AI Generated Image (Bharat Express English)
खोजी पत्रकारिता संस्थान कोबरापोस्ट (Cobrapost) ने अपनी नवीनतम इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट ‘द गुटखा काउंसलर’ (THE GUTKHA COUNCILLOR) के जरिए उत्तर प्रदेश के विधान परिषद सदस्य (MLC) और पूर्व सेंट्रल एक्साइज अधिकारी वागीश पाठक की व्यावसायिक गतिविधियों और संपत्तियों को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं.
कोबरापोस्ट द्वारा मिनिस्ट्री ऑफ कॉर्पोरेट अफेयर्स (MCA) के रिकॉर्ड्स और चुनाव आयोग में जमा किए गए 2022 के चुनावी हलफनामे के विश्लेषण में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं.
हलफनामे में 18-19 कंपनियों की जानकारी छिपाई
कोबरापोस्ट की जांच के मुताबिक, वागीश पाठक लगभग 18 से 19 कॉर्पोरेट कंपनियों में डायरेक्टर के पद पर रहे हैं और उनकी पत्नी भी कई कंपनियों से जुड़ी रही हैं. इनमें से छह कंपनियां ‘कमला पसंद ग्रुप’ से जुड़ी बताई गई हैं.
हालांकि, आरोप है कि 2022 के अपने हलफनामे में वागीश पाठक ने इन बिजनेस एसोसिएशन और कंपनियों के नामों का स्पष्ट ब्योरा साझा नहीं किया.
पान मसाला और तंबाकू उद्योग से रीटेनरशिप फीस
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि सेंट्रल एक्साइज विभाग से सेवानिवृत्त/सेवामुक्त होने के बाद वागीश पाठक पान मसाला, तंबाकू और सुगंधित उत्पादों का निर्माण करने वाली कई नामी कंपनियों से कंसल्टिंग व रीटेनरशिप फीस प्राप्त करते रहे हैं.
कोबरापोस्ट का कहना है कि उन्हें कुछ चुनिंदा व्यावसायिक संस्थाओं से सालाना ₹20 लाख से ₹32 लाख रुपये तक का भुगतान प्राप्त हुआ है.
करोड़ों की जमीन और संपत्तियों के कम मूल्यांकन का दावा
कोबरापोस्ट के विश्लेषण में यह भी कहा गया है कि 2005 से 2013 के बीच वागीश पाठक और उनकी पत्नी द्वारा जेवर (गौतम बुद्ध नगर) में खरीदी गई 12.39 एकड़ और 11.62 एकड़ की दो बड़ी जमीनों व गुरुग्राम स्थित अचल संपत्तियों का मूल्य चुनावी हलफनामे में कथित तौर पर कम करके दर्शाया गया है.
कोबरापोस्ट ने अपनी रिपोर्ट जारी करने से पहले वागीश पाठक और उनकी पत्नी को विस्तृत प्रश्नावली भेजी थी, लेकिन रिपोर्ट सार्वजनिक होने तक उनकी तरफ से कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ था.
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