Nalanda Temple Stampede: बिहार के नालंदा जिले के मघड़ा गांव स्थित प्रसिद्ध माता शीतलाष्टमी मंदिर में मंगलवार को एक बड़ा हादसा हो गया. चैत्र महीने के आखिरी मंगलवार और शीतला अष्टमी के अवसर पर पूजा-अर्चना करने आए श्रद्धालुओं के बीच अचानक भगदड़ मच गई. इस दुखद घटना में 8 महिलाओं की मौत हो गई है, जबकि आधा दर्जन से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं.
मंगला मेले में मची अफरा-तफरी (nalanda sheetala temple stampede)
बिहारशरीफ से लगभग 5 किलोमीटर दूर मघड़ा गांव में सुबह से ही माता शीतला के दर्शन के लिए भक्तों का रेला उमड़ पड़ा था. हजारों की संख्या में श्रद्धालु कतारों में खड़े थे. चश्मदीदों के अनुसार, मंदिर परिसर में भीड़ का दबाव इतना बढ़ गया कि लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे और देखते ही देखते वहां चीख-पुकार मच गई. भगदड़ के बाद मंदिर परिसर और नजदीकी अस्पताल में अफरा-तफरी का माहौल व्याप्त है.
मृतकों की पहचान और राहत कार्य (nalanda stampede latest update)
हादसे में जान गंवाने वाली सभी महिलाएं हैं. अब तक दो मृतकों की पहचान हो चुकी है. अन्य मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है. घायलों को तत्काल इलाज के लिए मॉडल अस्पताल भेजा गया है. प्रशासन ने एहतियात बरतते हुए मंदिर परिसर को खाली करा दिया है और मेले को फिलहाल बंद करवा दिया गया है.
- रीता देवी (50), पति दिनेश रजक (सकुन्त बिहार)
- रेखा देवी (45), पति कमलेश प्रसाद (मथुरापुर नूरसराय)
क्यों उमड़ी थी इतनी भारी भीड़? (nalanda temple accident)
शीतला अष्टमी (sheetala mata temple nalanda) के दिन हिंदू धर्म में माता शीतला की विशेष पूजा का विधान है. मान्यता है कि इस दिन घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता और माता को एक दिन पहले बना ‘बासी भोजन’ (ठंडा भोग) अर्पित किया जाता है. चैत्र महीने का आखिरी मंगलवार होने के कारण मघड़ा के इस प्राचीन मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या उम्मीद से कहीं ज्यादा बढ़ गई थी, जिसके प्रबंधन में चूक भारी पड़ गई.
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धार्मिक आयोजनों में सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की कमी एक बार फिर निर्दोषों की जान पर भारी पड़ी है. मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. प्रशासन अब मामले की जांच कर रहा है कि आखिर किन परिस्थितियों में भगदड़ मची और क्या मौके पर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे. फिलहाल, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है.
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