सांकेतिक तस्वीर.
1984 सिख दंगा मामले में तीन आरोपियों को 27 साल से अधिक की देरी के बाद बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देने के लिए राज्य को अनुमति देने से इनकार कर दिया गया है. न्यायमूर्ति प्रतिभा एम सिंह और न्यायमूर्ति अमित शर्मा की पीठ ने कहा कि वह बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान से अवगत है, लेकिन अभियोजन पक्ष द्वारा अपील दायर करने में लंबी देरी को माफ नहीं कर सकती.
अभियोजन पक्ष ने अपील करने की अनुमति मांगते हुए अदालत से हत्या और दंगा मामले में 29 जुलाई, 1995 को पारित बरी किए गए ट्रायल कोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दायर करने में 10,165 दिनों की देरी को माफ करने का आग्रह किया था.
याचिका को खारिज करते हुए पीठ ने कहा कि लंबी देरी और इसी तरह के मामलों में समन्वय पीठ के फैसलों को देखते हुए, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा है, देरी को माफ नहीं किया जा सकता. इसलिए अपील करने की अनुमति नहीं दी जा सकती.
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दूसरी ओर, अभियोजन पक्ष ने कहा कि हिंसा से संबंधित मामलों की जांच के लिए दिसंबर 2018 में न्यायमूर्ति एस एन ढींगरा समिति का गठन किया गया था और अप्रैल 2019 में इसकी रिपोर्ट आने के बाद, आंतरिक समीक्षा की गई और अपील दायर करने के लिए मामलों को संसाधित किया गया. 31 अक्टूबर, 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख सुरक्षा गार्डों द्वारा हत्या के बाद दिल्ली में सिख समुदाय के सदस्यों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा भड़क उठी थी.
-भारत एक्सप्रेस
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