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Cobrapost Investigation: बिना जमीन रजिस्ट्री के किया गया ₹52.45 करोड़ का लेन-देन, DLF और Kamla Pasand Group की खुली पोल

कोबरापोस्ट की जांच रिपोर्ट ‘IT TAKES TWO TO TANGO’ में DLF लिमिटेड और कमला पसंद ग्रुप के चौरसिया परिवार के बीच बिना जमीन हस्तांतरण ₹52.45 करोड़ के संदिग्ध भुगतान का दावा किया गया है. पढ़ें पूरी रिपोर्ट-

Cobrapost Investigation
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

खोजी पत्रकारिता संस्थान ‘कोबरापोस्ट’ (Cobrapost) ने अपनी ताजा जांच रिपोर्ट “इट टेक्स टू टू टैंगो” (IT TAKES TWO TO TANGO) में देश की बड़ी रियल एस्टेट कंपनी DLF लिमिटेड और कमला पसंद (Kamla Pasand) ग्रुप के प्रमोटर चौरसिया परिवार के बीच हुए एक संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का पर्दाफाश करने का दावा किया है.

कोबरापोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, DLF लिमिटेड और उसकी पांच सहयोगी संस्थाओं (Entities) ने कमला पसंद ग्रुप के चौरसिया परिवार के तीन सदस्यों द्वारा गठित एक फार्मिंग एलएलपी (LLP) को 52.45 करोड़ रुपये के मुआवजे का भुगतान किया.

10 करोड़ के बदले 52.45 करोड़ का मुआवजा?

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि चौरसिया परिवार ने प्लॉट्स खरीदने के नाम पर महज 10 करोड़ रुपये जमा किए थे. हालांकि, इस सौदे के बदले न तो कोई सेल डीड (Sale Deed) पंजीकृत की गई और न ही किसी संपत्ति या प्रॉपर्टी का स्थानांतरण हुआ. इसके बावजूद, DLF से जुड़ी संस्थाओं द्वारा 52.45 करोड़ रुपये का भारी-भरकम मुआवजा दे दिया गया.

इसके अलावा, कोबरापोस्ट की जांच में यह बात भी सामने आई है कि मुआवजा राशि का भुगतान करने के बाद DLF लिमिटेड ने अपनी उन पांचों सहयोगी कंपनियों का अस्तित्व ही अपनी किताबों (Financial Books) से मिटा दिया. वहीं, इस मुआवजे की रकम को डीएलएफ की संस्थाओं के बही-खातों में ‘प्रोफेशनल फीस’ (Professional Fees) के रूप में दर्ज किया गया था.

सवालों के घेरे में कॉर्पोरेट लेन-देन: कोबरापोस्ट

बिना किसी संपत्ति के हस्तांतरण के इतना बड़ा मुआवजा देना और उसे प्रोफेशनल फीस के तौर पर दिखाना वित्तीय अनियमितताओं और कॉर्पोरेट प्रशासन के नियमों का संदिग्ध उल्लंघन है. उल्लेखनीय है कि कोबरापोस्ट इससे पहले भी देश के कई बड़े कॉर्पोरेट घरानों और वित्तीय संस्थानों में संदिग्ध लेन-देन का पर्दाफाश करता रहा है. इस ताजा खुलासे के बाद रियल एस्टेट और कॉर्पोरेट सेक्टर में हलचल मच गई है.

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