Donald Trump Demand for Pulitzer Prize: अमेरिका के राष्ट्रपति और अपनी बेबाक बयानबाजी के लिए मशहूर डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर ऐसा बयान दे दिया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. साउथ कैरोलिना में एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप का दर्द खुलकर सामने आया. दरअसल उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर वैश्विक शांति के लिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्का नहीं दिया गया, तो कम से कम उनके ‘लेखन’ के लिए उन्हें प्रतिष्ठित पुलित्जर पुरस्कार (Pulitzer Prize) तो मिलना ही चाहिए था. ट्रंप के इस अनोखे दावे के बाद अमेरिकी राजनीति से लेकर सोशल मीडिया तक पर बहस और मीम्स का दौर शुरू हो गया है.
साउथ कैरोलिना की जनसभा में अपने समर्थकों को संबोधित करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने अपने कार्यकाल की विदेश नीति और रूस के साथ एक अमेरिकी नागरिक की सुरक्षित रिहाई का जिक्र किया. इसी दौरान नोबेल कमेटी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने मुझे नोबेल पुरस्कार नहीं दिया. कोई बात नहीं, लेकिन मुझे मेरे लेखन के लिए पुलित्जर पुरस्कार तो मिलना ही चाहिए था.
ट्रंप के इस बयान पर रैली में मौजूद उनके प्रशंसकों ने जमकर तालियां बजाईं, हालांकि ट्रंप ने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह अपनी किस किताब, दस्तावेज या सोशल मीडिया पोस्ट के लिए इस बड़े साहित्यिक और पत्रकारिता पुरस्कार की मांग कर रहे हैं.
यह पहली बार नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप ने नोबेल पुरस्कार न मिलने पर अपनी सार्वजनिक नाराजगी जाहिर की हो. इस रैली में उन्होंने एक बार फिर नोबेल कमेटी पर पक्षपात का आरोप लगाया. ट्रंप का मानना है कि उनके कार्यकाल में दुनिया के कई बड़े और जटिल विवादों को सुलझाया गया और शांति स्थापित की गई, इसके बावजूद उन्हें हमेशा इस पुरस्कार से दूर रखा गया.
ट्रंप का यह भी दावा रहा है कि उन्होंने कई युद्धों को टालने में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन उन्हें कभी उनका हक नहीं मिला.
ट्रंप के इस ताज़ा दावे के बाद राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि आखिर वह किस लेखन की बात कर रहे हैं. ट्रंप की बिजनेस और लाइफस्टाइल पर आधारित मशहूर किताब ‘द आर्ट ऑफ द डील’ (The Art of the Deal) अपने समय में बेस्टसेलर्स की लिस्ट में शीर्ष पर रही थी.
इसके अलावा, वह अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपने तीखे, अनोखे और आक्रामक राइटिंग स्टाइल के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं. जानकारों का मानना है कि ट्रंप ने किसी खास किताब का नाम नहीं लिया, इसलिए उनके इस बयान को उनके चिर-परिचित मजाकिया और तंजिया अंदाज में ही देखा जा रहा है.
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-भारत एक्सप्रेस
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