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केंद्र ने 32 लाख सिविल सेवकों को प्रशिक्षित करने के लिए पहला Made-in-India Module किया शुरू

Karmayogi Competency Framework: स्वतंत्रता के बाद पहली बार भारत ने अपनी केंद्रीय नौकरशाही को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं, विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप कौशल में प्रशिक्षित करने के लिए एक स्वदेशी ढांचा तैयार किया है.

आधुनिक नौकरशाही को प्रशिक्षित करने के लिए 2021 में पीएम मोदी द्वारा स्थापित क्षमता निर्माण आयोग द्वारा विकसित कर्मयोगी योग्यता फ्रेमवर्क, मसूरी में लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी सहित सरकारी प्रशिक्षण अकादमियों में पाठ्यक्रमों और कार्यशालाओं के लिए आधार के रूप में काम करेगा.

कर्मयोगी योग्यता फ्रेमवर्क क्या है


यह 8 मुख्य (आत्म-जागरूकता, व्यक्तिगत प्रभावशीलता, समाधान अभिविन्यास, संचार, परिणाम अभिविन्यास, सहयोग, सेवा अभिविन्यास और परिचालन उत्कृष्टता) योग्यताओं और पांच नेतृत्व (रचनात्मकता, रणनीतिक नेतृत्व, सहयोगी नेतृत्व, टीम नेतृत्व और निर्णय लेने) योग्यताओं में विभाजित 13 व्यवहारिक योग्यताओं के लिए पाठ्यक्रम प्रदान करता है.

भारतीय ज्ञान प्रणालियां

इस फ्रेमवर्क के मूल में भारतीय ज्ञान प्रणालियां, मुख्य रूप से भगवद गीता है. इस संरचनात्मक सार्वजनिक अधिकारियों के बीच चार मुख्य गुणों को विकसित करने पर जोर दिया गया है – स्वाध्याय (खुद को पता लगाना), स्वामित्व (सहयोग), राजकर्म (कुशल वितरण) और स्वधर्म (नागरिकों की करना सेवा).

32 लाख केंद्रीय सिविल सेवकों को प्रशिक्षित करने के लिए इस पहले भारत-निर्मित मॉड्यूल के बारे में द ट्रिब्यून के साथ एक विशेष बातचीत में क्षमता निर्माण आयोग (Capacity Building Commission) में मानव संसाधन के सदस्य, आर. बालासुब्रमण्यम (R. Balasubramaniam) ने कहा कि अब तक हम नौकरशाही के लिए प्रशिक्षण ढांचे के मामले में पश्चिम के सस्ते नकलची रहे हैं.

लोक सेवकों का प्रशिक्षण

बालासुब्रमण्यम ने कहा, ‘अब हमारे पास लोक सेवकों को प्रशिक्षित करने के लिए अपना स्वयं का मानव संसाधन योग्यता ढांचा है. यह भारतीय ज्ञान प्रणालियों और भगवद गीता के सिद्धांतों पर आधारित है और वैश्विक योग्यता ढांचे के खिलाफ इसका परीक्षण किया गया है. इसे विकसित करने में हमें 18 महीने से अधिक का समय लगा.’ इससे पहले उन्होंने ‘पावर विदिन: द लीडरशिप लेगेसी ऑफ नरेंद्र मोदी’ नामक किताब लिखी थी, जो पीएम मोदी की नेतृत्व यात्रा को दर्शाती है.

उपनिवेशवाद से मुक्ति


सिविल सेवा प्रशिक्षण को उपनिवेशवाद से मुक्त करने की कोशिश करने वाले इस ढांचे से लगभग 60 मंत्रालयों, 93 विभागों और उनके अधीन 2,600 से अधिक संगठनों में काम करने वाले कर्मचारियों की जरूरतों को पूरा करने की उम्मीद है. बालासुब्रमण्यम ने कहा कि आयोग ने अपने-अपने कार्य क्षेत्रों में प्रत्येक कर्मचारी की भूमिकाओं को मैप किया है और अपेक्षित परिणाम प्राप्त करने के लिए आवश्यक विशिष्ट योग्यताओं की पहचान की है.

इंटीग्रेटेड ऑनलाइन ट्रेनिंग स्पेस

शुरुआत में, आयोग ने iGOT (इंटीग्रेटेड ऑनलाइन ट्रेनिंग स्पेस) पर 1,500 पाठ्यक्रमों की मेजबानी की है, जो प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए एक केंद्रीय भंडार है. एक साल में यह संख्या बढ़कर 5,000 हो जाएगी. सबसे ज्यादा मांग वाले पाठ्यक्रमों में नागरिक केंद्रितता, विकसित भारत, जन भागीदारी, कार्यस्थल के लिए कुर्सी योग (मोरारजी देसाई राष्ट्रीय योग संस्थान द्वारा डिजाइन किया गया) और तनाव और क्रोध प्रबंधन (रविशंकर की आर्ट ऑफ लिविंग द्वारा डिजाइन किया गया), कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की रोकथाम अधिनियम, एआई और मशीन लर्निंग शामिल हैं.

PM Modi से ली प्रेरणा

इस बारे में कि आयोग ने रूपरेखा के तत्वों पर किस प्रकार निर्णय लिया, बालासुब्रमण्यम ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री के 10 वर्षों के जीवन को देखा और इस बात पर विचार किया कि भारत का भविष्य निर्धारित करने के लिए वे बार-बार क्या कहते रहे हैं.

बालासुब्रमण्यम ने कहा, ‘हमने प्रधानमंत्री के चार मुख्य संदेशों की पहचान की है – विकास (विकसित भारत के लिए संकल्प); गर्व (भारतीय मूल्यों पर गर्व; उपनिवेशवाद से मुक्ति); कर्तव्य (कर्तव्य) और एकता (एकता). हमारे शोध से पता चला है कि इन 4 संकल्पों को प्राप्त करने के लिए सरकारी अधिकारियों को 4 मूलभूत मूल्यों को विकसित करने की जरूरत है – स्वाध्याय जैसा कि भगवद गीता में निहित है; सहकारिता जिसका अर्थ है सहयोग करना; राजकर्म जो व्यवस्था को समझने के बारे में है और स्वधर्म जिसका अर्थ है नागरिकों की सेवा करना.’ उन्होंने कहा कि हर लोक सेवक से भौतिक और आभासी प्रारूपों में सालाना 50 घंटे का प्रशिक्षण पूरा करने की उम्मीद की जाती है.

-भारत एक्सप्रेस

Bharat Express Desk

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