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प्राइवेट स्कूल के टीचर्स को सीधे नौकरी से निकाला तो खैर नहीं, हाई कोर्ट ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने प्राइवेट स्कूलों के स्टाफ और टीचर्स के पक्ष में एक बड़ा और बेहद अहम फैसला सुनाया है. कोर्ट ने साफ कर दिया है कि कोई भी निजी स्कूल प्रबंधन शिक्षा निदेशक (Director of Education) की लिखित मंजूरी के बिना अपने किसी भी कर्मचारी को नौकरी से बर्खास्त नहीं कर सकता. अगर कोई स्कूल ऐसा करता है, तो उसका आदेश पूरी तरह से अमान्य (गैरकानूनी) माना जाएगा. हाई कोर्ट का यह फैसला उन हजारों प्राइवेट स्कूल कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है जो अक्सर मैनेजमेंट की मनमानी का शिकार होते हैं.

क्या है पूरा मामला?

ये पूरा विवाद ‘साईं मेमोरियल गर्ल्स स्कूल’ की एक सहायक शिक्षिका (असिस्टेंट टीचर) को नौकरी से हटाए जाने के बाद शुरू हुआ था. स्कूल प्रशासन ने शिक्षिका पर काम ठीक से न करने, सहकर्मियों के साथ खराब बर्ताव और अंग्रेजी की बुनियादी जानकारी न होने जैसे कई आरोप लगाते हुए चार्जशीट जारी की थी. आंतरिक जांच अधिकारी की रिपोर्ट के आधार पर स्कूल ने शिक्षिका को सीधे नौकरी से निकाल दिया.

शिक्षिका ने इस फैसले के खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी. पहले दिल्ली स्कूल ट्रिब्यूनल और फिर हाई कोर्ट की एकल पीठ (सिंगल बेंच) ने शिक्षिका की अर्जी खारिज कर दी थी. लेकिन हार न मानते हुए शिक्षिका ने इस फैसले को हाई कोर्ट की खंडपीठ के सामने चुनौती दी.

हाई कोर्ट ने याद दिलाया 1973 का कानून

न्यायमूर्ति सी. हरि शंकर और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की दो जजों की खंडपीठ ने इस मामले की गंभीरता को समझा और सिंगल बेंच के फैसले को पलट दिया. कोर्ट ने कहा कि स्कूल ने ‘दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम, 1973’ की धारा 8(2) का सीधा उल्लंघन किया है.

इस कानून के मुताबिक, चाहे स्कूल को सरकारी मदद मिलती हो या नहीं (Unaided School), किसी भी कर्मचारी को नौकरी से हटाने जैसी बड़ी सजा देने से पहले सरकार के शिक्षा निदेशक की पूर्व मंजूरी लेना अनिवार्य है.

स्कूल की दलीलें खारिज

अदालत में स्कूल मैनेजमेंट ने दलील दी कि उन्होंने शिक्षिका को अपनी बात रखने का पूरा मौका दिया था और जांच रिपोर्ट पूरी तरह तर्कपूर्ण है. लेकिन खंडपीठ ने स्कूल की इन सभी दलीलों को सिरे से खारिज कर दिया. कोर्ट ने कहा कि जब तक बुनियादी कानूनी प्रक्रिया यानी शिक्षा निदेशक की मंजूरी पूरी नहीं होती, तब तक हटाने का आदेश पूरी तरह गलत है.

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-भारत एक्सप्रेस

Vaibhav Gupta

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