दुनिया

फर्ज और कंगाली के बीच हांफ रहा पाकिस्तान? जानें सऊदी-हूती विवाद में कैसे फंसा?

Saudi Houthi War: पश्चिम एशिया में एक बार फिर युद्ध के बादल मंडरा रहे हैं. कई सालों से लागू सीजफायर अब टूटता दिख रहा है, क्योंकि सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोही फिर से आमने-सामने हैं. लेकिन इस लड़ाई की आहट से सऊदी अरब से कहीं ज्यादा टेंशन पाकिस्तान के खेमे में है. पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच रक्षा समझौता है, जिसके तहत दोनों देश एक-दूसरे पर हमले की स्थिति में सैन्य मदद देने के लिए प्रतिबद्ध हैं. अब सवाल यह है कि अगर जंग छिड़ी, तो क्या अपनी बदहाली से जूझ रहा पाकिस्तान सऊदी की तरफ से मैदान में उतरेगा?

आखिर क्यों शुरु हुआ विवाद?

इस विवाद की शुरुआत तब हुई जब ईरान का एक विमान यमन की राजधानी सना के एयरपोर्ट पर उतरने वाला था. सऊदी समर्थित यमन सरकार को शक था कि इस विमान में हूतियों के लिए हथियार भेजे जा रहे हैं. विमान को रोकने के लिए यमन सरकार ने एयरपोर्ट के रनवे को ही बम से उड़ा दिया.

इस घटना से भड़के हूती विद्रोहियों ने सीधे सऊदी अरब को जिम्मेदार ठहराया और सऊदी पर मिसाइल हमलों के साथ-साथ ‘बाब-अल-मंदेब’ समुद्री रास्ते को बंद करने की खुली धमकी दे डाली. इसके बाद से ही दोनों ओर से हमलों का दौर शुरू हो गया है.

पाकिस्तान के लिए बनी ‘धर्मसंकट’ की स्थिति

पाकिस्तान के लिए यह संकट ‘कुआं और खाई’ जैसा है. इस साल मई में ही पाकिस्तान ने सऊदी में अपने 8,000 सैनिक, 16 लड़ाकू विमान और चीनी एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए थे. लेकिन पाकिस्तान की खुद की हालत इस समय बेहद खराब है. वह बलूचिस्तान में आंतरिक विद्रोह, पीओके में भारी विरोध प्रदर्शन और अफगानिस्तान सीमा पर जारी तनाव से बुरी तरह घिरा हुआ है.

इतिहास गवाह है कि जब भी सऊदी पर संकट आता है, तो पाकिस्तान कोई न कोई बहाना बनाकर पल्ला झाड़ लेता है. इसी साल फरवरी में जब ईरान-अमेरिका तनाव चरम पर था, तो पाकिस्तान ने अचानक अफगानिस्तान पर हवाई हमले कर दिए थे.

क्या इस बार बच पाएगा इस्लामाबाद?

जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान ने ऐसा सिर्फ इसलिए किया ताकि वह सऊदी को कह सके कि ‘हम खुद अपनी सीमा पर जंग में व्यस्त हैं, इसलिए सैनिक नहीं भेज सकते.’ इससे पहले साल 2015 में भी पाकिस्तान ने यमन गृहयुद्ध में सऊदी की तरफ से सैनिक भेजने से साफ इनकार कर दिया था, जिससे दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट आ गई थी.

फिलहाल सऊदी अरब और हूतियों के बीच तनाव शुरुआती दौर में है. लेकिन अगर यह टकराव बढ़ता है और हूती विद्रोही सऊदी अरब के शहरों पर बड़े मिसाइल हमले करते हैं, तो पाकिस्तान पर रियाद की मदद करने का भारी दबाव होगा.

ये भी पढ़ें: पाक सेना के काबू से बाहर होने वाला है PoJK, अवामी एक्शन कमेटी ने 15 जुलाई को मार्च का किया ऐलान

-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

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