Russia support India in UN: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता और वीटो पावर (Veto Power) को लेकर चल रहे वैश्विक महासंग्राम में भारत का पलड़ा अब सबसे भारी हो गया है. संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र के दौरान भारत के सदाबहार दोस्त रूस ने वीटो पावर वाली स्थायी कुर्सी के लिए खुलकर भारत का समर्थन किया है.
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने संयुक्त राष्ट्र के मंच से साफ कर दिया कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी और महाशक्ति बन चुके भारत को UNSC की स्थायी सीट मिलना बेहद जरूरी है. इसके साथ ही रूस ने जर्मनी और जापान जैसे पश्चिमी समर्थित देशों को वीटो क्लब में शामिल करने का कड़ा विरोध कर दिया है.
UNGA में बोलते हुए रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का ढांचा अब 1945 के पुराने दौर से बाहर निकलना चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि सुरक्षा परिषद में सुधार के तहत एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) के क्षेत्रों का दबदबा बढ़ना चाहिए. लावरोव ने भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता का पुरजोर समर्थन करते हुए कहा कि वैश्विक शांति और संतुलन के लिए भारत को सुरक्षा परिषद की मुख्य मेज पर लाना ही होगा.
रूस ने भारत का समर्थन करते हुए अमेरिका और पश्चिमी गुटों को बड़ा झटका दिया है. लावरोव ने सुरक्षा परिषद में पश्चिमी देशों के लिए कोई भी नई स्थायी सीट बढ़ाने का सीधा विरोध किया. उन्होंने खास तौर पर जर्मनी और जापान का नाम लेते हुए गंभीर आरोप लगाए. लावरोव ने कहा कि ये दोनों देश फिर से पुराने सैन्यवाद और खतरनाक दावों की तरफ बढ़ रहे हैं, इसलिए उन्हें स्थायी सीट देना वैश्विक सुरक्षा के लिए सही नहीं होगा.
रूस ही नहीं बल्कि दुनिया के कई अन्य बड़े और विकासशील देश भी भारत के समर्थन (Russia support India)में मजबूती से खड़े हो गए हैं. मॉरीशस के विदेश मंत्री धनंजय रामफुल ने कहा कि वैश्विक मामलों में भारत की रचनात्मक और शक्तिशाली भूमिका को देखते हुए उसे हर हाल में स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए. वहीं पुर्तगाल के प्रधानमंत्री लुइस मोंटेनेग्रो और मार्शल आइलैंड्स ने भी माना कि भारत के बिना 21वीं सदी की सुरक्षा परिषद पूरी तरह अधूरी और बेमानी है.
सुरक्षा परिषद के मौजूदा ढांचे पर सवाल उठाते हुए अफ्रीकी देशों ने भी विद्रोह का बिगुल फूंक दिया है. सिएरा लियोन के राष्ट्रपति जूलियस माडा बायो ने कड़े शब्दों में कहा कि UNSC आज भी 1945 के दूसरे विश्व युद्ध के नतीजों पर चल रहा है. 1.6 अरब से ज्यादा की आबादी वाले अफ्रीकी महाद्वीप के पास एक भी स्थायी सीट न होना अन्याय है. अफ्रीकी देशों ने भी भारत (G4 और L69 ग्रुप) की उस मांग का समर्थन किया, जिसमें सुरक्षा परिषद का विस्तार तत्काल करने की बात कही गई है.
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बता दें कि फिलहाल UNSC में केवल 5 स्थायी सदस्य (चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका) हैं, जिनके पास किसी भी फैसले को रोकने की ‘वीटो शक्ति’ है. रूस द्वारा भारत की स्थायी सदस्यता का खुलकर झंडा उठाने से चीन और पाकिस्तान के खेमे में भारी खलबली मच गई है. भारत के पास आर्थिक, सैन्य और कूटनीतिक ताकत का वो आधार है, जिसे अब दुनिया की कोई भी महाशक्ति ज्यादा दिनों तक सुरक्षा परिषद के बाहर नहीं रख सकती.
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-भारत एक्सप्रेस
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