पश्चिम एशिया एक बार फिर भीषण युद्ध की आग में झुलसने लगा है और अमेरिका व ईरान के बीच जारी तनाव (US Iran Tension Hormuz) अब पूरी तरह चरम पर पहुंच गया है. वैश्विक तेल व्यापार की लाइफलाइन माने जाने वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में हालात बेहद विस्फोटक हो चुके हैं, जिससे तीसरा विश्व युद्ध शुरू होने की आशंका गहरा गई है. अमेरिका ने एक बार फिर ईरान के खिलाफ कड़ा और सख्त एक्शन लेते हुए उसके तमाम प्रमुख बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी दोबारा लागू कर दी है.
अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड के मुताबिक, यह आक्रामक नाकेबंदी पहले भी अप्रैल से मई के बीच लागू की गई थी और अब समझौते के टूटने के बाद इसे फिर शुरू किया गया है. अमेरिकी लड़ाकू विमान धड़ाधड़ उड़ान भर रहे हैं और दोनों देशों के बीच पहले से लागू अस्थायी सीजफायर अब पूरी तरह ध्वस्त हो चुका है.
इस भीषण सैन्य टकराव के बीच अमेरिकी वायुसेना ने लगातार चौथे दिन ईरान के कई रणनीतिक और सैन्य ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए हैं. इन हमलों के जवाब में पूरे खाड़ी क्षेत्र में भयानक धमाकों और जवाबी मिसाइल हमलों की खबरें सामने आ रही हैं. ईरान के सरकारी मीडिया ने खुलेआम दावा किया है कि उनकी सेना ने पलटवार करते हुए जॉर्डन में स्थित अमेरिकी मिलिट्री बेस को भी निशाना बनाया है.
हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है. इस खतरनाक महा-युद्ध की स्थिति को देखते हुए अमेरिका के प्रमुख सहयोगी देशों, कुवैत और बहरीन ने अपने नागरिकों के लिए सख्त एडवाइजरी जारी कर उन्हें संभावित खतरों और हवाई हमलों को लेकर अलर्ट रहने की सलाह दी है.
इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़े टीवी इंटरव्यू में ईरान को सीधी और खौफनाक चेतावनी(US Iran Tension Hormuz) देकर हड़कंप मचा दिया है. ट्रंप ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि यदि तेहरान तुरंत घुटने टेककर बातचीत की मेज पर वापस नहीं आता, तो अगले ही सप्ताह अमेरिकी सेना ईरान के बड़े पुलों, इंफ्रास्ट्रक्चर और बिजली संयंत्रों (Power Plants) को पूरी तरह तबाह कर देगी.
हालांकि, कूटनीतिक दबाव बनाने के साथ ही ट्रंप ने अपने पुराने फैसले में एक बड़ा यू-टर्न भी लिया है. उन्होंने ऐलान किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय मालवाहक जहाजों पर लगने वाले प्रस्तावित 20 प्रतिशत सुरक्षा शुल्क को अब वापस ले लिया गया है, और इसके बजाय खाड़ी के देशों द्वारा अमेरिका में किए जाने वाले भारी निवेश को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि व्यापारिक तनाव को थोड़ा नियंत्रित किया जा सके.
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मैदान-ए-जंग में बमबारी करने के साथ-साथ अमेरिका ने ईरान की रीढ़ तोड़ने के लिए उस पर अब तक का सबसे बड़ा डिजिटल और आर्थिक प्रहार भी कर दिया है. अमेरिकी वित्त मंत्रालय ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ईरान के केंद्रीय बैंक से जुड़े कई गुप्त क्रिप्टो वॉलेट्स पर नए और कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिसके तहत 13 करोड़ डॉलर (करीब 130 मिलियन डॉलर) से अधिक की क्रिप्टोकरेंसी को पूरी तरह फ्रीज कर दिया गया है.
अमेरिका के नवनियुक्त वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक बयान में साफ शब्दों में कहा कि वॉशिंगटन ईरान की तमाम अवैध वित्तीय गतिविधियों और डिजिटल संपत्तियों के दुरुपयोग को रोकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है. उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियां आगे भी ईरान के गुप्त धन स्रोतों पर पैनी नजर रखेंगी ताकि युद्ध के लिए अवैध कमाई तक उसकी पहुंच को पूरी तरह ब्लॉक किया जा सके.
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-भारत एक्सप्रेस
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