US Iran Airstrikes: मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही खूनी जंग ने सबसे भयंकर और खौफनाक मोड़ ले लिया है. लगातार 13 रातों तक ईरान के सैन्य ठिकानों पर आसमान से तबाही बरसाने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत के लिए हमलों पर 5 दिनों का अस्थायी विराम लगाया था. लेकिन जैसे ही ईरान ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइल हमला किया, ट्रंप ने शांति का रास्ता बंद करते हुए ईरान पर अब तक का सबसे भीषण और विनाशकारी हवाई हमला शुरू कर दिया है.
अमेरिकी अधिकारियों और एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने को निशाना बनाकर ईरान की ओर से मिसाइलें दागी गई थीं. हालांकि अमेरिकी एयर डिफेंस सिस्टम ने सभी मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया, लेकिन इस हिमाकत से बौखलाए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सेना को ईरान पर दोबारा महा-अटैक का फरमान सुना दिया.
बुधवार को संवाददाताओं से बातचीत में ट्रंप ने दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि अमेरिका अब ईरान पर बहुत जोरदार हमला करने जा रहा है और अब हमारी बारी है. ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान ने अपनी गलती मानते हुए जवाबी कार्रवाई न करने की गुहार लगाई थी.
इससे पहले अमेरिकी वायुसेना ने लगातार 13 रातों तक ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर बमबारी की थी. इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने शांति की गुंजाइश देखते हुए सैन्य अभियानों को अस्थायी रूप से रोक दिया था. लेकिन ईरान की दुस्साहसिक मिसाइल स्ट्राइक के बाद महज पांच दिनों के भीतर यह महा-जंग दोबारा भड़क उठी है. अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ने दियाला और आसपास के इलाकों में बने ईरानी ठिकानों को एक बार फिर से मलबे के ढेर में बदलना शुरू कर दिया है.
ईरान की मेहर न्यूज एजेंसी के मुताबिक, इराक के दियाला प्रांत में अमेरिका और सऊदी अरब की वायुसेना ने एक संयुक्त ‘सीक्रेट ऑपरेशन’ चलाकर इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकाने को तबाह कर दिया. इस भीषण हवाई हमले में IRGC के चार बड़े सदस्य मारे गए हैं, जिनकी पहचान अली असगर अस्तानेह, अबोलफजल मोताकी, मोर्तजा अकबरी और अमीर अब्बास दरहमफोरूश के रूप में हुई है. ये चारों अफसर ईरान के काशान शहर के रहने वाले थे और वहां रणनीति बना रहे थे.
द न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक वरिष्ठ अमेरिकी सैन्य अधिकारी के हवाले से बेहद चौंकाने वाला दावा(America Attack on Iran) किया है. रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और सऊदी अरब के इस जॉइंट एयरस्ट्राइक में करीब 20 ईरानी सलाहकार, जिनमें IRGC के शीर्ष सदस्य और टेक्निकल एक्सपर्ट्स शामिल थे, सीधे मार गिराए गए हैं. इन ठिकानों को विशेष रूप से इसलिए निशाना बनाया गया क्योंकि ये सलाहकार ईरान समर्थित विद्रोही गुटों को घातक ड्रोन और मिसाइल ऑपरेशन की ट्रेनिंग और टेक्निकल सपोर्ट दे रहे थे.
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-भारत एक्सप्रेस
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