रिपोर्ट – अटल बिहारी पांडेय
कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों, तो किस्मत की लकीरें भी रास्ता दे देती हैं. बिहार के गोपालगंज जिले के भोरे प्रखंड में एक ऐसी ही ‘बेटी’ अपनी तकदीर खुद लिख रही है. रामनगर गांव की रहने वाली 15 साल की सोनी कुमारी, जो पैरों से लाचार है, लेकिन उसके सपनों में इतनी जान है कि वह हर रोज 2 किलोमीटर का सफर पैदल तय कर स्कूल पहुंचती है. शासन-प्रशासन भले ही ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ के बड़े-बड़े दावे करे, लेकिन सोनी के संघर्ष के आगे ये तमाम दावे खोखले नजर आते हैं, क्योंकि 15 साल की उम्र होने के बावजूद आज तक उसे सरकारी मदद के नाम पर एक अदद ट्राईसाइकिल तक नसीब नहीं हुई.
सोनी की जिंदगी दुखों के पहाड़ जैसी रही है. जब वह महज एक साल की थी, तभी उसके पिता नंदकिशोर राम का टीबी की बीमारी की वजह से निधन हो गया. घर की पूरी जिम्मेदारी मां गुलाइची देवी के कंधों पर आ गई. गरीबी का आलम यह था कि दो वक्त की रोटी का इंतजाम करना भी दूभर था, लेकिन मां ने हार नहीं मानी. दूसरों के खेतों में मजदूरी कर मां ने सोनी और उसकी बड़ी बहन को पाल-पोसकर बड़ा किया. सोनी बचपन से ही पढ़ना चाहती थी, लेकिन गरीबी और पैरों की दिव्यांगता उसके रास्ते का सबसे बड़ा रोड़ा थी.
सोनी की किस्मत तब बदली जब दो साल पहले उसकी मां की मुलाकात राजघाट गांव के एक निजी स्कूल के प्रिंसिपल अरुण कुमार से हुई. अरुण कुमार ने बच्ची के पढ़ने के जज्बे को देखा और दरियादिली दिखाते हुए सोनी का नामांकन अपने स्कूल में कर लिया. सिर्फ यही नहीं, उन्होंने सोनी की पढ़ाई पूरी तरह मुफ्त कर दी.
तभी से सोनी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा. आज वह पहली कक्षा की छात्रा है और रोजाना अपने घर से 2 किलोमीटर दूर राजघाट स्थित स्कूल जाती है. बिना किसी बैसाखी या ट्राईसाइकिल के, अपने कमजोर पैरों के सहारे वह रास्ता तय करती है. रास्ते में चलने वाले लोग उसे देखते हैं, उसकी हिम्मत की तारीफ करते हैं, पर सिस्टम के कानों पर जूं तक नहीं रेंगती.
सोनी का संघर्ष तब पूरी दुनिया के सामने आया, जब मशहूर गायिका और विधायक मैथिली ठाकुर ने उसका एक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया. वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया और लोगों ने इस नन्ही बच्ची के हौसले को सलाम किया. हालांकि, इस वीडियो ने व्यवस्था की उस कमी को भी उजागर कर दिया, जहां एक जरूरतमंद बच्ची 15 साल से बुनियादी सरकारी लाभों से वंचित है.
सोनी के पास आज सुविधाएं नहीं हैं, लेकिन उसकी आंखों में एक बड़ा सपना पलता है. वह पढ़-लिखकर डॉक्टर बनना चाहती है. सोनी का कहना है, “मैं डॉक्टर बनकर उन लोगों की सेवा करना चाहती हूं जो मेरी तरह बेबस और बीमार हैं. वह नहीं चाहती कि किसी और को इलाज के अभाव में वैसी ही परेशानियों का सामना करना पड़े, जैसी उसने देखी हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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