

भारत ने म्यांमार में भूकंप के बाद ‘यू हला थिन’ मठ में फंसे लगभग 170 भिक्षुओं के बचाव कार्य के लिए नेशनल डिजास्टर रेस्पांस फोर्स (NDRF) की टीमें भेजी हैं. यह बचाव कार्य ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत किया जा रहा है.
विदेश मंत्रालय के मुताबिक, “NDRF की टीमें ‘यू हला थिन’ मठ में फंसे भिक्षुओं को निकालने का काम कर रही हैं. आर्मी की टीम आज अस्पताल साइट का दौरा करेगी और कल मेडिकल सेवाएं शुरू करेगी.”
इसके अलावा, स्काई विला नामक स्थान पर भी बचाव कार्य जारी है, जहां चार 11 मंजिला टावर गिर गए हैं. राहत सामग्री 2000 भिक्षुओं तक पहुंचाई जाएगी, जिनकी स्थिति गंभीर नहीं है लेकिन उनके पास कोई बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं.
भूकंप के बाद भारतीय सहायता
भारत ने ऑपरेशन ब्रह्मा के तहत म्यांमार और थाईलैंड में आए विनाशकारी भूकंप के बाद तुरंत मदद भेजी. भारतीय रक्षा मंत्रालय के अनुसार, NDRF और भारतीय सेना के डॉक्टरों की टीम म्यांमार भेजी गई है.
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ‘X’ पर लिखा, “80 सदस्यीय NDRF खोज और बचाव टीम ने नय पई ताव के लिए उड़ान भरी. वे म्यांमार में बचाव कार्य में मदद करेंगे.”
भारत ने तीन C-130J और दो C-17 ग्लोबमास्टर विमान भेजे. भारतीय सेना की 50 (I) पैरा ब्रिगेड की एक विशेषज्ञ बचाव यूनिट भी म्यांमार भेजी गई.
राहत सामग्री की आपूर्ति
मंत्रालय ने बताया कि भारतीय नौसेना के जहाजों ने Yangon के लिए राहत सामग्री भेजने का काम शुरू कर दिया है. इन जहाजों में 52 टन राहत सामग्री, जिसमें कपड़े, पीने का पानी, खाद्य पदार्थ, दवाइयां और अन्य आपातकालीन सामान शामिल हैं, भेजे जा रहे हैं.
इसके अलावा, भारतीय वायुसेना का C-130J विमान भी 15 टन राहत सामग्री लेकर म्यांमार पहुंच चुका है.
भूकंप से हुई तबाही
म्यांमार में 7.7 तीव्रता का भूकंप शुक्रवार को आया था, जिससे बड़ी संख्या में इमारतें ढह गईं. अब तक 1700 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, और 3400 लोग घायल हैं. 300 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं.
यह भूकंप म्यांमार के लिए 100 वर्षों में सबसे भयंकर साबित हुआ है. भारत ने इस आपदा के बाद अपनी ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस एंड डिजास्टर रिलीफ (HADR) कार्यों को तेज़ी से लागू किया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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