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PoK में ‘एंटी-मुनीर’ मार्च: कांप गया इस्लामाबाद, घाटी में होगा तख्तापलट?

Anti Munir March PoK: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में जुल्म और ज्यादती की सारी हदें पार हो चुकी हैं. हालात इस कदर बेकाबू हैं कि अब घाटी में पाकिस्तान से आर-पार की जंग छिड़ गई है. रावलकोट में फज्र (तड़के) की नमाज के बाद शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निहत्थे नागरिकों पर पाकिस्तानी रेंजर्स और सेना ने अंधाधुंध गोलियां बरसा दीं. इस बर्बरता में कई बेगुनाह कश्मीरी नागरिकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दर्जनों गंभीर रूप से घायल हैं. अपनों को खोने के बाद स्थानीय लोगों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया है और घाटी ‘आजादी’ के नारों से गूंज उठी है.

आसिम मुनीर के खिलाफ मोर्चा (PoK Joint Awami Action Committee)

पाकिस्तानी हुकूमत की दमनकारी नीतियों के खिलाफ पूरे PoK में अभूतपूर्व बंद का माहौल है. गुस्साए प्रदर्शनकारियों ने सीधे पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए एक विशाल ‘एंटी-मुनीर’ मार्च निकाला है. मुजफ्फरराबाद से लेकर रावलकोट तक चक्का जाम कर दिया गया है. इस जनआक्रोश को दबाने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए मृतकों के जनाजे में शामिल लोगों पर भी सीधी फायरिंग कर दी. हालात को छिपाने के लिए पुंछ, रावलकोट और मुजफ्फरराबाद में इंटरनेट सेवाएं पूरी तरह ठप कर दी गई हैं, ताकि सेना के अत्याचारों की तस्वीरें दुनिया तक न पहुंच सकें.

अस्पतालों में मेडिकल इमरजेंसी (Healthcare Collapse In PoK)

इस नरसंहार के बाद रावलकोट और आसपास के अस्पतालों में आपातकाल जैसी स्थिति पैदा हो गई है. घायलों की संख्या इतनी तेजी से बढ़ रही है कि अस्पतालों में बेड कम पड़ गए हैं और बुनियादी दवाइयों की भारी किल्लत हो गई है. स्थानीय मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और मीडिया का दावा है कि मरने वालों का असली आंकड़ा पाकिस्तानी सरकार के दावों (11 मौतें) से कहीं ज्यादा है. जमीनी सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तानी रेंजर्स की सीधी गोलीबारी में अब तक 27 से 30 से अधिक बेगुनाह लोगों की जान जा चुकी है.

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बैन के बाद भड़की ‘आजादी’ की चिंगारी (Civil Rights In PoK)

यह पूरा विवाद तब और उग्र हो गया जब अधिकारियों ने क्षेत्र में आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण आंदोलन का नेतृत्व कर रहे प्रमुख नागरिक संगठन जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया. आटा, बिजली और बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर शुरू हुई यह लड़ाई अब पूरी तरह से स्वतंत्रता आंदोलन में बदल चुकी है. जिस जगह पर पाकिस्तानी सेना ने गोलियां चलाई थीं, वहीं पर दोबारा हजारों की तादाद में आक्रोशित लोग इकट्ठा हो गए हैं. स्थानीय नेताओं का साफ कहना है कि बंदूक के दम पर कश्मीरी आवाम के हौसलों को अब दबाया नहीं जा सकता.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

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