Mutual Funds: कोविड के बाद निवेश का नक्शा बदल रहा है. म्यूचुअल फंड जैसे रिटेल माध्यम में छोटे शहरों और कस्बों ने तेज़ी से दखल दिया है. अब बड़े शहरों से बाहर के निवेशक केवल दर्शक नहीं रहे बल्कि सक्रिय भागीदार बन गए हैं.
पिछले कुछ वर्षों में ऐसी स्थितियाँ बन रही हैं जिनकी कल्पना मुश्किल थी. उत्तर प्रदेश म्यूचुअल फंड परिसंपत्तियों में तमिलनाडु से आगे चल रहा है. राजस्थान ने तेलंगाना को पीछे छोड़ दिया है. मध्य प्रदेश अब केरल से आगे निकल गया है. यानी वे राज्य जो कभी बाजार आधारित योजनाओं के लिए अपेक्षाकृत कम समृद्ध माने जाते थे, अब निवेश में अगुआ बनकर उभर रहे हैं.
वित्त वर्ष 2025 में जो नए SIP पंजीकरण हुए, उनमें से 55% से ज़्यादा B-30 शहरों से आए. यह आंकड़ा दो साल पहले 48% था. बी-30 शहरों में अब तक 2.34 करोड़ से ज़्यादा नए SIP खाते खुले हैं. साथ ही डायरेक्ट प्लान निवेश में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है, जो बढ़ते वित्तीय आत्मविश्वास और जागरूकता का साफ संकेत है.
B-30 का म्यूचुअल फंड में हिस्सा भी बढ़ा है. दिसंबर 2020 में B-30 का AUM हिस्सा 16% था. मार्च 2025 में यह बढ़कर 18% हो गया. B-30 AUM का 80% से अधिक हिस्सा इक्विटी फंडों को आवंटित है. वहीं टॉप 30 शहरों में यह अनुपात सिर्फ 52% है. स्पष्ट है कि छोटे शहरों के लोग भी इक्विटी के लिए तत्पर हैं.
AMFI के आंकड़ों के मुताबिक म्यूचुअल फंड उद्योग का कुल शुद्ध AUM ₹74.41 लाख करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है. जून 2025 में सिर्फ़ इक्विटी म्यूचुअल फंड में शुद्ध प्रवाह महीने दर महीने 24% बढ़कर ₹23,568 करोड़ हो गया. मार्च 2025 तक भारत का म्यूचुअल फंड AUM टू GDP अनुपात 19.9% था. यानी अभी भी विकसित अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में वृद्धि की बहुत गुंजाइश है.
डिजिटल सक्षमता: सस्ते स्मार्टफोन, आधार आधारित ई-केवायसी और यूपीआई भुगतान ने SIP शुरू करना बेहद आसान कर दिया है. संचार मंत्रालय के मुताबिक़ 2014 से 2024 के बीच ब्रॉडबैंड कनेक्शनों में 1,452% की वृद्धि हुई है. यह डिजिटल पैठ छोटे शहरों तक पहुंचने का बड़ा कारण है.
वित्तीय शिक्षा: “म्यूचुअल फंड सही है” जैसे अभियान और फंड हाउस व AMFI की पहल छोटे शहरों में भरोसा बनाने में सफल रही हैं.
नीतिगत बदलाव: SEBI ने SIP की न्यूनतम राशि ₹250 तक अनुमति दी, जिससे प्रवेश की बाधा कम हुई और युवा तथा पहली बार निवेश करने वाले आसानी से निवेश शुरू कर पा रहे हैं.
मानसिकता में बदलाव: अब लोग बच्चों की पढ़ाई, मकान खरीदने और रिटायरमेंट जैसी दीर्घकालिक योजनाओं के लिए SIP को एक व्यवस्थित और कम जोखिम वाला रास्ता समझ रहे हैं. पारंपरिक जमा साधनों से अब इक्विटी फंडों की तरफ़ रुझान बढ़ा है.
अवसर स्पष्ट हैं. भारत में म्यूचुअल फंड उद्योग अभी शुरुआती चरण में है और AUM टू GDP के निचले अनुपात का मतलब है कि बड़ा विस्तार होना बाकी है. बी-30 में बढ़ती आय, बेहतर डिजिटल पहुंच और वित्तीय साक्षरता से अगली निवेशक की लहर यहीं से आएगी.
हालाँकि चुनौतियाँ भी कम नहीं. छोटे शहरों में अब भी वित्तीय साक्षरता महानगरों की तुलना में कम है. गलत सूचना और कुछ वित्तीय उत्पादों पर अविश्वास संभावित निवेशकों को रोक सकता है. डिजिटल ढांचे में सुधार हुआ है पर दूरदराज इलाकों में इंटरनेट कनेक्टिविटी असंगत है, जो निर्बाध भागीदारी में बाधा बन सकती है.
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2020 से 2025 के बीच बी-30 शहरों से म्यूचुअल फंड AUM 24% से अधिक CAGR से बढ़ा है. इक्विटी-विशेष एयूएम और भी अधिक तेज़ी से बढ़ रहे हैं. म्यूचुअल फंड कंपनियों के लिए अब प्राथमिकता बी-30 में जुड़ाव को गहरा करना होना चाहिए. इसके लिए अनुरूप वित्तीय उत्पाद, लोकल निवेशक शिक्षा कार्यक्रम और पहुंच बढ़ाने में तकनीक का उपयोग जरूरी होगा.
डेट फंड और ETF भी निवेशकों को विविधता के विकल्प दे रहे हैं और धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रहे हैं. अगले दशक में आने वाले 10 करोड़ नए निवेशक संभवतः महानगरों से नहीं बल्कि देश के दिल यानी छोटे शहरों और कस्बों से आएंगे.
– भारत एक्सप्रेस
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