दुनिया

10 करोड़ लोग और धधकती गर्मी; अमेरिका में क्यों तेजी से बढ़ रहा है तापमान?

US Extreme Weather: अमेरिका में गर्मी और तापमान जिस रफ्तार से बढ़ रही हैं, उसने वहां के पर्यावरण का संतुलन पूरी तरह बिगाड़ दिया है. इस चिलचिलाती गर्मी और बढ़ते तापमान का ही नतीजा है कि अमेरिका इस वक्त कुदरत की तिहरी मार झेल रहा है. एक ओर पश्चिम में भीषण जंगलों की आग तो पूरब में धुएं का गुबार और दक्षिण में विनाशकारी बाढ़.

क्यों धधक रहे अमेरिका के जंगल?

बढ़ते तापमान के कारण इस साल अमेरिकी पहाड़ों पर बर्फबारी बेहद कम हुई, जिससे सूखा जल्दी आ गया. झुलसाने वाली गर्मी ने मिट्टी और पेड़-पौधों की नमी को पूरी तरह सोख लिया है. हालात यह हैं कि जो सूखा आमतौर पर अगस्त के मध्य में देखा जाता था, वह जुलाई में ही आ गया है.

इसी वजह से अमेरिका के 15 राज्यों में अचानक 68 बड़े जंगल धधक उठे हैं. सिर्फ एक रात में ही दर्जनों नई आग की घटनाएं सामने आई हैं. इस साल अब तक लगभग 37.2 लाख एकड़ क्षेत्र जलकर खाक हो चुका है, जो पिछले साल के मुकाबले 10 लाख एकड़ से भी ज्यादा है. हालात पर काबू पाने के लिए 17,400 से ज्यादा जवान और सैन्य हेलीकॉप्टर दिन-रात जुटे हैं.

शिकागो में रेड अलर्ट

इस गर्मी का असर सिर्फ जंगलों तक सीमित नहीं है. कनाडा के जंगलों से उठ रहे धुएं और अमेरिका की भीषण गर्मी ने मिलकर 10 करोड़ से ज्यादा आबादी यानी की देश की एक तिहाई जनसंख्या को घरों में कैद होने पर मजबूर कर दिया है.

बता दें कि शिकागो में हवा की गुणवत्ता दुनिया में दूसरे नंबर पर सबसे खराब दर्ज की गई. वहीं, गर्मी का आलम कुछ यूं है कि तापमान 32 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया है, जबकि हीट इंडेक्स 36 डिग्री सेल्सियस तक महसूस किया जा रहा है. यहां कई घरों में AC ने होने के कारण प्रशासन ने लोगों को राहत देने के लिए कूलिंग सेंटर्स चालू किए हैं.

टेक्सास में प्रलयंकारी बाढ़

मिशिगन यूनिवर्सिटी के पर्यावरण विशेषज्ञ जोनाथन ओवरपेक के अनुसार, बढ़ती गर्मी दो अलग-अलग रूपों में तबाही ला रही है. गर्म हवा एक तरफ जहां जमीन को सुखाकर जंगलों की आग भड़का रही है, वहीं दूसरी तरफ गर्म वातावरण में वॉटर वेपर को सोखने की क्षमता ज्यादा होती है. यही वजह है कि टेक्सास में आसमान से ऐसा पानी बरसा कि तीन दिनों में 27 इंच से ज्यादा बारिश हो गई और सब कुछ डूब गया. इस बाढ़ में अब तक दो लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है.

पेनसिलवेनिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के अनुसार, 1950 के दशक के बाद से इंसानी गतिविधियों के कारण जेट स्ट्रीम के रुकने की घटनाएं तीन गुना बढ़ गई हैं, जिससे कोई भी मौसम एक जगह लंबे समय तक ठहरकर तबाही मचा रहा है.

ये भी पढ़ें: बिजली-पानी के प्लांट तबाह…उड़ानें ठप; ईरान के इस एक कदम ने खाड़ी देशों में मचाया कोहराम

-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

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