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‘पूरी दुनिया भगवान शिव का अनुसरण करे…’: Elon Musk के पिता ने यूं की सनातन धर्म की समावेशिता की सराहना

अमेरिकी अरबपति और टेस्ला के सीईओ एलन मस्क के पिता एरोल मस्क ने सोमवार को सनातन धर्म की प्रशंसा करते हुए इसे विश्व शांति और कल्याण का मार्ग बताया और शिव को परम रक्षक बताया.

एरोल मस्क ने मीडिया से बातचीत में कहा, “मुझे लगता है कि अगर पूरी दुनिया शिव का अनुसरण करे, तो सब ठीक हो जाएगा. मैं कोई विशेषज्ञ नहीं हूं, लेकिन मैं इससे मोहित हूं. यह इतना पुराना है, धर्म इतना प्राचीन है कि यह मुझे हैरान कर देता है. यह हमें बताता है कि हम वास्तव में कितना कम जानते हैं.”

आध्यात्मिक विरासत के प्रति आकर्षण के बारे में खुलकर बात

79 वर्षीय व्यवसायी ने प्राचीन भारतीय विरासत और आध्यात्मिक विरासत के प्रति अपने आकर्षण के बारे में खुलकर बात की, जो एक तरह से, आने वाले दिनों में आशीर्वाद लेने के लिए अयोध्या में राम मंदिर जाने की उनकी योजनाओं में परिलक्षित होता है.

भगवान शिव को सभी सांसारिक बीमारियों का समाधान बताकर, एरोल मस्क ने एक तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समावेशिता और सद्भाव के संदेश का भी समर्थन किया, जो वसुधैव कुटुम्बकम (दुनिया एक परिवार है) जैसी अवधारणाओं में समाहित है.

भारत की यात्रा पर हैं एलन मस्क के पिता एरोल मस्क

सनातन धर्म को शांति, विश्‍व कल्याण से जोड़ने वाले विचार

सनातन धर्म को शांति और कल्याण से जोड़ने वाली एरोल मस्क की टिप्पणी निश्चित रूप से हिंदू धर्म में बढ़ती वैश्विक रुचि को और बढ़ाएगी, ऐसे समय में जब नरेंद्र मोदी सरकार सभ्यतागत गौरव को जगाने का प्रयास कर रही है.

आध्यात्मिकता और सनातन धर्म के लिए एरोल मस्क की प्रशंसा महाकुंभ मेले के करीब आती है, जो भारत की सभ्यतागत विरासत का जीवंत प्रदर्शन था, जिसने विदेशी गणमान्य व्यक्तियों सहित लाखों आगंतुकों को आकर्षित किया.

मोदी सरकार ने महाकुंभ का आयोजन कराकर संस्कृति दर्शाई

हाल के वर्षों में, मोदी सरकार ने महाकुंभ जैसे आयोजनों का उपयोग अंतर-सांस्कृतिक संबंध और विविधता में एकता प्रदर्शित करने के साथ वैश्विक मंच पर भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जीवंतता को पेश करने के लिए किया है.

दक्षिण अमेरिकी व्यवसायी की शिव और हिंदू धर्म के प्रति प्रशंसा भी इस बात का संकेत है कि कैसे भारत ने अपनी आध्यात्मिक परंपराओं को बढ़ावा देने, बड़े पैमाने पर धार्मिक आयोजनों का आयोजन करने, अपने प्रवासी समुदायों को सशक्त बनाने और सांस्कृतिक कूटनीति को अपनी विदेश नीति में एकीकृत करने के लिए सनातन धर्म का सफलतापूर्वक उपयोग किया है, जिससे इसकी वैश्विक छवि और प्रभाव में वृद्धि हुई है.

हाल के दिनों में, भारत की विदेश नीति ने भी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक कूटनीति को तेजी से एकीकृत किया है, अपने सभ्यतागत लोकाचार का उपयोग सद्भावना बढ़ाने, नकारात्मक आख्यानों का मुकाबला करने और खुद को एक सांस्कृतिक महाशक्ति के रूप में स्थापित करने के लिए किया है.

यह भी पढ़िए: Servotech के ग्‍लोबल एडवाइजर एरोल मस्क भारत आए, करेंगे राम मंदिर के दर्शन, देश में ग्रीन टेक्नोलॉजी को मिलेगा बढ़ावा

-भारत एक्सप्रेस 

Bharat Express Desk

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