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खिचड़ी, दही-चूड़ा और पवन सिंह का जादू; जब दिल्ली भाजपा कार्यालय बना ‘छोटा पूर्वांचल’, CM रेखा गुप्ता और मनोज तिवारी ने दिया एकजुटता का संदेश

मकर संक्रांति के मौके पर आज पूरी दिल्ली में त्योहार की रंगत देखने को मिली, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा भाजपा के प्रदेश कार्यालय में हुए शानदार जश्न की रही है. सुबह से ही दफ्तर के बाहर ढोल-नगाड़ों की थाप गूंज रही थी. ढोल-नगाड़ों की गूंज और दही-चूड़ा-तिलकुट की महक ने माहौल को पूरी तरह से पारंपरिक बना दिया.

इस बार भाजपा के समारोह में खास मेहमान के तौर पर राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नितिन नबीन पहुंचे. उनका स्वागत किसी बड़े नेता की तरह नहीं, बल्कि घर के मुखिया की तरह पारंपरिक माला और खिचड़ी की भेंट देकर किया गया. नितिन नबीन ने कहा, “संक्रांति सिर्फ सूरज के राशि बदलने का दिन नहीं है, बल्कि यह समय है अपनी ऊर्जा को फिर से बटोरने और समाज के आखिरी व्यक्ति की सेवा में खुद को समर्पित करने का.” उनकी इन बातों ने कड़ाके की ठंड के बीच कार्यकर्ताओं में जोश की नई लहर पैदा कर दी.

एकजुटता का संदेश

दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने भी इस मौके का बखूबी फायदा उठाया. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि आज खुशी दोगुनी है. एक तरफ प्रकृति का पर्व है और दूसरी तरफ हमारा संगठन और मजबूत होकर उभर रहा है. वहीं, पूर्वांचल मोर्चा के अध्यक्ष संतोष ओझा ने इस बात पर जोर दिया कि दिल्ली की धड़कन में पूर्वांचल समाज बसता है और ऐसे आयोजन आपसी फासलों को खत्म कर भाईचारे की नींव को और पक्का करते हैं.

मंच पर पूर्व केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे का अंदाज भी देखने लायक था. उन्होंने खुद अपने हाथों से मिठाई और दही-चूड़ा बांटा, जिससे माहौल काफी आत्मीय हो गया. दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी इस सांस्कृतिक एकता का हिस्सा बनीं. उन्होंने साफ कहा कि यह सिर्फ एक राजनीतिक जमावड़ा नहीं है, बल्कि एक ऐसा परिवार है जहां सद्भाव सबसे ऊपर है.

पवन सिंह के सुरों ने बांधा समां

उत्सव तब अपने चरम पर पहुंच गया जब भोजपुरी फिल्मों के सुपरस्टार और गायक पवन सिंह ने माइक उठाया. उन्होंने अपनी आवाज का ऐसा जादू बिखेरा कि सांसद मनोज तिवारी समेत तमाम बड़े नेता और कार्यकर्ता अपनी जगह पर झूमने लगे. कड़कड़ाती ठंड में संगीत और उल्लास के इस मेल ने कार्यक्रम में जान फूंक दी.

क्यों खास रहा यह आयोजन?

अक्सर राजनीतिक कार्यालयों में फाइलों और रणनीतियों की बात होती है, लेकिन आज भाजपा कार्यालय ने एक अलग मिसाल पेश की. यह आयोजन बताता है कि राजनीति चाहे कितनी भी प्रतिस्पर्धी क्यों ना हो, त्योहार हमें जमीन से जोड़ने का काम करते हैं. खिचड़ी के इस पर्व ने न केवल कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाया, बल्कि एक स्पष्ट संदेश भी दिया कि पार्टी अपनी संस्कृति और जड़ों को कभी नहीं भूलती.

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-भारत एक्सप्रेस

Shreyansh Choubey

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