Digital India Bill: सोशल मीडिया पर अश्लीलता रोकने के लिए केंद्र सरकार नए कानून लाने की तैयारी कर रही है. नए कानून में यूटुयूबर डिजिटल प्लेटफार्म और सोशल मीडिया यूजर्स को रेगुलेट करने का प्रावधान है. इसमें अलग-अलग सेक्टर के लिए स्पेसिफिक प्रोविजन वाले कानून बनाए जाएंगे. इसमें टेलीकम्युनिकेशन, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी और इंफॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग रिलेटेड सब्जेक्ट्स के लिए अलग-अलग प्रोविजन रखे जाएंगे. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय सोशल मीडिया इंफ्ल्यूएंसेर्स के लिए कोड ऑफ कंडक्ट जारी करेगा. इसमें इंफ्ल्यूएंसेर्स को रेटिंग के अलावा डिस्क्लेमर भी देना होगा.
रेटिंग से अश्लीलता, फूहड़ता और भौंडेपन का दायरा भी कोड ऑफ कंडक्ट में तय होगा. पांच लाख से 50 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स वाले इंफ्ल्यूएन्सर के लिए इसमें कोई माफी नहीं होगी और शिकायतों पर तत्काल संबंधित प्राधिकार पुलिस, प्रशासन या अन्य एजेंसी द्वारा कदम उठाया जाएगा. इंडिया गॉट लेटेंट से जुड़े विवाद सामने आने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से कानून लाने पर विचार करने को कहा था. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा था कि वह सोशल मीडिया पर अश्लीलता को रोकने के लिए क्या कदम उठा रही है.
सुप्रीम कोर्ट के इस.सवाल के बाद सरकार अब सोशल मीडिया को लेकर अलग से दिशा निर्देश निर्धारित किए जाने की तैयारी है. कई कड़े कानूनी प्रावधान किए जाने पर लगातार काम चल रहा है. इससे पहले संसदीय समिति ने भी सोशल मीडिया पर फैलाई जा रही अश्लीलता को लेकर सवाल उठाए थे, जिसके बाद केंद्र सरकार सोशल मीडिया के लिए डिजिटल इंडिया कानून लाने जा रही है.
देश के जाने माने साइबर लॉ एक्सपर्ट पवन दुग्गल ने कहा कि सोशल मीडिया पर अश्लीलता को रोकने के लिए नए कानून का आना बेहद जरूरी है. उनका मानना है कि आईटी कानून के तहत सोशल मीडिया पर लगाम लगाना मुश्किल है. सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता की माने तो अश्लीलता, पोर्नोग्राफी और गैर-कानूनी कंटैंट को रोकने के लिए प्रिंट मीडिया और टेलीविजन मीडिया को लेकर बनाए गए कानून डिजिटल मीडिया पर भी लागू होता है.
केंद्र सरकार ने ओ. टी. टी. प्लेटफार्म के लिए जो एडवाइजरी जारी की है. वह कानूनी तौर पर बाध्यकारी नही है. इसको रोकने के लिए जिस अधिनियम को लाने की बात सरकार कर रही है. उससे संबंधित मसौदा बाहर नहीं आया है. संसदीय समिति ने कानून के मसौदे के बारे में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय से राय मांगी है.
विराग गुप्ता की माने तो मनोरंजन के नाम पर फूहड़ता और नग्नता रोकने के लिए कानून और प्रभावी रेगुलेटर की जरूरत है. जबकि सुप्रीम कोर्ट के वकील प्रदीप यादव की माने तो सरकार द्वारा लाए जा रहे नए कानून से भी सोशल मीडिया पर.अश्लीलता रोक पाना असंभव है. उनका मानना है कि जब तक साइबर क्राइम पर सरकार लगाम नही लगती है तब तक सोशल मीडिया पर अश्लीलता पर रोक लगाना संभव नही है.
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-भारत एक्सप्रेस
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