दुनिया

डोनाल्ड ट्रंप को क्यों नहीं मिलेगा नोबेल प्राइज? जानिए शांति समिति का रुख

Donald Trump And Nobel Peace Prize: इन दिनों दुनिया में टैरिफ किंग के नाम से मशहूर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बड़े ही आत्ममुग्ध व्यक्ति बने हुए हैं. दुनिया में हो रही किसी घटना का क्रेडिट लेना हो या टैरिफ के रूप में हमला करना हो या फिर खुद को नोबेल प्राइज जैसे सम्मान के लिए नॉमिनेट करने का दावा करना हो. सब कुछ डोनाल्ड ट्रंप खुद ही कर लेते हैं. ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुए भारत पाकिस्तान सीजफायर में क्रेडिट लेकर डोनाल्ड ट्रंप नोबेल शांति पुरस्कार पर दावा कर रहे हैं. न केवल दावा भारत और पाकिस्तान से नॉमिनेशन के लिए साथ भी मांग रहे हैं. हालांकि, लगता नहीं है कि उन्हें ये प्राइज मिल पाएगा.

डोनाल्ड ट्रंप का अमेरिकी राष्ट्रपति होने के नाते उनके देश और दुनिया में काफी प्रभाव है. कई देश उनके आगे पीछे घूमते रहते हैं. हालांकि, इसके बाद भी ऐसा क्यों है कि उन्हें नोबेल का शांति पुरस्कार मिलना थोड़ा मुश्किल हैं? आइये जाने वो दो कारण जो उनके सपने पर पानी फेर रहे हैं. साथ ही जानें आखिर नोबेल प्राइज कैसे काम करता है?

नामांकन में शामिल हैं डोनाल्ड ट्रंप (Nobel Prize candidates)

नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन प्रक्रिया एक जटिल और गहन प्रक्रिया है, जिसमें कई चरण शामिल हैं. इस वर्ष, 338 व्यक्तियों और संगठनों को नामित किया गया है, जिनमें से कुछ प्रमुख नामों में डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार के लिए अपनी इच्छा व्यक्त की है. उनका दावा है कि उन्होंने अपने प्रशासन के दौरान छह युद्धों को समाप्त किया है.

ये भी पढ़ें: और कितना गिरेंगे डोनाल्ड ट्रंप! चार्ली किर्क के लिए क्यों किया सबसे बड़ा ऐलान?

क्यों नहीं मिलेगा नोबेल प्राइज? (Why Donald Trump Not Get Nobel Prize)

  • वह नोबेल शांति पुरस्कार के लिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं.
  • ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीतियों के विपरीत है नोबेल शांति पुरस्कार की वरीयता.

पुरस्कार समिति का रुख (Nobel Prize Committee Stand)

नोबेल शांति पुरस्कार के सचिव क्रिस्टियन बर्ग हार्पविकेन ने कहा कि समिति प्रत्येक उम्मीदवार को उनकी अपनी योग्यता के आधार पर मूल्यांकन करती है. मीडिया की ध्यान या सार्वजनिक अभियान, समिति के निर्णय पर कोई प्रभाव नहीं डालते हैं. जबकि, यह बात किसी से छिपी नहीं है कि डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान से इसके लिए फेवर मांगा है. उन्होंने खुद को दावेदार बना दिया है. अपने प्रभाव का उपयोग कर वह कई देशों से समर्थन मांग रहे हैं.

अमेरिका फर्स्ट नीति का प्रभाव (Donald Trump Criteria For Nobel Prize)

नोबेल शांति पुरस्कार एक प्रतिष्ठित पुरस्कार है जो व्यक्तियों और संगठनों को शांति और मानवता के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए सम्मानित करता है. यह पुरस्कार नोबेल फाउंडेशन द्वारा दिया जाता है, जिसकी स्थापना अल्फ्रेड नोबेल ने की थी. विशेषज्ञों का मानना है कि उनकी संभावना कम हैं क्योंकि नॉर्वे बहुपक्षवाद पर जोर देता है. जबकि, ट्रंप की अमेरिका फर्स्ट नीतियों के विपरीत है.

ये भी पढ़ें: डोनाल्ड ट्रंप के राज में क्रूरता: अमेरिका में भारतवंशी का सिर कलम, पत्नी-बेटे के सामने हमला; आखिर क्या था विवाद?

डोनाल्ड ट्रम्प की संभावनाएं (Who will get Nobel Peace Prize)

नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकन प्रक्रिया एक जटिल और गहन प्रक्रिया है. इसमें कई चरण शामिल हैं. डोनाल्ड ट्रंप की संभावनाएं कम हैं. हालांकि, इसके बाद भी उनका नाम आना अप्रत्याशित हो सकता है. नोबेल शांति पुरस्कार का महत्व शांति और मानवता के क्षेत्र में योगदान को बढ़ावा देने में है. हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप के अलावा कम ही लोग मानते हैं कि उन्होंने कुछ ऐसा किया है.

Shyamdatt Chaturvedi

श्यामदत्त चतुर्वेदी एक अनुभवी मीडिया पेशेवर हैं. वर्तमान में नोएडा 'भारत एक्सप्रेस' में पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया और पत्रकारिता के क्षेत्र में सात वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामदत्त ने हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए कंटेंट राइटिंग, रिपोर्टिंग, एडिटिंग और डेटा एनालिसिस में गहरी विशेषज्ञता हासिल की है. इससे पहले उन्होंने जी न्यूज, ईटीवी भारत, टीएफआई मीडिया, वे2न्यूज और सैफायर मीडिया लिमिटेड (इंडिया डेली लाइव) जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई हैं. उन्होंने स्थानीय पंचायत से लेकर विधानसभा, लोकसभा तक की व्यापक कवरेज की. उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU), अमरकंटक से पत्रकारिता और जनसंचार में स्नातक (BJMC) करने के बाद, प्रतिष्ठित माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर डिग्री (M.A.) हासिल की है.

Recent Posts

18 साल बाद न्यूयॉर्क फैशन वीक में लौटे सब्यसाची, क्रिस्टी टर्लिंगटन ने खोला शो

Sabyasachi NYFW Return 2026: मशहूर भारतीय डिजाइनर Sabyasachi Mukherjee ने 18 साल बाद New York…

47 seconds ago

जालौन की सड़कों पर खाकी की गरिमा हुई तार-तार, नशे में ‘टल्ली’ सिपाही का VIDEO वायरल

उत्तर प्रदेश के जालौन में वर्दी पहने एक पुलिसकर्मी का कथित तौर पर नशे की…

6 minutes ago

‘देवभूमि के विकास में दिन-रात जुटे हैं धामी…!’ सीएम के जन्मदिन पर क्या बोले पीएम मोदी?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 16 सितंबर 2026 को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को…

1 hour ago

सलमान खान ने बिग बॉस से निकाला था बाहर, 10 साल बाद टीवी शो में वापसी करेंगी एक्ट्रेस?

'बिग बॉस 10' की कंटेस्टेंट करीब 10 साल बाद रियलिटी टीवी पर वापसी कर सकती…

1 hour ago

प्रधानमंत्री से मिले…और मिनटों में सुलझ गया करोड़ों का मैटर! असगर अली से पीएम मोदी ने ऐसे निभाई बचपन की दोस्ती

पीएम मोदी के पुराने स्कूलमेट असगर अली वोरा ने 8 सितंबर को भायंदर की 2,810…

2 hours ago

मोदक-लड्डू नहीं, बप्पा को चढ़ाते हैं बोबा टी! थाईलैंड की ये गणेश पूजा क्यों है खास?

Ganesh Puja Thailand: थाईलैंड के बैंकॉक में गणेश जी की मूर्ति के सामने बोबा टी…

2 hours ago