देश

वैश्विक मंच पर पीएम मोदी की अनूठी मेजबानी, ब्रिक्स गाला डिनर में दिखी देश की सांस्कृतिक और क्षेत्रीय विविधता

18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले दिन नई दिल्ली के भारत मंडपम में दुनिया के कई बड़े नेताओं और प्रतिनिधियों के लिए खास गाला डिनर का आयोजन किया गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मेजबानी में हुए इस डिनर में भारत की संस्कृति और विविधता सिर्फ सजावट और माहौल तक सीमित नहीं रही, बल्कि खाने की मेज पर भी इसकी पूरी झलक देखने को मिली.

मेहमानों के लिए तैयार किया गया पूरा मेन्यू शाकाहारी था. खास बात यह रही कि इसमें देश के अलग-अलग हिस्सों के पारंपरिक स्वाद को जगह दी गई, लेकिन व्यंजनों को आधुनिक अंदाज में पेश किया गया.

शुरुआत में परोसे गए खास स्टार्टर

डिनर की शुरुआत खंडवी मिले-फॉय से हुई. इसमें बेसन से तैयार मुलायम और स्टीम्ड खंडवी को सरसों, नारियल और करी पत्ते के तड़के के साथ परोसा गया. इसके साथ केसर आम, माइक्रोग्रीन्स और योगर्ट ड्रेसिंग ने इस पारंपरिक व्यंजन को एक अलग अंदाज दिया.

दूसरा स्टार्टर खुंब गलौटी था. इसमें मशरूम से तैयार कबाब को तवे पर हल्का ग्रिल किया गया और मिंट पर्ल्स के साथ परोसा गया. इसके साथ शीरमल ब्रेड भी थी. इस व्यंजन में भारतीय मसालों और आधुनिक प्रस्तुति का अच्छा मेल देखने को मिला.

मुख्य खाने में देश के कई राज्यों का स्वाद

मुख्य भोजन में भी भारत की क्षेत्रीय विविधता साफ नजर आई. मेन्यू में पनीर लबाबदार के साथ हिमालयी गुच्छी मशरूम और एस्पेरेगस से तैयार गुच्छी मार्मिक शामिल था. इसमें केसर, किशमिश और ममरा बादाम का इस्तेमाल किया गया था.

दक्षिण भारत के स्वाद को कैरट बीन पोरियाल और ठक्काली बेले सारू के जरिए मेन्यू में शामिल किया गया. ठक्काली बेले सारू अरहर दाल और टमाटर से तैयार हल्का दक्षिण भारतीय सूप है. इसके अलावा मिलेट पुलाव, बीटरूट रायता और कई तरह की भारतीय रोटियां भी मेहमानों को परोसी गईं.

मिलेट को मेन्यू में शामिल करना भी खास रहा. भारत लंबे समय से मोटे अनाज यानी मिलेट्स को बढ़ावा देने की कोशिश करता रहा है और इस डिनर में भी उसकी झलक दिखाई दी.

मिठास में पुरानी दिल्ली की याद

डिनर का अंत भी भारतीय स्वाद के साथ हुआ. डेजर्ट में ओल्ड दिल्ली फ्रूट क्रीम विद जलेबी परोसी गई. इसमें मौसमी फलों और हल्की व्हिप्ड क्रीम के साथ कुरकुरी जलेबी को जोड़ा गया था. यह मिठाई पुरानी दिल्ली के मशहूर स्वाद से प्रेरित थी. इसके अलावा शहतूत फिरनी भी मेन्यू का हिस्सा रही. दूध और चावल से धीमी आंच पर तैयार की गई इस पारंपरिक मिठाई को मीठे शहतूत और गोल्ड लीफ से सजाया गया था.

ब्रिक्स गाला डिनर सिर्फ नेताओं के लिए आयोजित एक औपचारिक भोज नहीं था. इसके जरिए भारत ने अपनी अलग-अलग क्षेत्रीय रसोइयों, पारंपरिक व्यंजनों और मिलेट्स जैसी पहल को भी दुनिया के सामने रखने की कोशिश की.

यह भी पढ़ें: आयुर्वेद को वैश्विक मंच पर नई ऊंचाई देने की पहल: AIIA और विश्व आयुर्वेद परिषद के बीच बड़ा समझौता

-भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

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