जब भी जरूरत पड़ी, भारत ने हमेशा मदद का हाथ बढ़ाया है. 28 मार्च को म्यांमार में आए 7.7 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप के बाद, भारत ने तुरंत अपनी राहत और बचाव कार्य शुरू किए. यह भूकंप थाईलैंड तक महसूस हुआ था. भारत ने ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के तहत म्यांमार को मदद प्रदान करने की शुरुआत की और सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वाले देशों में शामिल हो गया.
म्यांमार में मृतकों की संख्या बढ़कर लगभग 2000 तक पहुँच चुकी है. इस संकट के समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने म्यांमार के सैन्य प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग से कहा, “भारत इस कठिन घड़ी में म्यांमार के लोगों के साथ खड़ा है.”
भारत ने पहले भी अन्य देशों की मदद की है, खासकर जब प्राकृतिक आपदाएं आईं. अब हम भारत द्वारा की गई कुछ प्रमुख राहत कार्यों पर नजर डालते हैं.
जब म्यांमार में भूकंप आया, भारत ने तुरंत ‘ऑपरेशन ब्रह्मा’ के तहत अपनी मदद का ऐलान किया. शनिवार को भारत ने दो नौसैनिक जहाज भेजे और 118 चिकित्सकों वाली एक भारतीय सेना की फील्ड अस्पताल टीम को भी तैनात किया, जो घायलों को तत्काल चिकित्सा सहायता प्रदान करेगी.
118 सदस्यीय इस टीम का नेतृत्व लेफ्टिनेंट कर्नल जगनीत गिल कर रहे हैं. भारतीय सेना ने कहा कि यह टीम 60 बेड का मेडिकल ट्रीटमेंट सेंटर बनाएगी, जिससे घायलों को इलाज मिल सके.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जयस्वाल ने कहा, “आज हमने ऑपरेशन ब्रह्मा शुरू किया है. ब्रह्मा सृजन के देवता हैं और इस समय जब हम म्यांमार के लोगों की मदद कर रहे हैं, तो इस ऑपरेशन का नाम विशेष महत्व रखता है.”
उन्होंने कहा, “जब भारत कहता है ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ (पूरी दुनिया एक परिवार है), तो हम इसे वास्तविकता में लाना चाहते हैं. हमें गर्व है कि हम इस संकट के समय म्यांमार के लोगों के साथ खड़े हैं और सहायता प्रदान कर रहे हैं.”
भारत ने NDRF की 80 सदस्यीय टीम भेजी, जो ठोस कटर, ड्रिल मशीन, प्लाज्मा कटर और अन्य बचाव उपकरणों से लैस है. राहत सामग्री की पहली खेप, जिसमें आवश्यक दवाइयाँ, स्लीपिंग बैग, कंबल और खाद्य सामग्री शामिल थी, शनिवार सुबह यांगून भेजी गई.
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बताया कि ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत INS सतपुरा और INS सावित्री 40 टन मानवीय सहायता लेकर यांगून की ओर रवाना हो गए हैं. इसके अलावा, दो और जहाज अतिरिक्त राहत सामग्री लेकर रवाना होंगे.
ऑपरेशन ब्रह्मा एकमात्र राहत कार्य नहीं है. पिछले साल सितंबर में वियतनाम, लाओस और म्यांमार को सुपर तूफान यागी ने प्रभावित किया था. इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सद्भाव के तहत इन देशों को 10 टन सहायता भेजी थी.
भारत ने वियतनाम और म्यांमार में राहत सामग्री भेजी, जिसमें जल शुद्धिकरण उपकरण, कंबल, पानी की बोतलें, रसोई के बर्तन और सौर दीपक शामिल थे. यह सहायता भारतीय सेना के INS सतपुरा के जरिए भेजी गई थी.
2023 के फरवरी में तुर्की और सीरिया में 7.7 तीव्रता का भूकंप आया था, जिससे भारी तबाही मची थी. भारत ने ऑपरेशन दोस्त के तहत तुर्की को सहायता भेजी और NDRF की टीमों को राहत कार्य के लिए तैनात किया. इसके अलावा, भारत ने सीरिया को भी मानवीय सहायता भेजी, चाहे वह अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना कर रहा था.
भारत ने मई 2023 में म्यांमार को ‘ऑपरेशन करुणा’ के तहत सहायता भेजी. यह ऑपरेशन म्यांमार और बांगलादेश में आए सुपर चक्रवात मोचा के बाद शुरू हुआ था. भारत ने चार जहाजों के माध्यम से आवश्यक राहत सामग्री यांगून भेजी, जिसमें खाद्य सामग्री, टेंट, दवाइयाँ, पानी के पंप, जनरेटर और सैनिटरी सामग्री शामिल थी.
2015 में नेपाल में आए भूकंप के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन मैत्री’ शुरू किया. यह भारत द्वारा विदेश में किए गए सबसे बड़े राहत कार्यों में से एक था. भारत ने 33 एयरफोर्स विमानों और 520 टन राहत सामग्री के साथ नेपाल को सहायता भेजी थी.
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-भारत एक्सप्रेस
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