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इजराइल-हमास युद्धविराम पर फिर संकट, शवों की वापसी को लेकर तनाव बढ़ा

Israel Hamas Conflict: मंगलवार को इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सेना को गाजा में तुरंत और शक्तिशाली हमले करने का आदेश दिया. उनका कहना है कि हमास ने जिस बंधक के शव लौटाए हैं, वह वही है जिसका शव दो साल पहले ही मिल चुका था. नेतन्याहू ने इसे युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बताया.

हमास का जवाब

इजराइल के हमले के आदेश के बाद हमास ने साफ कर दिया कि वह अब कोई भी बंधक का शव नहीं लौटाएगा. इससे अमेरिका की मध्यस्थता से हुआ युद्धविराम समझौता खतरे में पड़ गया है. समझौते के तहत हमास को सभी इजराइली बंधकों के शव जल्द लौटाने थे.

विवाद की शुरुआत कैसे हुई?

मंगलवार को दक्षिण गाजा के राफा शहर में इजराइली सैनिकों पर गोलीबारी हुई. सेना ने जवाबी फायरिंग की. इस पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. 10 अक्टूबर से युद्धविराम लागू है लेकिन बीच-बीच में हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं.

पिछली हिंसा की घटनाएं

19 अक्टूबर को हमास की गोलीबारी में दो इजराइली सैनिक मारे गए थे. इसके बाद इजराइल ने जवाबी हवाई हमले किए, जिसमें 40 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए. पिछले हफ्ते भी इजराइल ने इस्लामिक जिहाद संगठन पर हमला किया था.

बंधकों के शवों की वापसी में रुकावट

गाजा में अभी भी 13 इजराइली बंधकों के शव मौजूद हैं. मंगलवार को हमास ने एक शव ढूंढने का दावा किया लेकिन इजराइल के हमले के आदेश के बाद उसने उसे लौटाने से इनकार कर दिया. खान यूनुस में पत्रकारों ने एक सफेद बॉडी बैग को एंबुलेंस में रखा देखा लेकिन उसमें क्या था, यह साफ नहीं हुआ है.

आगे की बातचीत पर असर

शवों की वापसी में हो रही देरी युद्धविराम के अगले चरणों के लिए बड़ी चुनौती बन गई है. आगे यह तय होना है कि गाजा में हथियारों की निगरानी, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल की तैनाती और शासन कौन संभालेगा.

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एक-दूसरे पर आरोप

हमास का कहना है कि गाजा में तबाही इतनी है कि शव ढूंढना मुश्किल है. वहीं इजराइल का आरोप है कि हमास जानबूझकर देरी कर रहा है. मिस्र ने खोज के लिए विशेषज्ञों और मशीनों की टीम भेजी है. फरवरी 2025 में भी हमास ने गलत शव लौटाया था जो बाद में एक फिलिस्तीनी महिला का निकला.

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-भारत एक्सप्रेस

Pankaj kumar Pandey

मैं पंकज कुमार पाण्डेय हूं और मूल रूप से बिहार के पश्चिम चंपारण से आता हूं, जो सत्याग्रह की धरती है. मेरी शुरुआती पढ़ाई-लिखाई चंपारण में ही हुई है. इसके बाद मैंने महात्मा गांधी सेंट्रल यूनिवर्सिटी मोतिहारी से मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स किया. पढ़ाई पूरी करने के बाद पत्रकारिता में करियर की शुरुआत की. अब तक विभिन्न मीडिया संस्थानों में काम करते हुए खबरों की दुनिया को करीब से समझा हूं. इस दौरान रिपोर्टिंग, कंटेंट लेखन, रिसर्च और समाचार प्रस्तुति से जुड़े अहम पहलू सीखने को मिले. वर्तमान में मैं भारत एक्सप्रेस में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हूं, जहां मेरी विशेष रुचि राजनीति, विदेश और सामाजिक जागरूकता से जुड़ी खबरों में है. क्योंकि मेरा मानना है कि पत्रकारिता महज एक नौकरी नहीं बल्कि देश और समाज के प्रति जिम्मेदारी है.

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