बक्सर में पुलिस की बर्बरता बयां करते ग्रामीण
प्रशांत राय
Buxar Protest: 10 जनवरी की रात्रि करीब 12 बजे बक्सर जिले के मुफस्सिल थाने की पुलिस ने बनारपुर गांव में घुसकर जिस तरह से घर में सो रहीं महिलाओं एवं बच्चों पर लाठियां बरसाईं, उसका खौफ ग्रामीणों के चेहरे पर साफ दिखाई दे रहा है. आधी रात को घरों में घुसकर मुफ्फसिल पुलिस तांडव करती रही और जब सुबह इसका वीडियो वायरल हुआ तो किसानों का गुस्सा फूट पड़ा. भड़के किसानों ने पुलिस की कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया. गुस्साए लोगों ने पावर प्लांट के अंदर घुसकर पुलिस की गाड़ियों को जलाने के साथ ही एसजेवीएन के केबिन में भी आग लगा दी.
मुफ्फसिल थाना पुलिस की इस कार्रवाई के बाद किसानों के गुस्से की आग में करोड़ों की सम्पत्ति जलकर राख हो गई. दर्जनों लोग लहूलुहान हो गए और कई घंटों तक बक्सर सुलगता रहा. बनारपुर गांव में पुलिसिया जुल्म के बाद किसानों के अंदर सुलग रही चिंगारी को भांपने में नाकाम पुलिस जब तक वहां के हालात से उच्च अधिकारियों को अवगत कराती, चिंगारी आग बनकर निर्माणाधीन चौसा पावर प्लांट को अपने आगोश में ले चुकी थी.
इसके पहले, घरों में घुसकर पुलिस की टीम ने आधी रात को लोगों पर बर्बरतापूर्वक लाठियां बरसाईं थीं. उस घर की महिलाओं ने आरोप लगाया कि पुलिस पहले रस्सी के सहारे छत से होते हुए घर में दाखिल हुई और लोगों पर लाठीचार्ज शुरू कर दिया. पुलिस घर में आए रिश्तेदारों के नाबालिग बच्चों को भी रात में ही उठाकर लेकर चली गई और पूरी रात उनकी पिटाई की. इसको लेकर मीडियाकर्मियों ने पुलिस के सीनियर अफसरों से सवाल किया तो उन्होंने कहा कि किसान परिवारों की पिटाई करने के आरोपी पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है.
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डीआईजी नवीन चंद्र झा ने कहा, “वायरल वीडियो में जो पुलिसकर्मी पिटाई करते नजर आ रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.” डीआईजी ने बताया कि थानाध्यक्ष समेत लाठीचार्ज करने के आरोपी पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया गया है और उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा गया है.
वहीं, सदर अस्पताल के डॉक्टर अमलेश कुमार ने बताया कि लगभग 11-12 पुलिसकर्मी घायल अवस्था में सदर अस्पताल में आए थे, जिनमें दो के सिर में चोट है. उन्होंने कहा कि एक पुलिसकर्मी के कान से खून निकल रहा था, जिसके बाद उनका इलाज किया जा रहा है. बता दें कि मुआवजे की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन करीब तीन महीने से चल रहा है लेकिन अभी तक कोई जनप्रतिनिधि यहां नहीं पहुंचा था. हालांकि, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाओं के बाद इलाके में नेताओं का आना शुरू हो गया है.
-भारत एक्सप्रेस
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