क्राइम

Cobrapost Investigation: कमला पसंद समूह के लिए ₹278 करोड़ की हेराफेरी – DGGI के पूर्व सुपरिंटेंडेंट ने रिटायरमेंट के बाद खरीदी ₹50.87 करोड़ की संपत्तियां

खोजी पत्रकारिता संस्था ‘कोबरापोस्ट’ (Cobrapost) ने अपने ताजा खुलासे में उत्पाद एवं सेवा कर खुफिया महानिदेशालय (DGGI) के पूर्व अधिकारी और नामी पान मसाला समूह ‘कमला पसंद’ के बीच वित्तीय सांठगांठ का सनसनीखेज दावा किया है. कोबरापोस्ट की जांच ‘कमला पसंद्स कॉन्सिग्लिएरे’ (Kamla Pasand’s Consigliere) के अनुसार, DGGI से रिटायर होने के महज 18 दिनों के भीतर पूर्व सुपरिंटेंडेंट रविंदर सिंह सांगवान ने तीन लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (LLP) फर्में गठित कीं और अगले चार वर्षों में कमला पसंद ग्रुप के लिए 278.29 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम घुमाई.

जांच में यह भी दावा किया गया है कि सांगवान और उनके परिवार ने आठ वर्षों के भीतर कुल 50.87 करोड़ रुपये की संपत्तियां अर्जित की हैं. इनमें से 5.25 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां तब खरीदी गईं, जब सांगवान केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) के खुफिया विंग में महत्वपूर्ण पद पर कार्यरत थे.

‘लाइसेंसिंग सर्विस’ के नाम पर लेन-देन का नायाब खेल

कोबरापोस्ट की पड़ताल के मुताबिक, अप्रैल 2022 में सेवानिवृत्त होने के बाद रविंदर सिंह सांगवान ने 6 मई को इंडस एफएमसीजी गुड्स एलएलपी, 16 मई को इंडस प्रॉम्प्ट लीगल्स एलएलपी और 23 मई को रैमो होम्स एलएलपी की स्थापना की. इसके तुरंत बाद इंडस एफएमसीजी गुड्स एलएलपी ने कमला पसंद और राजश्री ब्रांड की मालिक कंपनी ‘कमला कान्त एंड कंपनी एलएलपी’ के साथ एक विशेष समझौता किया.

इस व्यवस्था के तहत सांगवान की फर्म ने कमला कान्त एंड कंपनी से ब्रांड लाइसेंसिंग सर्विस खरीदी और वही सेवा समूह से जुड़ी 9 संबंधित कंपनियों को बेच दी. इसके एवज में फर्म को संबंधित कंपनियों से 278.29 करोड़ रुपये मिले. इसमें से 251.79 करोड़ रुपये कमला कान्त एंड कंपनी को चुकाए गए, जबकि बाकी बचे 26.50 करोड़ रुपये सांगवान की फर्म के खाते में मुनाफे के तौर पर आए. कोबरापोस्ट का आरोप है कि हर साल मिला लगभग 9.52 प्रतिशत का यह मार्जिन किसी वास्तविक व्यापारिक लाभ के बजाय तयशुदा कमीशन का संकेत देता है.

Cobrapost Investigation: बिना जमीन रजिस्ट्री के किया गया ₹52.45 करोड़ का लेन-देन, DLF और Kamla Pasand Group की खुली पोल

आय से अधिक संपत्ति और नियमों के उल्लंघन का आरोप

पड़ताल में दावा किया गया है कि रिटायरमेंट के दो हफ़्तों के भीतर ही सांगवान परिवार ने दक्षिण दिल्ली के पॉश सफदरजंग एन्क्लेव इलाके में 15 करोड़ रुपये की तीन मंजिला इमारत खरीदी. दस्तावेजों के अनुसार, सांगवान परिवार के चार सदस्यों ने मिलकर कुल 50.87 करोड़ रुपये की 17 संपत्तियां जुटाई हैं, जबकि इस अवधि के दौरान उनकी कुल दर्ज आय लगभग 37.60 करोड़ रुपये पाई गई.

जांच रिपोर्ट के अनुसार, उनके बेटे शांतनु सिंह के नाम दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद में 21.60 करोड़ रुपये की संपत्तियां दर्ज हैं. केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियमावली के तहत ग्रुप ‘बी’ अधिकारियों को संपत्ति खरीद से पहले विभाग को सूचना देना और अनुमति लेना अनिवार्य होता है, लेकिन सांगवान ने सेवा में रहते हुए खरीदी गई 5.25 करोड़ रुपये की संपत्तियों का विवरण कथित तौर पर विभाग से साझा नहीं किया.

यह भी पढ़िए: कोबरापोस्ट 30 अक्टूबर को करने जा रहा है बड़ा खुलासा, एक कॉरपोरेट दिग्गज पर 41,000 करोड़ हेर-फेर का है आरोप

निगरानी एजेंसी के पूर्व अधिकारी से जुड़े गंभीर सवाल

डीजीजीआई देश में कॉरपोरेट जगत की जीएसटी और कर चोरी पर पैनी नजर रखने वाली शीर्ष संस्था है. कोबरापोस्ट ने सवाल उठाया है कि क्या सांगवान का सेवाकाल के दौरान इस बड़े पान मसाला समूह के साथ कोई गुप्त संपर्क था? क्या पूर्व में समूह पर संभावित कर चोरी को लेकर पड़े छापों के नतीजों को प्रभावित करने में कोई मदद दी गई थी? कोबरापोस्ट का कहना है कि जिस तेजी से शेल-जैसी कंपनियों का जाल बुनकर करोड़ों रुपये का लेन-देन किया गया, वह निष्पक्ष जांच एजेंसियों द्वारा गहन पड़ताल की मांग करता है.

यह भी पढ़िए: Cobrapost Investigation: यूपी के MLC वागीश पाठक पर बड़ा खुलासा, चुनावी हलफनामे में छिपाई थीं 18 कंपनियां

Bharat Express Desk

Recent Posts

21 से 27 अक्टूबर तक सजेगा अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा, 24 देशों की झलक और ग्लोबल डांस फेस्टिवल होंगे खास आकर्षण

International Kullu Dussehra: हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा का आयोजन 21 से 27…

36 minutes ago

अफजाल अंसारी को हाईकोर्ट से राहत, शस्त्र लाइसेंस निरस्तीकरण मामला फिर पहुंचेगा कमिश्नर के पास

UP News: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सांसद अफजाल अंसारी के तीन शस्त्र लाइसेंस निरस्त करने के…

1 hour ago

UP पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, 3 महीने में वोटिंग कराए सरकार

UP Panchayat Election: उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला आया…

1 hour ago

नेफा का काला अध्याय: अक्टूबर 1962 की तबाही

1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान नेफा मोर्चे पर क्या हुआ था? थागला रिज से…

2 hours ago

अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग तेज, इंडिया गेट पर माता-पिता से मिले राहुल और प्रियंका गांधी

Ankita Bhandari Case: अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग को लेकर इंडिया गेट पर…

3 hours ago