अतुल सुभाष के बच्चे की कस्टडी केस (फाइल फोटो)
Atul Subhash Child Custody Case: सुप्रीम कोर्ट ने बेंगलुरु के AI इंजीनियर अतुल सुभाष की मां की ओर से दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका का सुप्रीम कोर्ट ने निपटारा कर दिया है. कोर्ट ने अपने फैसले में साफ कर दिया है कि बच्चे की कस्टडी उसके माँ के पास ही रहेगा. जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने यह फैसला दिया है. कोर्ट ने आदेश के बाद बच्चे को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया. अतुल सुभाष की पत्नी के वकील ने सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया कि बच्चे की कोई फोटो सार्वजनिक न हो, यह मीडिया में हाईलाइट मामला है. सुप्रीम कोर्ट ने इन-कैमरा कार्यवाही की अनुमति दी.
सुप्रीम कोर्ट ने लाइव स्ट्रीमिंग और वेबएक्स कार्यवाही को बंद कर दिया था. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने पूछा था कि बच्चा कहां है. निकिता सिंघानिया की ओर से पेश वकील ने कहा था कि वह बोर्डिंग में है. कोर्ट ने पूछा कि आरोपी को जमानत मिली है क्या? वही कोर्ट ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील ने कहा था कि बच्चा पिछले एक साल से बोर्डिंग स्कूल में है. बच्चा अभी चार साल का है. कोर्ट ने हमने बंदी प्रत्यक्षीकरण के तहत दायर याचिका को इसलिए स्वीकार किया था कि क्योंकि याचिका में कहा गया था कि बच्चा का पता नही चल रहा है.
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया था कि बच्चा माँ निकिता की कस्टडी में है. बच्चे की कस्टडी आज ही मिली है. उसे बच्चे की मां अब बेंगलोर ले जा रही है. अतुल सुभाष की मां अंजू मोदी ने याचिका मे अपने पोते व्योम कीकस्टडी की मांग की थी याचिका में कहा गया था कि सुभाष की पत्नी निकिता सिंघानिया और उसके परिजनों ने अब तक यह नही बताया है कि बच्चा कहां है. याचिका में यह भी कहा गया था कि व्योम को दादा-दादी के साथ रहने की अनुमति मिलनी चाहिए.
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