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‘न तटबंध सुरक्षित, न किसानों का भविष्य’, पप्पू यादव ने बाढ़ और तबाही के बीच सरकार-प्रशासन को घेरा

रिपोर्ट- दिलीप दुबे


बगहा में बाढ़ के बीच चंपारण तटबंध के तीन जगहों पर टूटने से हालात बिगड़ गए हैं. तटबंध टूटने के बाद आसपास के इलाकों में लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं और बड़ी मात्रा में खेतों में पानी फैलने की बात सामने आई है. इसी बीच सांसद पप्पू यादव बगहा पहुंचे और क्षतिग्रस्त तटबंध का मौके पर जाकर निरीक्षण किया. उन्होंने तटबंध की स्थिति को लेकर सरकार और प्रशासन से कई सवाल किए.

निरीक्षण के दौरान पप्पू यादव ने कहा कि हर साल बाढ़ से बचाव और तटबंधों की सुरक्षा के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं. इसके बावजूद अगर बांध बार-बार टूट रहे हैं तो काम की गुणवत्ता और निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है. उन्होंने तटबंध टूटने के लिए जिम्मेदार अभियंताओं और अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की.

पप्पू यादव ने कहा कि वाल्मीकिनगर, बगहा और आसपास का इलाका हर साल बाढ़ के खतरे से जूझता है. बाढ़ आने पर हजारों एकड़ खेती प्रभावित होती है और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. उनका कहना है कि केवल बाढ़ आने के बाद राहत पहुंचाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि तटबंधों को मजबूत करने और नदी के बहाव से होने वाले कटाव को रोकने के लिए पहले से ठोस तैयारी जरूरी है.

सांसद ने तटबंधों के संवेदनशील हिस्सों पर गाइड बांध और ठोकर बनाने की मांग भी उठाई. इसके साथ ही नदी में जमा गाद यानी सिल्ट की समस्या को दूर करने के लिए भी काम करने की बात कही. उनका कहना है कि नदी के रास्ते में गाद जमा होने से पानी के बहाव और कटाव की स्थिति प्रभावित हो सकती है, इसलिए इस पहलू पर भी ध्यान देना जरूरी है.

राहत व्यवस्था पर भी सवाल

बाढ़ के बीच राहत और बचाव व्यवस्था को लेकर भी पप्पू यादव ने सवाल उठाए. उन्होंने प्रभावित इलाकों में पर्याप्त नाव, मेडिकल सुविधा और कम्युनिटी किचन की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि बाढ़ में फंसे लोगों को जरूरी मदद समय पर मिल सके.

उन्होंने साल 2024 और 2026 में तटबंध टूटने की घटनाओं की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है. साथ ही यह भी कहा कि जांच में जो लोग जिम्मेदार पाए जाएं, उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.

किसानों के लिए कर्ज माफी और मुआवजे की मांग

पप्पू यादव ने वाल्मीकिनगर और बगहा क्षेत्र को राष्ट्रीय आपदा क्षेत्र घोषित करने की मांग रखी. इसके अलावा उन्होंने बाढ़ से प्रभावित किसानों के पांच साल के कर्ज को माफ करने और फसल समेत अन्य नुकसान का उचित मुआवजा देने की बात कही.

सांसद ने नुकसान का आकलन करने के लिए ड्रोन और एआई तकनीक के इस्तेमाल का सुझाव भी दिया. उनका कहना है कि आधुनिक तकनीक की मदद से प्रभावित इलाकों और नुकसान का तेजी से सर्वे कराया जा सकता है. इसके आधार पर पीड़ित परिवारों को जल्द राहत और क्षतिपूर्ति दी जा सकेगी.

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-भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

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