Donald Trump Tariff Hike Controversy: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल को शुरू हुए 194 दिन बीत चुके हैं, लेकिन उनका शासनकाल नीतिगत अस्थिरता और बार-बार यू-टर्न लेने के लिए चर्चा में है. ट्रम्प ने अब तक 178 एग्जीक्यूटिव ऑर्डर जारी किए, यानी औसतन हर दिन एक नया आदेश. इनमें से 34 फैसलों को उन्होंने खुद ही पलट दिया. सबसे ज्यादा अस्थिरता टैरिफ नीतियों में देखी गई, जहां ट्रम्प 28 बार अपने फैसलों से पीछे हटे. यह अनिर्णय उद्योग जगत और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भ्रम की स्थिति पैदा कर रहा है.
ट्रम्प की टैरिफ नीतियां सबसे ज्यादा विवादों में रहीं. कनाडा और चीन जैसे व्यापारिक साझेदारों पर टैरिफ की घोषणा के बाद बाजार में अस्थिरता और कूटनीतिक दबाव ने ट्रम्प को कई बार पीछे हटने पर मजबूर किया. उदाहरण के लिए, टैरिफ डेडलाइन को पहले 9 जुलाई, फिर 1 अगस्त और बाद में एक हफ्ते के लिए टाल दिया गया. फार्मास्युटिकल्स और कॉपर पर दी गई छूट भी बार-बार बदली गई. विशेषज्ञों का कहना है कि इन यू-टर्न से वैश्विक व्यापार और निवेशकों का विश्वास डगमगा रहा है.
ट्रम्प (Donald Trump) के जल्दबाजी में लिए गए फैसलों का असर अमेरिकी अदालतों पर भी पड़ा है. उनके 200 से ज्यादा आदेशों पर संघीय अदालतों ने स्टे लगा दिया है. इनमें से कई नीतियां असंवैधानिक या अपरिपक्व पाई गईं. उदाहरण के लिए, बर्थ-राइट सिटिजनशिप को खत्म करने की कोशिश को 14वें संशोधन के उल्लंघन के आधार पर रोका गया. इक्विटी से जुड़े कॉन्ट्रैक्ट्स रद्द करने पर भी जजों ने रोक लगाई. यहां तक कि ट्रम्प द्वारा नियुक्त जजों ने भी कई मामलों में उनके आदेशों को खारिज किया.
ट्रम्प (Donald Trump) ने यूक्रेन को सैन्य सहायता रोकने का फैसला 9 जुलाई को लिया, लेकिन इसके बाद 10 पैट्रियट मिसाइलें और अन्य सहायता भेजने का आदेश दिया. गाजा युद्ध को 24 घंटे में खत्म करने का वादा किया, लेकिन छह महीने बाद भी इसे रोक नहीं सके. 4 फरवरी को गाजा के नागरिकों के पुनर्वास की बात कही, लेकिन 21 फरवरी को इससे इनकार किया और 12 मार्च को फिर पलट गए.
अवैध प्रवासियों के डिपोर्टेशन पर 22 जनवरी को आदेश जारी किया गया, लेकिन कोर्ट के दबाव में इसे रद्द करना पड़ा. इसके बाद नए आदेश दिए गए. रिसर्च फंडिंग पर रोक को तीन दिन में और गैस-ऊर्जा क्षेत्र की राहतों को दो हफ्ते में पलट दिया गया. LGBTQ अधिकारों जैसे मुद्दों पर भी ट्रम्प के फैसले बार-बार बदले.
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रम्प (Donald Trump) का ‘मेक अमेरिका ग्रेट अगेन’ का नारा नीतिगत अनिर्णय के कारण कमजोर पड़ रहा है. उनके फैसले न केवल प्रशासन को उलझन में डाल रहे हैं, बल्कि जनता और उद्योग जगत में भी भ्रम पैदा कर रहे हैं. अदालतों का बार-बार हस्तक्षेप और नीतियों पर स्टे इस बात का सबूत है कि ट्रम्प के फैसले ठोस योजना के बजाय जल्दबाजी में लिए जा रहे हैं.
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