Congress organizational changes: साल 2029 के लोकसभा चुनाव और उससे पहले होने वाले राज्यों के विधानसभा चुनावों को लेकर कांग्रेस आलाकमान ने अभी से अपनी कमर कस ली है. पार्टी के भीतर एक बड़े संगठनात्मक फेरबदल की आहट अब बेहद तेज हो चुकी है. सूत्रों के हवाले से खबर है कि कांग्रेस हाईकमान ‘नॉन-परफॉर्मिंग’ नेताओं को बाहर का रास्ता दिखाने और संगठन को नए सिरे से धार देने के लिए दक्षिण भारत से लेकर उत्तर भारत तक कई राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों (PCC Chiefs) और एआईसीसी (AICC) प्रभारियों को बदलने की पूरी स्क्रिप्ट तैयार कर चुका है.
इस पूरे फेरबदल में सबसे बड़ी चर्चा राजस्थान को लेकर है, जहाँ के सियासी गलियारों में एक बार फिर ‘सचिन पायलट’ का नाम गूंज रहा है. राजनीतिक हलकों में यह चर्चा बेहद जोरों पर है कि मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा के नेतृत्व पर मंथन चल रहा है और उनकी जगह सचिन पायलट को फिर से राजस्थान कांग्रेस की कमान सौंपी जा सकती है. अगर ऐसा होता है, तो राजस्थान की राजनीति में यह सबसे बड़ा यू-टर्न साबित होगा.
उत्तर भारत के दूसरे सबसे अहम राज्य पंजाब में भी कांग्रेस की अंदरूनी कलह और गुटबाजी चरम पर है. हालिया स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी के निराशाजनक प्रदर्शन ने आग में घी का काम किया है.
सूत्रों के मुताबिक, मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग की विदाई लगभग तय मानी जा रही है. उनकी जगह पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा और विजय इंदर सिंगला के नामों पर हाईकमान बेहद गंभीरता से विचार कर रहा है.
कांग्रेस का सबसे बड़ा रणनीतिक फोकस इस समय दक्षिण भारत और तटीय राज्यों पर है, क्योंकि केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक को मजबूत किए बिना आगामी चुनावी जंग आसान नहीं होगी. गोवा में बड़ा प्रशासनिक एक्शन लेते हुए अमित पाटकर की छुट्टी कर दी गई है और उनकी जगह गिरीश चोडंकर को नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया गया है.
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की जारी चर्चाओं के बीच वरिष्ठ नेता बी.के. हरिप्रसाद को एक बड़ी और नई जिम्मेदारी सौंपने पर हाईकमान ने अपनी अंतिम मुहर लगा दी है. केरल में मौजूदा अध्यक्ष सनी जोसेफ के मंत्री बनने के बाद अब दलित या ईसाई समुदाय से नए चेहरे की तलाश है, जिसमें सांसद कोडिकुन्निल सुरेश, बेनी बेहानन और एंटो एंटनी का नाम सबसे आगे चल रहा है. वहीं, तमिलनाडु में सेल्वापेरुन्थागई के कामकाज की कड़ाई से समीक्षा की जा रही है.
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बदलाव की यह आंधी सिर्फ प्रदेश अध्यक्षों तक सीमित नहीं रहने वाली है. एआईसीसी (AICC) स्तर पर भी बड़े स्तर पर ‘सर्जरी’ की तैयारी है. महाराष्ट्र, तमिलनाडु और असम जैसे महत्वपूर्ण राज्यों के लिए बहुत जल्द नए प्रभारियों की नियुक्ति की जा सकती है. इसके अलावा, जो सचिव पिछले काफी समय से अपनी जिम्मेदारी निभाने में पीछे रहे हैं (नॉन-परफॉर्मर), आलाकमान उन्हें बाहर का रास्ता दिखाने का मन बना चुका है. साफ है कि कांग्रेस अब किसी भी ढिलाई के मूड में नहीं है और 2029 के रण के लिए अपनी सबसे मजबूत फौज मैदान में उतारना चाहती है.
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