भी नेपाल के एक वर्ग में अमेरिका के प्रति गुस्सा है. संभवत: ट्रंप सरकार ने इसी कारण दूतावास की सुरक्षा बढ़ा दी है. हालांकि, किभी देश का दूतावास उस देश की सरकार के जूरिस्डिक्शन में आता है न कि जहां वो स्थित है इसके. इस कारण हर सरकार अपने दूतावास के भीतर कुछ भी कर सकती है.
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