भरत तिवारी
बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव में हुआ पुलिस एनकाउंटर अब बड़ा विवाद बनता जा रहा है. इस घटना में स्थानीय निवासी भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राजनीतिक बहस और परिवार के गंभीर आरोपों तक पहुंच गया है.
मामले की शुरुआत एक सोशल मीडिया वीडियो से हुई थी, जिसमें मृतक भरत तिवारी हाथ में हथियार लहराते हुए दिखाई दे रहा था. वीडियो में वह सरकार और स्थानीय प्रशासन के खिलाफ जमकर गुस्सा निकाल रहा था. पुलिस का कहना है कि जब उन्हें इस बात की भनक लगी, तो शाहपुर थाना प्रभारी राजेश मालाकार की अगुवाई में एक टीम भरत को पकड़ने उसके घर पहुंची.
पुलिस के मुताबिक, टीम को देखते ही भरत ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी. काफी देर तक दोनों तरफ से तनातनी चलती रही और आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई में भरत मारा गया. शुरुआत में पुलिस ने भरत को मानसिक रूप से अस्वस्थ (विक्षिप्त) भी बताया था.
दूसरी तरफ, भरत के परिवार की कहानी पुलिस के दावों से बिल्कुल अलग और झकझोर देने वाली है. भरत की मां सुमन देवी और छोटे भाई चंदन तिवारी का कहना है कि पुलिस बुधवार सुबह जबरन उनके घर में घुसी और पूरे परिवार को धमकाया.
भरत की मां सुमन देवी का रो-रोकर बुरा हाल है. उन्होंने बताया:
“मेरा बेटा जवैनिया गांव के बाढ़ पीड़ितों को दोबारा बसाने की मांग कर रहा था. जब सरकार और एसडीएम ने उसकी एक नहीं सुनी, तो गुस्से में उसने हथियार उठा लिया. लेकिन जब पुलिस ने उसे घेरा, तो उसने अपने हथियार फेंककर सरेंडर कर दिया था. इसके बावजूद पुलिस ने जानबूझकर उसे गोली मार दी. जब हम उसे बचाने दौड़े, तो महिला पुलिसकर्मियों ने हमें वहां से खदेड़ दिया.”
जब परिवार से पूछा गया कि पुलिस तो भरत को मानसिक रूप से बीमार बता रही थी, तो भाई चंदन ने साफ कहा कि भरत बिल्कुल ठीक था. वह बीएससी (B.Sc) पास था और सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहा था. नौकरी ना मिलने पर वह समाजसेवा के कामों में जुट गया था. उसे सिर्फ बदनाम करने के लिए मानसिक रूप से बीमार बताया जा रहा है.
इस घटना के बाद बिहार की सियासत में उबाल आ गया है. राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए इस एनकाउंटर को शत-प्रतिशत फर्जी करार दिया. तेजस्वी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ तो सरकार दिखावे के लिए न्यायिक जांच के आदेश दे रही है, और दूसरी तरफ पीड़ित परिवार पर ही मुकदमे लादे जा रहे हैं.
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि बिहार में यह कोई पहली घटना नहीं है. सरकार असली मुद्दों (जैसे बेरोजगारी, बाढ़) से जनता का ध्यान भटकाने के लिए ऐसे फर्जी एनकाउंटर का सहारा लेती है, शहरों के नाम बदलती है और विपक्ष के नेताओं की सुरक्षा कम करती है. उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि सरकार जाति के आधार पर टारगेट करके एनकाउंटर कर रही है.
इस पूरे बवाल के बीच पुलिस ने अब तक तीन अलग-अलग एफआईआर (FIR) दर्ज की हैं, जिसने विवाद को और बढ़ा दिया है:
फिलहाल, बिलौटी गांव में तनाव का माहौल है. ग्रामीण और परिजन पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग पर अड़े हैं.
ये भी पढ़ें: बिहार विधानसभा में खुली विधायकों की ‘विशेष अदालत’, सम्राट सरकार के इस कडक फैसले के क्या हैं मायने?
-भारत एक्सप्रेस
Nepal Dog Cruelty: नेपाल के बझांग जिले से पशु क्रूरता का एक बेहद दर्दनाक और…
पेरियार और अन्नादुरै के बीच आजादी के दिन और व्यक्तिगत फैसलों पर हुए मतभेदों ने…
DUSU Election 2026: DUSU चुनाव में सबसे दिलचस्प मुकाबला अध्यक्ष पद पर देखने को मिलेगा,…
दिल्ली में भारत एक्सप्रेस के 'बज्म-ए-सहाफ़त' कॉन्क्लेव में ग्रुप मैनेजिंग एडिटर राधेश्याम राय ने भाषा…
SONIPAT PITBULL ATTACK: हरियाणा के सोनीपत की सिक्का कॉलोनी में पिटबुल के हमले का रोंगटे…
मथुरा के शेरगढ़ में बोरिंग के दौरान लोहे का पाइप 11 हजार वोल्ट की हाईटेंशन…