Afghanistan Crisis: तालिबानी शासन के चार साल बाद अफगानिस्तान मानवीय संकट की चपेट में है, जहां कुपोषण ने लाखों महिलाओं और बच्चों की जिंदगी दांव पर ला दी है. संयुक्त राष्ट्र ने शुक्रवार को चेतावनी जारी करते हुए कहा कि 47 लाख से अधिक महिलाओं और बच्चों को तत्काल कुपोषण उपचार की आवश्यकता है.
यूएन के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने पत्रकारों से कहा, “हर चार में से एक अफगान गंभीर खाद्य असुरक्षा का शिकार है, और बच्चे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं.” स्थानीय मीडिया खामा प्रेस के अनुसार, सूखे, आर्थिक पतन और अंतरराष्ट्रीय फंडिंग की कमी ने स्थिति को और बदतर बना दिया है.
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया कि देश के तीन-चौथाई परिवारों को भोजन, स्वच्छता, पानी, स्वास्थ्य सेवाओं या आवास जैसी बुनियादी जरूरतों की सुरक्षित पहुंच नहीं है. यह संकट न केवल अफगानिस्तान बल्कि वैश्विक स्थिरता को प्रभावित कर सकता है.
विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) के अनुसार, 2025 में अफगानिस्तान में कुपोषण का स्तर चरम पर पहुंच गया है. यूनिसेफ की रिपोर्ट बताती है कि 5 वर्ष से कम उम्र के 3.5 मिलियन बच्चे कुपोषित हैं, जो इस साल अब तक दर्ज सबसे तेज वृद्धि है.
काबुल के इंदिरा गांधी अस्पताल में सैकड़ों प्रभावित बच्चे तत्काल उपचार के लिए भर्ती हो रहे हैं, लेकिन संसाधनों की कमी से कई इलाज से वंचित रह जाते हैं. ओचा की मार्च 2025 अपडेट रिपोर्ट के मुताबिक, फंडिंग कमी के कारण 400 से अधिक पोषण केंद्र बंद हो चुके हैं, जिससे 80,000 बच्चे और गर्भवती महिलाएं प्रभावित हुई हैं. हेलमंद प्रांत में हाल की एक रिपोर्ट में पाया गया कि चार में से एक बच्चा मध्यम से गंभीर कुपोषण का शिकार है, जहां संक्रमण और पोषण जागरूकता की कमी स्थिति को जटिल बना रही है.
महिलाओं पर तालिबान के प्रतिबंधों का असर सबसे घातक साबित हो रहा है. ह्यूमन राइट्स वॉच की वर्ल्ड रिपोर्ट 2025 के अनुसार, महिलाओं और लड़कियों को माध्यमिक शिक्षा, रोजगार और आवागमन पर सख्त पाबंदियां हैं, जो स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को सीमित कर रही हैं.
गर्भवती और स्तनपान कराने वाली 1.2 मिलियन महिलाएं कुपोषण से जूझ रही हैं, लेकिन स्वास्थ्य केंद्रों की कमी ने उन्हें असहाय बना दिया है. बीबीसी की पुरानी रिपोर्ट्स में उल्लेखित आंकड़ों को देखते हुए, स्थिति और गंभीर हो गई है, जहां 40% जीडीपी विदेशी सहायता पर निर्भर देश अब केवल 24% फंडिंग ही प्राप्त कर पा रहा है.
डब्ल्यूएचओ की 28 अगस्त 2025 रिपोर्ट में कहा गया कि 1.6 करोड़ अफगानों को जीवन रक्षक सहायता (UN Humanitarian Aid) चाहिए, लेकिन केवल 24% धन उपलब्ध हुआ, जिससे 420 स्वास्थ्य केंद्र बंद हो चुके हैं और 30 लाख लोग चिकित्सा से वंचित हैं.
अफगानिस्तान आर्थिक पतन, बेरोजगारी और गरीबी से जूझ रहा है. डब्ल्यूएफपी ने मई 2025 में आपातकालीन खाद्य सहायता रोक दी, जिससे 8.5 मिलियन लोग बिना समर्थन के रह गए. यूनिसेफ की जनवरी 2025 रिपोर्ट के अनुसार, 22.9 मिलियन लोग, जिनमें 12 मिलियन बच्चे शामिल हैं, मानवीय सहायता के हकदार हैं.
सूखे और ला नीना प्रभाव से कृषि प्रभावित हो रही है, जिससे खाद्य उत्पादन घट रहा है. सेब द चिल्ड्रन की जून 2025 रिपोर्ट में चेतावनी दी गई कि अक्टूबर तक पांच में से एक बच्चा संकट स्तर की भुखमरी का सामना करेगा. पड़ोसी देशों से लाखों अफगानों की वापसी ने बोझ बढ़ा दिया है.
मानवीय संगठनों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहायता बढ़ाने का बार-बार आह्वान किया है. डब्ल्यूएफपी को 2025 के अंत तक 650 मिलियन डॉलर की जरूरत है, लेकिन केवल 155 मिलियन प्राप्त हुए. यूएन ने चेतावनी दी कि समय पर हस्तक्षेप न होने पर कई मौतें होंगी और इसका लंबे समय तक असर पड़ेगा.
खामा प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान सहायता (UN Humanitarian Aid) अपर्याप्त है. विशेषज्ञों का मानना है कि तालिबान को भी कल्याण के लिए कदम उठाने चाहिए. ओचा की 2025 योजना में 2.42 बिलियन डॉलर की मांग की गई है, लेकिन केवल 17% फंड मिला.
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-भारत एक्सप्रेस
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