दिल्ली हाईकोर्ट सर भाजपा से निष्कासित नेता कुलदीप सिंह सेंगर को झटका लगा है। कोर्ट ने सेंगर की उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्नाव बलात्कार पीड़िता के पिता की हिरासत में मौत के मामले में उनकी 10 साल की सजा को निलंबित करने की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि हालांकि सेंगर ने अपनी आधी से अधिक सजा काट ली है, लेकिन दोषी द्वारा काटी गई अवधि उन कई कारकों में से एक है, जिन्हें सजा को निलंबित करने की मांग करने वाले आवेदन पर निर्णय लेते समय ध्यान में रखा जाना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि अन्य कारकों में अपराध की गंभीरता, अपराध की प्रकृति, दोषी का आपराधिक इतिहास, न्यायालय में जनता के विश्वास पर प्रभाव आदि शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि उक्त कारकों के अलावा, उन्होंने पीड़िता को खतरे के संबंध में सुप्रीम कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियों और पीड़िता, उसके वकील, मां और परिवार के अन्य सदस्यों की सुरक्षा के लिए पारित आदेश को ध्यान में रखा है। अदालत ने कहा, “अपीलकर्ता के पिछले इतिहास के अनुसार, उसे पहले ही नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार के अपराध के लिए दिनांक 16.12.2019 के निर्णय और दिनांक 20.12.2019 के आदेश के अनुसार आईपीसी की धारा 376 के साथ यौन अपराधों से बच्चों के संरक्षण अधिनियम, 2012 की धारा 5 और 6 के तहत दोषी ठहराया जा चुका है और उसे शेष जीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।”
04 मार्च, 2020 को, सेंगर को भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 120बी, 193, 201, 203, 211, 323, 341 और 304 (भाग ii) और शस्त्र अधिनियम की धारा 3 के साथ 25 के तहत अपराधों के लिए दोषी ठहराया गया था। अप्रैल 2018 में नाबालिग बलात्कार पीड़िता का परिवार अदालत की सुनवाई के लिए उन्नाव गया था, जब उसके पिता पर आरोपियों ने दिनदहाड़े बेरहमी से हमला किया था। अगले ही दिन पुलिस ने अवैध हथियार रखने के आरोप में पिता को गिरफ्तार कर लिया और पुलिस हिरासत में उसे कई चोटें आईं, जिसके कारण उसकी मौत हो गई।
अगस्त 2019 में, पीड़िता के पिता की मौत से संबंधित मामले सहित मामले में पांच मामलों की सुनवाई सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उत्तर प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित कर दी गई थी। न्यायमूर्ति शर्मा ने कहा कि सजा के फैसले में दर्ज किया गया है कि घटनाओं के क्रम से यह स्पष्ट रूप से स्थापित होता है कि कुलदीप सिंह सेंगर और उसके भाई के संरक्षण में, अन्य आरोपियों ने पीड़िता के पिता पर पैर और मुक्का से हमला किया और फिर राइफल की नली से उन पर वार किया। अदालत ने कहा, “निर्णय में आगे दर्ज किया गया है कि उसके बाद की घटनाओं के क्रम से यह स्पष्ट रूप से स्थापित होता है कि अपीलकर्ता कुलदीप सिंह सेंगर और उसके भाई जयदीप सिंह सेंगर के संरक्षण में, इस मामले में अन्य आरोपी व्यक्तियों ने पीड़ित पर पैर और मुक्का से हमला किया और फिर उसे राइफल की नली से मारा।”
-भारत एक्सप्रेस
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